8 भाई-बहन, बेटी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, पत्नी और बेटा आगे बढ़ा रहे सोशल वर्क, सतलुज वाले जसवंत सिंह खालड़ा का ऐसा है परिवार
जसवंत सिंह खालड़ा भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका परिवार आज भी उनके संघर्ष की विरासत को संभाले हुए है. आठ भाई-बहनों वाले इस परिवार में पत्नी, बेटा और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बेटी अपने-अपने तरीके से उनके सामाजिक मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं.
जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार में कौन-कौन
तीन साल बाद आखिरकार मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' ZEE 5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन महज तीसरे ही दिन इस फिल्म को प्लैटफॉर्म से हटा दिया गया. इतना ही नहीं, फिल्म का नाम भी कई बार बदला गया. पहली बार घल्लूघारा रखा गया था, फिर पंजाब 95 और आखिरकार सतलुज रखा गया. इतना ही नहीं, सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 100 जगह कट लगाने के लिए कहा था, लेकिन मेकर्स ने बिना कट लगाए फिल्म को रिलीज किया, क्योंकि उनका कहना था कि अगर फिल्म में इतने कट लगेंगे तो कहानी बचेगी ही नहीं.
इस फिल्म के जरिए एक ऐसी कहानी बताई गई है, जो सिस्टम से लेकर समाज पर कई बड़े सवाल खड़े करती है. जसवंत सिंह ने अपनी जिंदगी मानवाधिकारों की लड़ाई को समर्पित कर दी थी. उनकी मौत के बाद भी उनका परिवार उसी मिशन को आगे बढ़ा रहा है. आठ भाई-बहनों वाले इस परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बेटी आज भी अलग-अलग तरीकों से समाज की सेवा और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने में जुटे हैं. खालड़ा की बेटी पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, जबकि पत्नी और बेटा सालों से सामाजिक कार्यों और मानवाधिकार से जुड़े अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. यही वजह है कि जसवंत सिंह खालड़ा की विरासत सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनका परिवार आज भी उनके संघर्ष और विचारों को जिंदा रखे हुए है.
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा
instagram-@__harinderz__
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जसवंत सिंह खालड़ा का जन्म 1952 में पंजाब के अमृतसर जिले के खालड़ा गांव में हुआ था. उनका परिवार लंबे समय से सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़ा रहा. उनके दादा सरदार हरनाम सिंह खालड़ा गदर आंदोलन का हिस्सा थे और ऐतिहासिक कामागाटा मारू जहाज के यात्रियों में शामिल रहे. अंग्रेजी शासन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा. वहीं उनके पिता सरदार करतार सिंह खालड़ा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. उनकी माता मुख्तार कौर ने भी परिवार में सेवा, साहस और न्याय के मूल्यों को आगे बढ़ाया. यही वजह रही कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जसवंत सिंह खालड़ा के व्यक्तित्व का अहम हिस्सा बन गया.
कौन हैं जसवंत सिंह की पत्नी?
instagram-@khalsaschoolsofbc
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जसवंत सिंह खालड़ा की हत्या के बाद उनकी पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने कई सालों तक अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी और अपने पति के लिए इंसाफ की मांग करती रहीं. वह खालड़ा मिशन ऑर्गनाइजेशन (KMO) से जुड़कर मानवाधिकार से जुड़े मामलों में लगातार काम कर रही हैं. वह आज भी अमृतसर में रहकर सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं और जरूरतमंद व पीड़ित परिवारों की मदद करती हैं. इसके अलावा, जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर भी समय-समय पर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखती रहती हैं.
क्या करती है बेटी नवकिरण कौर खालड़ा?
जसवंत सिंह खालड़ा की बेटी नवकिरण कौर खालड़ा पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं. अपने पेशे के साथ-साथ वह मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार काम करती रही हैं. उन्होंने अपने पिता के संघर्ष और पंजाब में मानवाधिकारों से जुड़े विषयों को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है. नवकिरण कौर अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों में आयोजित कार्यक्रमों में अपने विचार रख चुकी हैं.
बेटा जनमीत सिंह खालड़ा क्या करते हैं?
जसवंत सिंह खालड़ा के बेटे जनमीत सिंह खालड़ा आमतौर पर मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहते हैं. वह कम ही लोगों के सामने दिखाई देते हैं और शांत तरीके से अपना काम करना पसंद करते हैं. हालांकि, परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक, जनमीत अपनी मां और बहन के साथ सामाजिक कार्यों और कानूनी प्रयासों में सहयोग करते हैं. मानवाधिकार से जुड़े अभियानों में भी उनका योगदान माना जाता है, लेकिन वह हमेशा सुर्खियों से दूर रहकर काम करना पसंद करते हैं.
परिवार के अन्य सदस्य कहां हैं?
जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार में कुल आठ भाई-बहन हैं, जिनमें तीन भाई और पांच बहनें शामिल हैं. उनके भाई राजिंदर सिंह संधू और अमरजीत सिंह संधू यूनाइटेड किंगडम में रहते हैं, जबकि गुरदेव सिंह संधू ऑस्ट्रिया में बसे हुए हैं. उनकी बहनों के नाम प्रीतम कौर, मोहिंदर कौर, हरजंदर कौर, बलबीर कौर और बेअंत कौर हैं. परिवार के कुछ सदस्य पंजाब में रहते हैं, जबकि कई लोग विदेशों में बस चुके हैं. इसके बावजूद सभी समय-समय पर जसवंत सिंह खालड़ा की याद में होने वाले कार्यक्रमों और मानवाधिकार से जुड़े अभियानों में हिस्सा लेते हैं और उनके संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहते हैं.
मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग ने क्या कहा?
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद ZEE5 से हटा दी गई है. मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग के अनुसार, फिल्म जरूरी सर्टिफिकेशन के बिना OTT पर रिलीज की गई थी. मंत्रालय का कहना है कि फिल्म में करीब 100 कट लगाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन ऐसा करने के बजाय इसका नाम बदलकर रिलीज कर दिया गया. वहीं, ZEE5 ने कहा है कि अगली सूचना तक यह फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी. इस फैसले पर कई नेताओं और कलाकारों ने रिएक्शन भी दिया है. वहीं, दिलजीत दोसांझ ने भी कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म पर रोक लग सकती है, लेकिन उन्हें खुशी है कि रिलीज के बाद काफी लोग इसे देख चुके हैं.




