Begin typing your search...

BJP से पॉलीटिक्स में एंट्री, 5 बार MLA और मोदी के खिलाफ 3 चुनाव…कौन हैं अजय राय जिन्हें कांग्रेस ने अध्यक्ष पद से हटाया?

कांग्रेस ने अजय राय को अध्यक्ष पद से हटा दिया है. उनकी जगह आराधना मिश्रा को जगह दी गई है. अजय पीएम मोदी के खिलाफ तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं. आइये जानते हैं उनके बारे में पूरी डिटेल.

BJP से पॉलीटिक्स में एंट्री, 5 बार MLA और मोदी के खिलाफ 3 चुनाव…कौन हैं अजय राय जिन्हें कांग्रेस ने अध्यक्ष पद से हटाया?
X

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी ने रामपुर खास से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. वहीं सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही अजय राय का प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल खत्म हो गया है.

कांग्रेस ने संगठन में कुछ और बदलाव भी किए हैं. देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधायक दल का नया नेता नियुक्त किया गया है. आराधना मिश्रा इससे पहले कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस राज्य में अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी कर रही है.

क्या बोले अजय राय?

प्रदेश अध्यक्ष का पद जाने के बाद अजय राय ने शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो भी फैसला करेगा, वह उसे स्वीकार करेंगे और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. ANI से बातचीत में अजय राय ने खुद को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का ‘हनुमान’ बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ने को कहा था और उन्होंने पूरी ताकत के साथ यह लड़ाई लड़ी. उन्होंने कहा कि आगे भी नेतृत्व जो जिम्मेदारी देगा, वह उसे निभाएंगे.

अजय राय ने 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी के समर्थन से उन्हें वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा गया था. उन्होंने खुद को पार्टी का एक ‘साधारण कार्यकर्ता’ बताया. उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक पद हमेशा नहीं रहते. उनके मुताबिक, वह पांच बार विधायक रहे और अपने क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहे.

कौन हैं अजय राय?

अजय राय का जन्म 7 अक्टूबर 1969 को वाराणसी में हुआ था. वह 2012 से कांग्रेस के साथ हैं और उत्तर प्रदेश के पांच बार विधायक रह चुके हैं. वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस के 12वें प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं. राजनीति में आने की शुरुआत उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन से की थी. इसके बाद 1996 में उन्होंने कोलसला विधानसभा सीट से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

कब हुए समाजवादी पार्टी में शामिल?

अजय राय ने 1996, 2002 और 2007 में लगातार तीन बार कोलसला सीट से विधानसभा चुनाव जीता. 2007 के बाद जब उन्हें वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए BJP का टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया और 2009 का लोकसभा चुनाव वाराणसी से लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके. बाद में उन्होंने कोलसला विधानसभा सीट के उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. परिसीमन के बाद कोलसला सीट खत्म हो गई. इसके बाद 2012 में उन्होंने नई बनी पिंडरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

अजय राय ने कब कांग्रस ज्वाइन की?

अजय राय ने 2012 में कांग्रेस का हाथ थामा. इसके बाद वह पिंडरा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने में सफल रहे.हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पिंडरा सीट से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद भी वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजनीतिक विरोध के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे.

पीएम मोदी के खिलाफ कितनी बार चुनाव लड़ा?

अजय राय को कांग्रेस ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में वाराणसी से अपना उम्मीदवार बनाया. तीनों ही चुनावों में उनका मुकाबला नरेंद्र मोदी से हुआ और वह जीत नहीं सके. 2019 के चुनाव में अजय राय वाराणसी सीट पर तीसरे स्थान पर रहे थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे. इस चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर 1,52,513 वोट रहा.

किन विवादों से जुड़ा रहा नाम?

अजय राय का राजनीतिक सफर कई विवादों से भी जुड़ा रहा है. उनके बारे में द इंडियन एक्सप्रेस समेत कुछ मीडिया रिपोर्टों में वाराणसी क्षेत्र में उनके प्रभावशाली स्थानीय नेता के तौर पर चर्चा की गई है. कुछ रिपोर्टों में उन्हें ‘बाहुबली’ और हिस्ट्रीशीटर भी बताया गया है.

1991 में वाराणसी के तत्कालीन डिप्टी मेयर अनिल सिंह पर हुए हमले के मामले में FIR में अजय राय का नाम भी शामिल था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 20 अगस्त 1991 को कैंटोनमेंट इलाके में उनकी जीप पर गोली चलाई गई थी. बाद में अजय राय इस मामले में आरोपों से बरी हो गए थे. 2015 में वाराणसी में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी के मामले में भी अजय राय को गिरफ्तार किया गया था. बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1991 के मामले में उन्हें बाद में आरोपों से मुक्त कर दिया गया था.

अजय राय के भाई की हत्या किसने कराई?

अजय राय के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनके बड़े भाई अवधेश राय की हत्या से भी जुड़ा है. 1994 में वाराणसी के लहराबीर इलाके में अवधेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में मुख्तार अंसारी और उनके साथियों पर आरोप लगे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद उनका संबंध बृजेश सिंह से भी रहा. इससे पहले 1989 से वह बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के संपर्क में बताए जाते रहे थे.

अगला लेख