Begin typing your search...

कोठे पर ‘ग्राहक’ पकड़ा गया तो क्या सीधे जेल? पुलिस कर सकती है गिरफ्तार या नहीं, जानें कानून का पूरा सच

कोठे या वेश्यालय पर पुलिस रेड के दौरान पकड़े गए ग्राहक को क्या ITP Act के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है? इलाहाबाद हाई कोर्ट के अहम फैसले में पुलिस के अधिकार और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धाराओं को लेकर क्या कहा गया, जानें पूरा कानूनी मामला.

कोठे पर ‘ग्राहक’ पकड़ा गया तो क्या सीधे जेल? पुलिस कर सकती है गिरफ्तार या नहीं, जानें कानून का पूरा सच
X
संजीव चौहान
संजीव चौहान3 Mins Read

Published on: 21 Aug 2026 2:00 PM

अमूमन अक्सर यह खबरें मीडिया में देखने-सुनने में आती रहती हैं कि पुलिस ने वेश्यालय या कोठे पर छापा मारा. देह-व्यापार में लिप्त कई महिलाएं-लड़कियां मुक्त कराईं. मौके पर मिले ग्राहकों को पुलिस ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITP Act) के तहत गिरफ्तार करके जेल भेज दिया. अब लेकिन यह सब नहीं चलेगा. पुलिस किसी भी वेश्यालय से अगर किसी ग्राहक को गिरफ्तार करती है तो वह गैर-कानूनी होगा.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से क्या निकलकर सामने आया?

यह तमाम और चौकाने वाली बातें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद सामने निकल कर आई हैं. संभव है कि इलाहाबाद उच्च न्याय के इस फैसले के बाद समाज और देश के तमाम तबकों में अपने अपने हिसाब या नजरिए से अब नई-नई बहसों को जन्म मिल जाए. फिलहाल हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस फैसले ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत आए-दिन पुलिस द्वारा वेश्यालयों-कोठों से ग्राहकों की की जाने वाली ब-फरक्त गिरफ्तारी पर तो लगाम लगाई ही दी है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस अहम फैसले का आने वाले दिनों में देश के अन्य इलाकों में क्या फर्क पड़ेगा, या इस फैसले को तमाम तबकों में किस नजर से देखा जाएगा, यह भविष्य के गर्भ में है.

ह्यूमन ट्रैफिकिंग कके समान नहीं...

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए इस अहम फैसले में कहा गया है कि पुलिस, कोठे या वेश्यालय से किसी भी ग्राहक को अनैतिक व्यापार निवारण की धारा 3,4,5 और 7 के तहत मुकदमा दर्ज करके उसे अदालत में चलाने का ह़क नहीं रखती है. मतलब, कोठे से पुलिस इस अधिनियम के तहत किसी भी इंसान को आरोपी बनाकर गिरफ्तार ही नहीं कर सकती है. उच्च न्यायालय ने अपनी बात या कहिए फैसले को पुख्ता करने के लिए आगे लिखा है कि “निजी संतुष्टि के लिए किसी को पैसे देना इस कानून के तहत वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से किसी व्यक्ति की खरीद फरोख्त (ह्यूमन ट्रैफिकिंग/मानव तस्करी) के समान नहीं माना जा सकता है.”

एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान इस एतिहासिक फैसले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगे साफ करते हुए लिखा है, “ये धाराएं वेश्यालय चलाने या उसका प्रबंधन करने से संबंधित हैं. साथ ही इन धाराओं के तहत किसी स्थान को वेश्यालय के रुप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने, किसी अन्य व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से होने वाली आय पर गुजारा करने और किसी व्यक्ति को यौन-शोषण के लिए उपलब्ध कराने, उकसाने या जे लाने से जुड़ी हैं.”

इन तमाम अहम बातों के मद्देनजर यहां फिर दोहराना जरूरी है कि अगर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह फैसला आने वाले समय में मील का पत्थर साबित हुआ तो साफ है कि, भारत में किसी भी राज्य की पुलिस को, किसी कोठे पर देह-व्यापार करने वाली महिला के साथ किसी भी ग्राहक को पकड़ कर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार करना, उसके खिलाफ मुकदमा चलाना या फिर ऐसे मामले में कोठे से गिरफ्तार ग्राहक को जेल भेजना पुलिस के लिए दूर की कौड़ी हो जाएगा. और आज जिस तरह से ऐसी जगहों से अक्सर पुलिस ग्राहकों को पकड़ कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उन्हें जेल में ठूंस देती है, वह सब भी पुलिस के लिए दूर की ही कौड़ी बन जाएगा.

अगला लेख