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37 शेल कंपनियां, 5,000 करोड़ के फर्जी चालान और 734 करोड़ का ITC...झारखंड में स्क्रैप कारोबारी के ठिकानों पर ED का छापा, क्या-क्या मिला?

झारखंड में ईडी ने स्क्रैप कारोबारी के यहां छापा मारा. इस दौरान कई अहम जानकारी सामने आई है. आरोपी ने 37 शेल कंपनियां बनाई हुई थी. जानें डिटेल

37 शेल कंपनियां, 5,000 करोड़ के फर्जी चालान और 734 करोड़ का ITC...झारखंड में स्क्रैप कारोबारी के ठिकानों पर ED का छापा, क्या-क्या मिला?
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734 करोड़ रुपये के कथित फर्जी GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है. रांची ED की टीम ने बुधवार को जमशेदपुर, कोलकाता और देवघर समेत कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया.

गिरफ्तारी के बाद देर रात दोनों को मेडिकल जांच के लिए जमशेदपुर के MGM अस्पताल ले जाया गया. वहां दोनों ने हंगामा किया और खुद को मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया. ज्ञानचंद जायसवाल ने ब्लड प्रेशर बढ़ने और दवा नहीं मिलने की शिकायत भी की. इसके बाद ED की टीम दोनों को लेकर रांची रवाना हो गई.

ईडी ने कहां-कहां मारे छापे?

ED की एंटी मनी लॉन्ड्रिंग टीम ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर, आदित्यपुर-गम्हरिया और पश्चिम बंगाल के हावड़ा समेत छह ठिकानों पर तलाशी ली. इस पूरी कार्रवाई में 70 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. सुरक्षा व्यवस्था के लिए CRPF और स्थानीय पुलिस के जवानों को भी तैनात किया गया था.

जमशेदपुर में बिष्टुपुर के कॉन्ट्रैक्टर्स एरिया स्थित ज्ञानचंद जायसवाल के घर और मुख्य कार्यालय की तलाशी ली गई. इसके अलावा बीएस टावर स्थित उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) संजय पारेख के ठिकाने और आदित्यपुर-गम्हरिया स्थित मेसर्स सारा एडोस के प्लांट-कम-ऑफिस को भी खंगाला गया.

क्या-क्या किया गया ज़ब्त?

ED ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की. तलाशी के दौरान एजेंसी ने कंपनियों से जुड़े बैंक खाते, खरीद-बिक्री के चालान, GST रिटर्न और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए. इसके अलावा कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल डेटा भी एजेंसी ने अपने कब्जे में लिया है.

क्या लगे हैं आरोप?

ED की जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में 37 शेल कंपनियां बनाई गईं. एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों के जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान जारी किए गए. जांच का एक अहम हिस्सा 734 करोड़ रुपये के ITC दावे से जुड़ा है. आरोप है कि वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना ही इतने बड़े स्तर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया. जीएसटी इंटेलिजेंस की जांच के आधार पर ED ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.

किन लोगों का नाम जांच के दायरे में?

एजेंसी के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में अमित उर्फ निक्की भालेरिया, कोलकाता के शिवकुमार देवड़ा उर्फ मोदित देवड़ा और अमित गुप्ता समेत कई अन्य लोग शामिल हैं. ED ने बीएस टावर स्थित CA संजय पारेख के कार्यालय से ऑडिट पेपर, GST फाइलिंग लॉग और बैलेंस शीट भी जब्त की है. अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिना माल की आपूर्ति के जारी किए गए कथित फर्जी चालानों और ITC दावों में CA स्तर पर क्या भूमिका रही.

बबलू जायसवाल से जुड़ी कई कंपनियां भी जांच के घेरे में..

ED की जांच में बबलू जायसवाल से जुड़ी कई फर्मों का नाम भी सामने आया है. इनमें मेसर्स जय भोलानाथ, मेसर्स मां शारदा पावर, मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केदारनाथ टेक्सटाइल्स और मेसर्स जानदीप आयरन एंड स्टील लिमिटेड शामिल हैं. एजेंसी के मुताबिक, अगस्त 2025 में सरायकेला के कारोबारी पंचानंद सरदार से जुड़े ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान कुछ दस्तावेज मिले थे. इन दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ED को एक शेल कंपनी में डमी डायरेक्टर बनाए जाने से जुड़ा सुराग मिला.

कंपनी का असली कंट्रोल किसके पास था?

ED के अनुसार, जिस कंपनी में डमी डायरेक्टर बनाए जाने का सुराग मिला, उसका वास्तविक नियंत्रण बबलू जायसवाल के पास था. जांच में इससे पहले भी बबलू से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से करीब 55 करोड़ रुपये के संदिग्ध GST ITC का मामला सामने आया था. अब ED इस पुराने मामले और मौजूदा 734 करोड़ रुपये के ITC मामले के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है.

बेटे राज जायसवाल के नेटवर्क की भी जांच

जांच का दायरा राज जायसवाल से जुड़े कारोबारी नेटवर्क तक भी पहुंच गया है. खास तौर पर हावड़ा में उनके कारोबार और रियल एस्टेट में कथित निवेश की जांच की जा रही है. ED यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी ITC से जुड़े कथित धन का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया. एजेंसी जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंक खातों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रही है.

इस पूरे मामले में ED की जांच अभी जारी है और एजेंसी कथित फर्जी चालानों, ITC दावों, शेल कंपनियों, कारोबारी नेटवर्क और धन के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है.

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