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किस जुर्म में महरंग को उम्रकैद? पाकिस्तान में मचा बवाल, ट्रंप तक पहुंचा ये मैसेज- 9 Points में जानिए बलोच VS मुनीर का पूरा खेल

बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की आवाज मानी जाने वाली महरंग बलोच को आतंकवाद और हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा मिली है. फैसले के बाद पाकिस्तान से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक बहस छिड़ गई है.

किस जुर्म में महरंग को उम्रकैद? पाकिस्तान में मचा बवाल, ट्रंप तक पहुंचा ये मैसेज- 9 Points में जानिए बलोच VS मुनीर का पूरा खेल
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी7 Mins Read

Updated on: 24 Jun 2026 5:24 PM IST

पाकिस्तान की सबसे चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में शामिल महरंग बलोच को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छिड़ गई है. बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने वाली महरंग को पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने दोषी करार दिया है.

वहीं मानवाधिकार संगठन, विदेशी कार्यकर्ता और बलूच संगठनों का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक और मानवाधिकार गतिविधियों को दबाने की कोशिश हो सकता है. आखिर महरंग बलोच कौन हैं, उन पर क्या आरोप लगे, अदालत ने क्या कहा और क्यों यह मामला अमेरिका से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक चर्चा में है? आइए पूरे मामले को डिटेल में समझते हैं.

कौन हैं महरंग बलोच?

डॉ. महरंग बलोच पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की सबसे चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में गिनी जाती हैं. पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद उन्होंने अपना अधिकांश जीवन बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगियों, मानवाधिकार उल्लंघनों और स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बिताया है. महरंग बलोच की उम्र लगभग 33 वर्ष है. उनका जन्म 1 जनवरी 1993 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुआ था. वह बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) का प्रमुख चेहरा हैं और बलोच समुदाय के बीच उनकी मजबूत पहचान है.

महरंग का सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष बेहद व्यक्तिगत दर्द से शुरू हुआ था. वर्ष 2009 में उनके पिता का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था, जिसके बाद उनका शव बरामद हुआ. उस समय महरंग महज 16 वर्ष की थीं. इस घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और उन्होंने बलोचिस्तान में कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी.

इसके कुछ वर्षों बाद, 2016 में उनके भाई नासिर बलोच भी कथित तौर पर लापता हो गए. भाई की वापसी की मांग को लेकर महरंग ने विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलन शुरू किया. लंबे अभियान के बाद उनके भाई को रिहा कर दिया गया. इस घटना ने उन्हें बलोचिस्तान के अधिकारों और गुमशुदा लोगों के मुद्दे पर एक प्रमुख आवाज के रूप में स्थापित कर दिया. आज महरंग बलोच को केवल बलोचिस्तान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों की पैरवी करने वाली प्रमुख हस्ती के रूप में जाना जाता है. हालांकि, उनके आंदोलनों और बयानों को लेकर पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के साथ उनका टकराव लगातार चर्चा का विषय बना रहता है.

1. किस मामले में सुनाई गई उम्रकैद?

मामला जुलाई 2024 का है, जब ग्वादर में बलोच यकजेहती कमेटी की ओर से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था. इसी दौरान हिंसा भड़कने और एक फ्रंटियर कॉर्प्स अधिकारी की मौत होने का मामला सामने आया. जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाने और हिंसा भड़काने में महरंग बलोच तथा उनके कुछ सहयोगियों की भूमिका थी.

2.अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

क्वेटा की आतंकवाद निरोधी अदालत ने महरंग बलोच और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह को हत्या और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी माना. अदालत के अनुसार गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ मामला साबित हुआ. इसके बाद अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई.

3. मार्च 2025 में क्यों हुई थी गिरफ्तारी?

महरंग बलोच को मार्च 2025 में क्वेटा में आयोजित एक धरने के दौरान गिरफ्तार किया गया था. यह प्रदर्शन कथित जबरन गायब किए गए लोगों और न्यायेतर हत्याओं के खिलाफ आयोजित किया गया था. गिरफ्तारी के बाद से वह लगातार हिरासत में थीं और उनके समर्थक उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे.

4. पाकिस्तान सरकार का क्या कहना है?

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने अदालत के फैसले का समर्थन किया है. उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान मारे गए सुरक्षाकर्मी को न्याय मिला है. सरकार का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर हिंसा फैलाने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है.

5. मानवाधिकार संगठनों ने क्यों उठाए सवाल?

कई मानवाधिकार संगठनों और बलोच समूहों ने अदालत के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि मुकदमे की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं थी. आलोचकों का कहना है कि आरोपियों को पर्याप्त कानूनी अवसर नहीं दिए गए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

6. ग्रेटा थनबर्ग ने क्यों की महरंग की रिहाई की मांग?

स्वीडन की चर्चित जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने एक वीडियो संदेश जारी कर महरंग बलोच की रिहाई की मांग की. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण असहमति और मानवाधिकारों की आवाज को अपराध की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए. ग्रेटा ने मुकदमे की पारदर्शिता और हिरासत की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए.

7. ट्रंप तक कैसे पहुंचा मामला?

मामला तब और बड़ा हो गया जब बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर इस फैसले पर चिंता जताई. पत्र में दावा किया गया कि महरंग बलोच का काम मानवाधिकार और लापता लोगों के मुद्दे को उठाना रहा है तथा उनके खिलाफ कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े करती है.

8. अब आगे क्या होगा?

महरंग बलोच के वकील इसरार जट्टक ने साफ किया है कि वे इस फैसले को बलूचिस्तान हाईकोर्ट में चुनौती देंगे. आने वाले दिनों में यह मामला पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था, मानवाधिकारों और बलूचिस्तान की राजनीति पर बड़ी बहस का कारण बन सकता है.

9. क्यों चर्चा में है यह मामला?

यह मामला केवल एक अदालत के फैसले तक सीमित नहीं है. एक तरफ पाकिस्तान सरकार इसे कानून और सुरक्षा का मामला बता रही है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठन इसे नागरिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं. यही वजह है कि महरंग बलोच का मामला अब पाकिस्तान की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है.

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