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दो टीचर सस्पेंड, प्रिंसिपल समेत 3 पर FIR; पंचकूला के सरकारी स्कूल में बच्ची पर हुए हमला मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? 10 बड़ी बातें

पंचकूला के सरकारी स्कूल में 6 साल की बच्ची को PGIMER में करीब 40 घंटे बाद होश आया. पुलिस ने प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ FIR दर्ज की है. वहीं, शिक्षा विभाग ने दो JBT शिक्षिकाओं सिमरनजीत कौर और पूजा रानी को सस्पेंड कर दिया है.

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( Image Source:  Google Gemini )

Panchkula School Girl Attack Case: हरियाणा के पंचकूला में एक सरकारी स्कूल में जो कुछ हुआ, उसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. लोगों के मन में बस यही सवाल है कि एक बच्चा इतना क्रूर, निर्दयी और हिंसक कैसे हो सकता है. इसके साथ ही, स्कूल में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 8 साल के छात्र ने केजी में पढ़ने वाली 6 साल की बच्ची पर ईंट, पत्थरों और गमले से हमला किया. इससे बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई और उसे चंडीगढ़ के PGIMER में भर्ती कराना पड़ा, जहां 40 घंटे बाद उसे होश आया.

मामले में पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ FIR दर्ज की है. वहीं, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस मामले में शिक्षा विभाग ने दो JBT शिक्षिकाओं सिमरनजीत कौर और पूजा रानी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.



पंचकूला स्कूल की घटना से जुड़े 10 बड़े अपडेट

1. स्कूल के अंदर 6 साल की बच्ची पर हमले का आरोप:


घटना 28 अक्टूबर को पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई. आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 8 साल के छात्र ने केजी में पढ़ने वाली 6 साल की बच्ची पर हमला किया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बच्ची पर ईंट, पत्थरों और गमले से वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई.

2. करीब 40 घंटे बाद बच्ची को आया होश

हमले के बाद बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया. शुरुआत में उसे स्थानीय अस्पतालों में दिखाया गया. हालत गंभीर होने पर उसे चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) रेफर किया गया. बच्ची करीब 40 घंटे तक बेहोश रही और इसके बाद उसे होश आया. पुलिस ने भी बताया कि वह अस्पताल में भर्ती है और फिलहाल खतरे से बाहर है.

3. छुट्टी के बाद भी बच्ची का पता नहीं चला

बच्ची के पिता के मुताबिक, 28 अक्टूबर को स्कूल की छुट्टी होने के बाद जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिवार उसे तलाशने स्कूल पहुंचा. पिता ने बताया कि स्कूल में मौजूद किसी कर्मचारी को बच्ची के बारे में जानकारी नहीं थी. काफी तलाश के बाद एक छोटे बच्चे ने उन्हें ऊपर के क्लासरूम में बच्ची के होने की बात बताई. जब पिता वहां पहुंचे तो बच्ची कमरे के अंदर थी और दरवाजे पर ताला लगा हुआ था. ताला खुलवाने के बाद उसे बाहर निकाला गया.

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4. घायल बच्ची करीब दो घंटे तक कमरे में पड़ी रही, परिजनों का आरोप

शिकायतकर्ता परिवार का आरोप है कि स्कूल की छुट्टी के बाद भी घायल बच्ची करीब दो घंटे तक उसी कमरे में पड़ी रही. परिवार का कहना है कि अगर स्कूल प्रबंधन और स्टाफ समय रहते बच्ची की तलाश करते और उसकी स्थिति का पता लगाते तो उसे जल्द चिकित्सा सहायता मिल सकती थी. पुलिस ने शुरुआती जांच में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही की बात कही है. हालांकि, इस मामले में जिम्मेदारी और घटनाक्रम की पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.

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5. प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ FIR

परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ मामला दर्ज किया है. FIR में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125(बी) लगाई गई है. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है. आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है.

6. शिक्षा विभाग ने दो JBT शिक्षिकाओं को किया सस्पेंड

मामले में जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में तैनात दो JBT शिक्षिकाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबित शिक्षिकाओं की पहचान सिमरनजीत कौर और पूजा रानी के रूप में हुई है. यह कार्रवाई स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर उठे सवालों के बीच की गई है. विभागीय जांच में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी की पड़ताल की जाएगी.



7. 8 साल के बच्चे की मानसिक स्थिति की जांच

इस घटना में जिस छात्र पर हमला करने का आरोप है, उसकी उम्र 8 साल बताई गई है. पुलिस के मुताबिक, उसकी मानसिक स्थिति का आकलन विशेषज्ञों से कराया जा रहा है. जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चे पर सोशल मीडिया, ऑनलाइन कंटेंट या गेम का कोई प्रभाव था या नहीं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 7 साल से कम उम्र के बच्चे को आपराधिक सजा नहीं दी जा सकती. ऐसे मामलों में बच्चे के सुधार, देखभाल और काउंसलिंग पर जोर दिया जाता है.

8. जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बच्चे को ऑब्जर्वेशन होम भेजा

पंचकूला के डीसीपी क्राइम अमरिंदर सिंह के मुताबिक, बच्चे के मामले में कानूनी प्रक्रिया जुवेनाइल जस्टिस व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाई जा रही है. उन्होंने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बच्चे को ऑब्जर्वेशन होम भेजा है. बच्चे के साथ दंडात्मक व्यवहार के बजाय उसकी मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को समझने की कोशिश की जा रही है. विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी.

9. बाल अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेकर मांगी रिपोर्ट

हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (HSCPCR) ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और पंचकूला के जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत, बिंदुवार रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने शिक्षकों की ड्यूटी, CCTV फुटेज, हाजिरी रिकॉर्ड और शिक्षा विभाग की ओर से की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है. आयोग की अध्यक्ष तृप्ति हरिपाल श्योराण ने बच्ची के परिवार से मुलाकात कर उसकी सेहत की जानकारी भी ली है.

10. सरकार और मानवाधिकार आयोग ने शुरू की जांच

हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के लिए अलग-अलग समितियां गठित की हैं. जिला स्तर की कमेटी को दो दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं. शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा है कि जांच में किसी की लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने भी स्कूल का दौरा किया है। उन्होंने कहा कि लापरवाही मिलने पर सरकार से कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी.

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