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168 एकड़ और 45 करोड़ कीमत, मोहन यादव के CM बनते ही परिवारवालों ने खरीदी इतनी जमीन, जहां-जहां सरकारी प्रोजेक्ट, वहां-वहां प्लॉट

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार की कथित जमीन खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के इलाकों में 137 प्लॉट खरीदे.

168 एकड़ और 45 करोड़ कीमत, मोहन यादव के CM बनते ही परिवारवालों ने खरीदी इतनी जमीन, जहां-जहां सरकारी प्रोजेक्ट, वहां-वहां प्लॉट
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( Image Source:  @DrMohanYadav51 )

उज्जैन में तेजी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और जमीनों की बढ़ती कीमतों के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार की बड़े पैमाने पर कथित जमीन खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए सवाल उठाए हैं कि विकास का सबसे बड़ा फायदा आखिर किसे मिला.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में सामने आए भूमि रिकॉर्ड्स के आधार पर दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में जमीनें खरीदीं. आइए पॉइंट्स में समझते हैं पूरा मामला.

Pointers में समझते हैं मोहन यादव से जुड़ा पूरा विवाद

  • रिपोर्ट के अनुसार, 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से दिसंबर 2025 तक मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे.
  • इन प्लॉट्स का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया गया है और इनकी खरीद पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
  • रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से अधिकांश जमीनें उन इलाकों में हैं जहां नए सड़क प्रोजेक्ट, हाईवे या भूमि उपयोग (Land Use) परिवर्तन की योजनाएं लागू हो रही हैं.
  • भूमि रिकॉर्ड्स के अनुसार, ये खरीदारी मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव यादव की पत्नी शालिनी यादव, भाइयों नंदलाल यादव और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा यादव, उनके बेटे अभय यादव तथा चचेरे भाइयों गोविंद यादव और निलेश यादव के नाम पर या परिवार से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से की गई.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवार चार रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए भी जमीनों का कारोबार करता है.
  • इनमें से कम से कम छह प्लॉट बाद में बेच भी दिए गए, जबकि कुछ जमीनों का परिवार के भीतर ही हस्तांतरण हुआ.
  • उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कई कृषि क्षेत्रों को भविष्य में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए चिन्हित किया गया है. दावा है कि परिवार की कई खरीदारी इन्हीं क्षेत्रों में हुई.
  • मास्टर प्लान मई 2023 में जारी हुआ था, यानी मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मोहन यादव सालों से उज्जैन के विकास और पर्यटन परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं.
  • मोहन यादव 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) के अध्यक्ष रहे थे. वर्ष 2011 से 2013 तक वे मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPTDC) के प्रमुख भी रहे. साल 2013 से वे उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.
  • रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2024 के बाद राज्य सरकार ने उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में कई नई सड़क और हाईवे परियोजनाओं की घोषणा की, जिससे इन इलाकों की जमीनों का मूल्य बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
  • दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले भी यादव परिवार के पास उज्जैन और आसपास कम से कम 108 प्लॉट और करीब 179 एकड़ जमीन थी.
  • इनमें से लगभग 85 एकड़ जमीन 2021 से 2023 के बीच खरीदी गई थी, जब मोहन यादव राज्य के शिक्षा मंत्री थे.
  • रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में, जब सरकार उज्जैन में स्थायी कुंभ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भूमि पूलिंग योजना पर स्थानीय विरोध का सामना कर रही थी, उसी दौरान परिवार और उनकी कंपनियों ने कम से कम 62 नए प्लॉट खरीदे, जिनका क्षेत्रफल लगभग 92 एकड़ बताया गया.
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने 2023 के प्रॉपर्टी डिटेल में लगभग 17 एकड़ जमीन अपने नाम दिखाई थी. इनमें 4 एकड़ पैतृक और 13 एकड़ वर्ष 1998 में खरीदी गई जमीन बताई गई थी.
  • उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम भी लगभग 10.6 एकड़ जमीन घोषित की गई थी, जिसे 2008 से 2010 के बीच खरीदा गया बताया गया था.
  • परिवार की कंपनी सिद्धि विनायक डेवकॉन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए भी जमीनें रखी गई हैं. इस कंपनी में मोहन यादव और सीमा यादव की संयुक्त हिस्सेदारी 73 प्रतिशत बताई गई है.
  • रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पास मौजूद करीब 39.5 एकड़ जमीन में से 12 एकड़ जमीन सितंबर 2024 में चचेरे भाई निलेश यादव को बेची गई थी.
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
  • हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार के व्यवसाय या जमीन के लेन-देन को सीधे मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय से जोड़ना उचित नहीं है.
  • इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि उज्जैन के विकास का सबसे बड़ा लाभ आखिर किसे मिला.
  • कांग्रेस ने टिप्पणी करते हुए कहा, "विकास किसका? उज्जैन में विकास के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार ने बेशकीमती जमीनें खरीदीं. सरकार में खुद की तरक्की का यह प्रयोग जोरदार अभिनंदन के लायक है."
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