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किसी की शादी पर संकट तो किसी के कंधों पर कर्ज का बोझ! JSSC-CGL बहाली रद्द होते ही कैसे टूटने लगे युवाओं के सपने?

JSSC-CGL बहाली रद्द होने के बाद चयनित युवाओं के सामने नौकरी के साथ शादी और कर्ज का संकट खड़ा हो गया है. जानिए कैसे सरकारी नौकरी की उम्मीद टूटने से उनके भविष्य और परिवार की योजनाएं प्रभावित हुईं.

किसी की शादी पर संकट तो किसी के कंधों पर कर्ज का बोझ! JSSC-CGL बहाली रद्द होते ही कैसे टूटने लगे युवाओं के सपने?
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किसी घर में शादी की तारीख तय हो जाए तो तैयारियां सिर्फ एक दिन में शुरू नहीं होतीं. कपड़े, रिश्तेदार, निमंत्रण, खरीदारी और दूसरी छोटी-बड़ी चीजों के बीच परिवार आने वाले नए जीवन की कल्पना करने लगता है. लेकिन अगर इसी बीच उस नौकरी पर ही सवाल खड़ा हो जाए, जिसके भरोसे यह शादी तय हुई थी, तो क्या होगा?

झारखंड के कई लोगों के साथ ऐसा ही हुआ है. JSSC-CGL में चयन के बाद जिनके घर में खुशियां आई थीं, वहां अब चिंता ने जगह ले ली है. मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सरकारी नौकरी सिर्फ नौकरी नहीं होती. यह कई साल की मेहनत का नतीजा होने के साथ-साथ परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी होती है. यही वजह है कि JSSC-CGL में चयन के बाद कई अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने अपने भविष्य की योजनाएं बनानी शुरू कर दी थीं.

कई युवाओं के रिश्ते पहले से तय थे, लेकिन नौकरी मिलने के बाद परिवारों को लगा कि अब शादी के लिए सही समय आ गया है. कुछ जगहों पर शादी की तैयारियां भी शुरू हो गईं. फिर JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने की खबर आई और देखते ही देखते नौकरी को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई.

पलामू के सुहर्ष मोहन की कहानी...

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पलामू जिला पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले सुहर्ष मोहन की कहानी इसी बदलाव को दिखाती है. यह उनका बदला हुआ नाम है. JSSC-CGL में उनका चयन ASO यानी असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर हुआ था. चयन के बाद घर का माहौल बदल गया. नौकरी लगने के बाद उनके लिए रिश्ते आने लगे. परिवार ने सरकारी नौकरी को भविष्य की सुरक्षा माना और एक जगह उनकी शादी भी तय कर दी. इसके बाद दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुट गए.

लेकिन अब वही परिवार शादी की तारीख तय करने को लेकर असमंजस में है. परीक्षा रद्द होने के बाद नौकरी की स्थिति साफ नहीं है और इस अनिश्चितता का असर शादी पर भी पड़ रहा है. सुहर्ष जैसे कई चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी परेशानी साझा की है. हालांकि सामाजिक दबाव और परिवार की प्रतिष्ठा को देखते हुए उन्होंने कैमरे पर सामने आने से इनकार किया.

अंकित शर्मा की कहानी...

पलामू के उंटारी रोड थाना क्षेत्र के अंकित शर्मा की कहानी भी कम अलग नहीं है. यह भी उनका बदला हुआ नाम है. जनवरी में JSSC-CGL का रिजल्ट आने से पहले अंकित झारखंड में पंचायत सचिव के पद पर काम कर रहे थे. जब फाइनल लिस्ट में उनका नाम आया और ASO पद पर चयन हुआ तो उन्होंने पंचायत सचिव की नौकरी छोड़ दी. उन्होंने नए पद पर योगदान दिया और माना कि अब उनका करियर तय हो चुका है.

इसके बाद परिवार ने रिश्तेदारी में ही एक लड़की से उनका रिश्ता तय कर दिया. रक्षाबंधन के दिन इंगेजमेंट और नवंबर में शादी की बात चल रही थी. परिवार शादी की तैयारियों को लेकर आगे बढ़ रहा था.

फिर बहाली रद्द होने की खबर आई.

अब नौकरी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता है और इसी वजह से शादी की तैयारियों पर भी विराम लगता नजर आ रहा है. परिवार को डर है कि अगर नौकरी का भविष्य ही तय नहीं रहा तो कहीं शादी का रिश्ता भी हाथ से न निकल जाए.

‘फिर से उसी जगह लौटना आसान नहीं’

इन युवाओं की परेशानी सिर्फ यह नहीं है कि नौकरी का क्या होगा. असली चिंता यह है कि अगर उन्हें फिर से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनी पड़ी तो क्या वे पहले जैसी मेहनत कर पाएंगे?

सुहर्ष और अंकित ने क्या कहा?

सुहर्ष और अंकित का कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए सालों तक परिवार आर्थिक और मानसिक तौर पर साथ देता है. सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं और उम्मीद करते हैं कि नौकरी मिलने के बाद परिवार की स्थिति बेहतर होगी. अब परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें फिर से उसी तैयारी के दौर में लौटने की चिंता है. उनका कहना है कि वे मानसिक रूप से इतना टूट चुके हैं कि दोबारा तैयारी शुरू करना आसान नहीं है.

परिवार की आर्थिक स्थिति भी लंबे समय तक पढ़ाई का खर्च उठाने की नहीं है. घर में छोटे भाई-बहन हैं और माता-पिता को उनकी जिम्मेदारी भी संभालनी है. यानी जिस नौकरी के बाद परिवार को लगा था कि अब मुश्किल दौर खत्म हो गया, उसी नौकरी की अनिश्चितता ने उन्हें फिर उसी मोड़ पर ला खड़ा किया है.

इनकी कहानी सिर्फ दो युवाओं तक सीमित नहीं...

सुहर्ष और अंकित की कहानी सिर्फ दो चयनित अभ्यर्थियों की कहानी नहीं है. JSSC-CGL में चयन के बाद कई युवक-युवतियों ने अपने भविष्य को लेकर योजनाएं बनाई थीं. किसी ने शादी तय की, किसी ने घर बनाने के लिए कर्ज लिया और किसी ने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने की तैयारी शुरू की. किसी के लिए सरकारी नौकरी का मतलब माता-पिता को आर्थिक सहारा देना था, तो किसी के लिए यह अपने परिवार की जिंदगी बदलने का मौका था.

एक नियुक्ति पत्र कई परिवारों के लिए सिर्फ कागज का एक टुकड़ा नहीं होता. उसके साथ परिवार की आर्थिक स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की उम्मीदें जुड़ी होती हैं.

यही कारण है कि JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने का असर चयनित अभ्यर्थियों के लिए सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है. नौकरी के भरोसे जिन रिश्तों की शुरुआत हुई थी, वे भी अब अनिश्चितता के बीच हैं. कल तक जिन घरों में नौकरी मिलने की खुशी थी, वहां अब यही सवाल है कि आगे क्या होगा?

क्या ये युवा दोबारा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पाएंगे? क्या परिवार फिर से उतना ही समय और पैसा लगा पाएगा? और जिन युवाओं की शादी सरकारी नौकरी की स्थिरता को ध्यान में रखकर तय हुई थी, क्या उनके रिश्ते इस अनिश्चितता के बीच टिक पाएंगे?

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