Begin typing your search...

1925 की चिट्ठी से 1985 के राजपत्र तक, जानें उज्जैन की 636 साल पुरानी शाही मस्जिद का इतिहास, पहले कब गई थी जमीन?

उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर बवाल बढ़ता जा रहा है, जहां पुलिस और मस्जिद पक्ष के लोगों के बीच झड़प देखने को मिली है. मस्जिद पक्ष के मुताबिक ये मस्जिद 636 साल पुरानी है और पहले भी मस्जिद की जमीन सरकार के पास गई है.

Ujjain Shahi Masjid
X

Ujjain Shahi Masjid

( Image Source:  X/ @Muslim_ITCell )

उज्जैन की शाही मस्जिद से जुड़े विवाद में सोमवार को तनाव और बढ़ गया. सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की योजना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटे. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई और पथराव की घटना सामने आई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि इलाके में RAF और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई.

मामला सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़ा है. उज्जैन नगर निगम की योजना के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर मार्ग को 15 मीटर तक चौड़ा किया जाना है. प्रशासन के मुताबिक मस्जिद का कुछ हिस्सा प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहा है. मस्जिद से जुड़े पक्ष इस कार्रवाई का विरोध कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ 9 सितंबर को इस संबंध में दायर दो याचिकाएं खारिज कर चुकी है.

कितनी पुरानी है शाही मस्जिद?

मस्जिद की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं. मस्जिद कमेटी और इमाम की ओर से इसे 1390 में बना करीब 636 साल पुराना ढांचा बताया जाता है. दूसरी ओर, अदालत और प्रशासनिक रिकॉर्ड में इसे 100 साल से अधिक पुराना ढांचा बताया गया है. इसलिए मस्जिद की वास्तविक ऐतिहासिक उम्र को लेकर दावों में अंतर है.

मस्जिद पक्ष ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया है कि साल 1925 में तत्कालीन ग्वालियर सरकार के टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से मस्जिद के शेष हिस्से को सुरक्षित रखने का उल्लेख किया गया था. इसके अलावा साल 1985 के मध्य प्रदेश राजपत्र में भी मस्जिद और उसके माप का उल्लेख होने की बात कही गई है.

क्या मस्जिद ने पहले भी जमीन दी?

मस्जिद नुमाइंदा कमेटी के दस्तावेजों के अनुसार, साल 1961 में सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद कमेटी ने करीब 20 फीट जमीन प्रशासन को दी थी. मस्जिद पक्ष का कहना है कि अतीत में विकास कार्यों के दौरान सहयोग किया गया है. मस्जिद से जुड़े लोगों का यह भी दावा है कि इमारत का ढांचा पुराना और संवेदनशील है. उनके मुताबिक किसी एक हिस्से में बदलाव से पूरी संरचना की मजबूती प्रभावित हो सकती है.

किसने बनवाई थी शाही मस्जिद?

रिपोर्ट के मुताबिक जिस समय मस्जिद के निर्माण का दावा किया जाता है, उस दौरान मालवा क्षेत्र में राजनीतिक बदलाव का दौर चल रहा था. दिलावर खान गौरी का प्रभाव इस क्षेत्र में बढ़ रहा था. बाद में साल 1401 में उन्होंने स्वतंत्र मालवा सल्तनत की स्थापना की. इस वजह से 1390 के आसपास मस्जिद के निर्माण के दावे को मालवा में गौरी प्रभाव के शुरुआती दौर से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आता जिससे यह कहा जा सके कि मस्जिद का निर्माण सीधे दिलावर खान गौरी ने कराया था.

अगला लेख