कौन थे अशोक सिंघल? जिनका किरदार निभाने जा रहे हैं अनुपम खेर, राम जन्मभूमि आंदोलन में क्या रही उनकी भूमिका
अनुपम खेर फिल्म ‘श्री रामभूमि’ में अशोक सिंघल का किरदार निभा रहे हैं. जानिए कौन थे अशोक सिंघल और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी अहम भूमिका.
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के पीछे कई दशकों की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक यात्रा जुड़ी हुई है. इस यात्रा में कई ऐसे व्यक्तित्व रहे, जिन्होंने अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इन्हीं में एक नाम अशोक सिंघल का भी है, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को संगठित स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई. अब जब अभिनेता अनुपम खेर फिल्म ‘श्री रामभूमि’ में अशोक सिंघल का किरदार निभाने जा रहे हैं, तो एक बार फिर उनके जीवन, विचारों और आंदोलन में योगदान की चर्चा शुरू हो गई है.
अनुपम खेर निभाएंगे अशोक सिंघल की भूमिका
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह फिल्म ‘श्री रामभूमि’ में विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेता रहे अशोक सिंघल की भूमिका निभाने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ऐसा व्यक्तित्व थे, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को निष्ठा, संकल्प और समर्पण के साथ दिशा दी.
अनुपम खेर ने कहा कि इतिहास के ऐसे व्यक्तित्व को पर्दे पर जीवंत करना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है. वह इस भूमिका को पूरी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे.
कौन थे अशोक सिंघल?
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की. हालांकि उनका जीवन केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. युवावस्था में ही उनका झुकाव सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की ओर बढ़ा.
वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और बाद में पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य किया. संगठन क्षमता, अनुशासन और धार्मिक विषयों की गहरी समझ के कारण वह धीरे-धीरे संघ परिवार के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए.
विश्व हिंदू परिषद में मिली बड़ी जिम्मेदारी
अशोक सिंघल विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए. 1980 के दशक में जब राम जन्मभूमि आंदोलन ने गति पकड़ी, तब उन्होंने इसे व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उन्होंने संत समाज, धार्मिक संस्थानों और आम लोगों के बीच संवाद स्थापित किया. उनका प्रयास था कि राम मंदिर आंदोलन को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया जाए और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए.
राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल कई प्रमुख अभियानों से जुड़े रहे. 1989 में हुए रामशिला पूजन अभियान के माध्यम से देशभर के लोगों को आंदोलन से जोड़ा गया. इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और अयोध्या के लिए पूजित ईंटें भेजी गईं.
1990 की कारसेवा के दौरान भी अशोक सिंघल आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे. इस दौर की घटनाओं ने राम जन्मभूमि मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक विषय बना दिया.
1992 में बाबरी ढांचा विध्वंस की घटना के समय भी वह विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेताओं में थे. इसके बाद राम मंदिर का मुद्दा लंबे समय तक न्यायिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रहा.
श्रद्धा और विश्वास पर अनुपम खेर की बात
फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले अनुपम खेर ने अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना फिल्म से जुड़े सभी लोगों के लिए सकारात्मक ऊर्जा और शुभकामनाओं के लिए थी. राम मंदिर से जुड़े विवादों पर उन्होंने कहा कि किसी एक घटना के कारण लोगों की आस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए. उनके अनुसार, श्रद्धालुओं ने मंदिर में जो भी योगदान दिया, वह अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दिया.
अशोक सिंघल की विरासत
अशोक सिंघल का निधन 17 नवंबर 2015 को हुआ. उनके समर्थक उन्हें राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख सूत्रधारों में मानते हैं, जबकि आलोचक उनके नेतृत्व और आंदोलन की राजनीति को अलग दृष्टिकोण से देखते हैं.
अब फिल्म ‘श्री रामभूमि’ के माध्यम से उनके जीवन और आंदोलन में भूमिका को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है. यह फिल्म एक ऐसे दौर और व्यक्तित्व को सामने लाने की कोशिश करेगी, जिसने भारतीय सामाजिक और धार्मिक इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई.
किसी घटना से श्रद्धा कमजोर नहीं होनी चाहिए
अनुपम खेर अयोध्या में फिल्म श्रीराम की शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले राम मंदिर में पूजा-अर्चना की. उनका कहना था कि यह सब फिल्म से जुड़े सभी लोगों के लिए शांति और अच्छी ऊर्जा की कामना के लिए था. राम मंदिर के पैसों को लेकर हाल ही में जो विवाद हुए, उन पर बोलते हुए उन्होंने लोगों से कहा कि वे शक से अपने विश्वास को कमजोर न होने दें.
2025 में 'तनवी: द ग्रेट' का किया था निर्देशन
अनुपम खेर ने आगे कहा कि भगवान राम और सनातन परंपरा का अस्तित्व प्राचीन काल से रहा है और किसी एक घटना के कारण लोगों की श्रद्धा कमजोर नहीं होनी चाहिए. जिन श्रद्धालुओं ने मंदिर में दान दिया, उन्होंने श्रद्धा और विश्वास के साथ दिया था. इससे पहले अनुपम के निर्देशन में बनी पिछली फिल्म 'तनवी: द ग्रेट' थी, जो 2025 में आई थी.




