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PDA की काट-136 सीटें को नजर और कार्यकर्ताओं में उत्साह... मथुरा में यूं हीं नहीं चल रहा BJP-RSS का मंथन, INSIDE STORY

3-4 अक्टूबर को मथुरा में BJP और RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, बूथ संगठन और अलग-अलग क्षेत्रों की जमीनी स्थिति की समीक्षा हो रही है.

PDA की काट-136 सीटें को नजर और कार्यकर्ताओं में उत्साह... मथुरा में यूं हीं नहीं चल रहा BJP-RSS का मंथन, INSIDE STORY
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जीतेंद्र चौहान
जीतेंद्र चौहान6 Mins Read

Updated on: 3 Oct 2026 4:23 PM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा संगठन अपना पूरा जोर लगा रही है तो वही इस बीच उत्तर प्रदेश के मथुरा में इस समय आयोजित भाजपा और RSS का दो दिवसीय महा-चिंतन शिविर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा रणनीतिक केंद्र बना हुआ है.

इस हाई-लेवल बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी और आरएसएस के वरिष्ठ संगठन मंत्री बंद कमरे में राज्य के सियासी भविष्य का खाका तैयार कर रहे हैं. इसी के साथ संवाददाता जीतेंद्र चौहान की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में कई जानकारी सामने आई है जिसमें विधायकों की साट देने से लेकर जमीनी स्तर पर कैसा काम हो रहा है वहां तक. आइए जानते हैं 27 रण के लिए पश्चिम यूपी में क्या चल रहा है?

इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी 'मिशन 2027' यूपी विधानसभा चुनाव के लिए एक सख्त, समयबद्ध और परिणामकारी चुनावी रोडमैप बनाना है. इसके तहत पिछले लोकसभा चुनाव में कमजोर रहे बूथों और विधानसभा सीटों की ग्राउंड रिपोर्ट को बहुत बारीकी से खंगाला जा रहा है. सूत्रों की माने तो इस चिंतन शिविर का सबसे अहम और संवेदनशील हिस्सा पश्चिम उत्तर प्रदेश की एक-एक विधानसभा सीट और वहां के संभावित प्रत्याशियों का रिव्यू करना है. बैठक में इस बात पर विशेष जोर है कि किस सीट पर कौन सा चेहरा भाजपा को जीत दिला सकता है.

MLA की सीट के लिए सिफारिश नहीं जमीनी पकड़ चाहिए

प्रत्याशी चयन के लिए किसी भी नेता की सिफारिश के बजाय उम्मीदवार की स्थानीय छवि, कार्यकर्ताओं के बीच उसकी साख, जातीय पकड़ और उसकी जमीनी लोकप्रियता को ही टिकट का मुख्य पैमाना माना जा रहा है. जिन सीटो पर मौजूदा विधायकों के खिलाफ असंतोष दिख रहा है, वहां नए और जिताऊ चेहरों को मौका देने पर सहमति बनती दिख रही है.

इसके साथ ही शासन-प्रशासन के स्तर पर स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी को दूर करने और नेताओं को तय सीमा के भीतर स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपने पर भी सीधी बात हो रही है. संघ और संगठन मिलकर बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

जाति समीकरण के लिए कैसे काम कर रही BJP?

स्टेट मिरर हिंदी के संवाददाता के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक कार्ड की काट तलाशने के लिए शिविर में विशेष माइक्रो-मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जा रहा है. इसके तहत गैर-यादव ओबीसी समाज सैनी, मौर्या, शाक्य, पाल, गुर्जर और दलित मतों को भाजपा के साथ मजबूती से जोड़े रखने का खाका तैयार हो रहा है.

सवर्ण समाज के लिए अलग प्लानिंग कर रही BJP

वहीं, यूजीसी नियमों, नौकरियों या स्थानीय प्रशासनिक उपेक्षा के कारण सवर्ण समाज खासकर के ब्राह्मण और क्षत्रिय/राजपूत तथा गुर्जर समुदाय के बीच पनप रहे असंतोष को शांत करने के लिए अंदरूनी नीतियां बनाई जा रही हैं, ताकि पारंपरिक वोट बैंक में कोई दरार न पड़े.

यादव वोट के लिए BJP मथुरा को बना रही चुनावी हथियार

राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद अब भाजपा-संघ के लिए ब्रज क्षेत्र यानी मथुरा वैचारिक और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण का नया केंद्र बन गया है. सूत्रों का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को आगे बढ़ाकर भाजपा न केवल अपने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर रही है, बल्कि कृष्ण भक्ति परंपरा से जुड़े यादव समाज और अन्य पिछड़ी जातियों को भी वैचारिक रूप से साधने की कोशिश में है. इसके अलावा, संघ के आगामी शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के माध्यम से युवा वोटरों को जोड़ने की योजना है.

पूरा UP एक तरफ पश्चिम यूपी एक तरफ

भाजपा और संघ की यह पूरी घेराबंदी इसलिए इतनी अहम मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा सच यही है लखनऊ की सत्ता का रास्ता हमेशा पश्चिमी यूपी से होकर ही गुजरता है. चुनावी आंकड़ों के लिहाज से देखें तो राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 136 सीटें अकेले पश्चिम यूपी के इलाके से आती हहिं जिम्मे प्रमुख सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ, अलीगढ़, आगरा मंडल में आती हैं. वहीं 80 लोकसभा सीटों में से 27 सीटें इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं.

10 सालों में भाजपा को पश्चिम यूपी से कब कितनी सीट मिली?

प्रदेश में जब भी विधानसभा चुनाव होते हैं, वोटिंग की शुरुआत हमेशा पश्चिम यूपी के जिलों से ही होती है. इसलिए पहले और दूसरे चरण का जनमत पूरे प्रदेश के राजनीतिक माहौल और चुनावी हवा के रुख को तय कर देता है. साल 2017 में भाजपा ने पश्चिम की 136 में से 109 सीटें जीती थीं, जो 2022 के चुनाव में घटकर 93 सीटों पर आ गई थीं. अब 2027 के चुनाव में भाजपा का लक्ष्य पश्चिम में 110 से अधिक सीटें हासिल करने का है, और इसी का मजबूत खाका इस समय मथुरा में खींचा जा रहा है.

पश्चिम यूपी में किस जाती की कितनी आबादी?

पश्चिम यूपी का सामाजिक ताना-बाना बेहद अनूठा और संवेदनशील है. यहाँ 26% से 40% तक की निर्णायक मुस्लिम आबादी है, तो वहीं 12% से 17% के बीच जाट मतदाता मौजूद हैं. इसके अलावा 20% से अधिक दलित आबादी और मजबूत सियासी पकड़ रखने वाला गुर्जर व गैर-यादव ओबीसी समाज यहाँ की हार-जीत तय करता है.

इसी वजह से आज सपा अपने PDA फार्मूले से, बसपा अपनी 'साइलेंट' दलित-मुस्लिम रणनीति से और भाजपा-रालोद अपने मजबूत किसान व सामाजिक गठजोड़ से पश्चिम को साधने में लगे हैं. गन्ने का सही मूल्य, समय पर भुगतान, बिजली दरें और आवारा पशुओं जैसे सीधे किसान मुद्दों के साथ-साथ सही जिताऊ प्रत्याशियों का चयन, सामाजिक संतुलन और मथुरा का सांस्कृतिक संदेश ही इस बार पश्चिम यूपी का जनादेश तय करेगा. मथुरा में चल रहे बीजेपी आरएसएस के यह दो दिवसीय चिंतन शिविर 2027 के चुनाव की सबसे बड़ी और निर्णायक रणनीतिक नींव साबित होगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा .

स्टेट मिरर स्पेशलएक्सप्लेनर
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