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AI से शराब बनाने का तरीका खोजा, फिर खड़ा किया अवैध धंधा, देवास में नकली शराब के खेल का कैसे हुआ पर्दाफाश?

मध्य प्रदेश के देवास में नकली शराब के अवैध धंधे का कारोबार का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें मुख्य आरोपी एआई की मदद से शराब बनाता था और फिर पुरानी बोतलों में भरकर बेचता था.

AI से शराब बनाने का तरीका खोजा, फिर खड़ा किया अवैध धंधा, देवास में नकली शराब के खेल का कैसे हुआ पर्दाफाश?
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( Image Source:  META AI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत5 Mins Read

Updated on: 29 Oct 2026 10:05 AM IST

मध्य प्रदेश के देवास में नकली शराब के कथित कारोबार का ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें आरोपी ने शराब बनाने का तरीका जानने के लिए AI की मदद ली. पुलिस के मुताबिक, इंदौर के रहने वाले 26 साल के अजय राठौर ने इंटरनेट पर घर में शराब तैयार करने से जुड़ी जानकारी जुटाई. इसके बाद उसने केमिकल सप्लायर से कॉन्टैक्ट किया और केमिकल मंगवाकर नकली शराब बनानी शुरू कर दी.

आरोप है कि इस शराब को पुरानी बोतलों में भरकर असली शराब के साथ मिलाया गया और ग्रामीण इलाकों में बेचा गया. पुलिस ने इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि अजय का कथित साथी गोविंद अभी फरार बताया जा रहा है.

एआई से सीखी शराब बनानी

पुलिस की जांच में सामने आया कि अजय राठौर ने कथित तौर पर अवैध शराब का कारोबार शुरू करने से पहले इंटरनेट पर काफी खोजबीन की थी. सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच उसने कई बार AI की मदद से यह जानने की कोशिश की कि घर पर शराब कैसे बनाई जा सकती है. इसके बाद वह आगे की जानकारी जुटाने में लग गया.

कैसे ढूंढे केमिकल बायर्स?

अजय ने इंटरनेट के जरिए केमिकल बेचने वालों के नंबर तलाशे और इंदौर की 'राइजिंग ब्रदर्स' नाम की थोक फर्म तक पहुंच गया, जो सॉल्वेंट बेचने का काम करती है. पुलिस के मुताबिक, अजय ने इस फर्म से एक केमिकल खरीदा था. आरोप है कि इसी केमिकल का इस्तेमाल उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने में किया. केमिकल की खेप 1 अक्टूबर को मिलने के बाद इस अवैध कारोबार की शुरुआत होने की बात सामने आई है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब बनाने की इस पूरी प्रक्रिया में और कौन-कौन शामिल था और इसमें इस्तेमाल किए गए पदार्थों की असलियत क्या है.

पुरानी बोतलों से तैयार किया नकली स्टॉक

पुलिस की जांच के मुताबिक, कथित तौर पर तैयार की गई नकली शराब को नई बोतलों के बजाय पहले इस्तेमाल हो चुकी शराब की बोतलों में पैक किया जाता था. इसके बाद इस स्टॉक को असली शराब के साथ मिलाकर गांवों में बेचे जाने का आरोप है.

कौन-सा गोदाम किया सील?

मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस ने उस गोदाम पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया है, जहां से शराब बनाने में इस्तेमाल किया गया केमिकल खरीदे जाने का आरोप है. यहां से जांच के लिए सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं. साथ ही, संदिग्ध शराब को भी फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) में जांच के लिए भेजा जाएगा. रिपोर्ट से पता चल सकेगा कि शराब में कौन से पदार्थ मौजूद थे और क्या उनमें कोई जहरीला तत्व मिला हुआ था.

11 लोग गिरफ्तार, किस पर क्या आरोप?

इस मामले में पुलिस अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. जांच के दौरान कथित तौर पर शराब बनाने, केमिकल पहुंचाने और बोतलों की व्यवस्था करने से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं.

  • अजय राठौर: इंदौर निवासी अजय को इस कथित नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताया गया है. उस पर शराब तैयार करने की योजना बनाने और उसे बनाने का आरोप है. उसे 26 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था.
  • अमन कसलीवाल: इंदौर के रहने वाले अमन पर अजय तक केमिकल पहुंचाने का आरोप है. पुलिस ने उसे बुधवार को गिरफ्तार किया.
  • विशाल चौहान और रामेश्वर सिंह सोंगरा: दोनों को भी इस मामले में पकड़ा गया है. पुलिस उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है.
  • सत्येंद्र ओझा: आरोप है कि उसने शराब की पुरानी बोतलों पर लगाने के लिए ढक्कन उपलब्ध कराए.
  • गोविंद: पुलिस के मुताबिक, गोविंद इस काम में अजय का कथित साझेदार था. वह अभी फरार है.
  • पुलिस बाकी गिरफ्तार लोगों की भूमिका और शराब की सप्लाई में मदद करने वालों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है.

क्या 13 मौतों से है कनेक्शन?

मध्य प्रदेश के चंदाना गांव में लगातार मौतों की खबरें आने के बाद शुरुआत में जिला प्रशासन ने इन घटनाओं को नकली शराब से जोड़ने वाली खबरों को खारिज कर दिया था. हालांकि, आगे की पड़ताल में पुलिस को अवैध शराब की खरीद-बिक्री से जुड़े एक कथित गिरोह के बारे में जानकारी मिली. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गांवों में जान गंवाने वाले लोगों और इस नेटवर्क के बीच कोई संबंध था या नहीं. फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि शराब में कौन से तत्व मौजूद थे और क्या उनका देवास के चंदाना व बिंजाना गांवों में हुई 13 संदिग्ध मौतों से कोई जुड़ाव है. तब तक इन मौतों के पीछे की असली वजह सामने आना बाकी है.

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