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हिस्ट्रीशीटर तस्कर से लेकर करणी सेना का नेता तक मुख्य आरोपी, सागर में ऐसे फैला नकली शराब का जाल, 15 मौतों के बाद क्या-क्या सामने आया?

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से 15 मौतों के बाद पुलिस की जांच में नकली शराब के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जानिए खेतों में शराब बनाने से लेकर UP के हिस्ट्रीशीटर और करणी सेना नेता तक कैसे पहुंची जांच.

हिस्ट्रीशीटर तस्कर से लेकर करणी सेना का नेता तक मुख्य आरोपी, सागर में ऐसे फैला नकली शराब का जाल, 15 मौतों के बाद क्या-क्या सामने आया?
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समी सिद्दीकी
Edited By:समी सिद्दीकी6 Mins Read

Updated on: 12 Sept 2026 9:30 AM IST

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले की जांच अब गांवों में शराब बेचने वाले लोगों से आगे बढ़कर उन लोगों तक पहुंच गई है, जिन पर कथित तौर पर नकली शराब बनाने और उसकी सप्लाई करने का शक है. पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक करणी सेना नेता, लाइसेंसी शराब ठेकेदार और उत्तर प्रदेश के एक हिस्ट्रीशीटर का नाम सामने आया है.

पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मामले में अब तक 30 आरोपियों की पहचान की गई है, जिनमें से 17 को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस के मुताबिक, कथित तौर पर यह पूरा नेटवर्क स्पिरिट और शराब बनाने के लिए जरूरी दूसरी सामग्री जुटाने, खेतों में नकली शराब तैयार करने, उसे एक जाने-पहचाने ब्रांड के नाम से बोतलों में भरने और फिर गांवों में बेचने वाले लोगों के जरिए पहुंचाने का काम कर रहा था. पुलिस का यह भी कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े एक कथित सप्लायर ने खुद भी वही शराब पी थी और उसकी मौत हो गई.

करणी सेना का नेता मुख्य आरोपी

पुलिस ने टाटरवारा निवासी चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया है. पुलिस के मुताबिक, चंद्रभान करणी सेना का संभागीय अध्यक्ष भी है. सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के मुताबिक, चंद्रभान ने कथित तौर पर बरेठी में शराब की दुकान चलाने वाले लाइसेंसी शराब ठेकेदार मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर और अपने रिश्तेदार शिवंजय राजपूत के साथ मिलकर नकली शराब तैयार की.

एसपी के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि चंद्रभान सिंह, उसका सहयोगी मनीष लोधी और उसका दूर का रिश्तेदार शिवंजय एक साथ मिलकर शराब तैयार कर रहे थे. इसके लिए स्पिरिट एक मक्के के खेत में लाई गई थी.

कैसे तैयारी की जा रही थी शराब?

पुलिस का आरोप है कि कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार से पहले टाटरवारा के कृषि क्षेत्रों में नकली शराब तैयार की गई थी. जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर शराब बनाने और उसकी पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली खाली बोतलें, लेबल और अन्य सामग्री बरामद की है. पुलिस के मुताबिक, ‘सागर गोल्ड’ लेबल वाली शराब की करीब 50 पेटियां तैयार की गई थीं. इसके बाद इसे पास के एक गांव में भेज दिया गया.

कैसे पुलिस के हत्थे चढ़ा हिस्ट्रीशीटर?

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस की नजर 45 वर्षीय रवि लखेड़ा पर गई. पुलिस ने उसे हिस्ट्रीशीटर और शराब तस्कर बताया है. वह इस मामले में वांछित था और शुक्रवार को पुलिस के साथ हुई कथित मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, बरायठा पुलिस को सूचना मिली थी कि रवि लखेड़ा बांदा-बरायठा रोड के पास हनुमान टोंग मंदिर के नजदीक छिपा हुआ है. इसके बाद पुलिस की टीमों ने जंगल वाले इलाके को घेर लिया.

पुलिस का दावा है कि टीम ने जब लखेड़ा को घेरा तो उसने पुलिस पर कम से कम तीन बार गोली चलाई. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस ने क्या-क्या चीजें की बरामद?

पुलिस के अनुसार, उसके पास से देसी 12 बोर की पिस्तौल, कारतूस, इस्तेमाल किए गए कारतूस के खोखे और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई. उसके दो कथित साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए.

स्पिरिट कहां से आई? जांच में जुटी पुलिस

पुलिस का कहना है कि शराब बनाने के लिए जरूरी सामग्री जुटाने वाला मनीष लोधी कथित तौर पर रवि लखेड़ा के साथ मिलकर स्पिरिट लाता था और नकली शराब तैयार करता था. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के दौरान स्पिरिट के स्रोत के बारे में जानकारी मिली. पुलिस का कहना है कि मनीष लोधी ने जरूरी सामग्री जुटाई और रवि लखेड़ा के साथ मिलकर स्पिरिट की व्यवस्था करने और अवैध शराब बनाने का काम किया.

रवि लखेड़ा मूल रूप से महोबा का रहने वाला है और वर्तमान में ललितपुर में रहता था. पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ करीब 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं. इससे पहले भी उसे ललितपुर में अवैध शराब से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि लखेड़ा को शराब बनाने और इसके लिए जरूरी सामान जुटाने की जानकारी थी.

ललितपुर कनेक्शन की भी जांच..

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ललितपुर में अवैध शराब के कथित मामले में लखेड़ा की पिछली भूमिका का सागर शराब कांड से कोई संबंध है या नहीं. हालांकि, यह पहलू अभी जांच के दायरे में है. उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने पहले उन दावों पर अलग रुख अपनाया था, जिनमें कहा गया था कि सागर में पहुंची शराब ललितपुर से आई थी. उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस से इस कनेक्शन के सबूत भी मांगे हैं.

मौतों के बाद शराब नष्ट करने की कोशिश?

पुलिस का कहना है कि पहली मौतों की खबर सामने आने के बाद भी कथित नेटवर्क के लोग सक्रिय रहे. अधिकारी के मुताबिक, मौतें शुरू होने के बाद इस गिरोह से जुड़े लोगों ने बची हुई नकली शराब को नष्ट करना शुरू कर दिया था. हालांकि, पुलिस के मुताबिक, समय पर की गई छापेमारी के कारण बड़ी मात्रा में कथित नकली शराब जब्त कर ली गई.

सागर में कितनी मौतें?

मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित जहरीली शराब पीने से अब तक 25 लोगों की मौत होने की जानकारी पुलिस ने दी है. कई अन्य लोग बीमार हुए हैं. प्रभावित गांवों में नौराज, पाटन, घोघरा खुर्द और बमुरा शामिल हैं. मौतों का सिलसिला 5 सितंबर से सामने आया था. इसके बाद बांदा और विनायका पुलिस थानों में मामले दर्ज किए गए और बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई.

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 30 आरोपियों की पहचान हो चुकी है और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. तीन FIR भी दर्ज की गई हैं, जिन्हें पीड़ित परिवारों की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया.

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