कहां बनेगी हाइड्रोजन और फिर कैसे चलेगी ट्रेन, जींद-सोनीपत को ही क्यों चुना, FAQ से जानें सब, Hydrogen Train चलाने वाला 5वां देश बना भारत
भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरूआत हो चुकी है. जिसके लिए जींद-सोनीपत रूट चुना गया है. अब भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला दुनिया का 5वां देश बन गया है.
Hydrogen Train
भारत ने रेलवे के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया है. पीएम मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसके बाद यह हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच नियमित सेवा में शामिल हो गई. पर्यावरण के अनुकूल इस ट्रेन को भारतीय रेलवे के हरित परिवहन मिशन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
10 कोच वाली यह ट्रेन 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत रूट पर चलेगी. इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किमी प्रति घंटा होगी और यह रास्ते में 14 स्टेशनों पर रुकेगी. खास बात यह है कि इस ट्रेन का किराया आम यात्रियों की पहुंच में रखा गया है, जो ₹5 से ₹25 के बीच होगा.
FAQ: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़े सभी सवालों के जवाब
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच शुरू की गई है. यह 89 किलोमीटर लंबे रूट पर नियमित रूप से संचालित होगी और 14 स्टेशनों से होकर गुजरेगी.
हाइड्रोजन ट्रेन में एक फ्यूल सेल सिस्टम लगा होता है, जो चलते-फिरते छोटे बिजलीघर की तरह काम करता है. इसमें हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जाता है. फ्यूल सेल हाइड्रोजन को बिजली में बदलता है. यही बिजली ट्रेन के मोटरों को चलाती है. जिससे प्रदूषण भी नहीं होता.
हाइड्रोजन गैस को फ्यूल सेल के जरिए बिजली में बदला जाता है. वहीं हाइड्रोजन तैयार करने के लिए विद्युत अपघटन (Electrolysis) प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें पानी (H₂O) को बिजली की मदद से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है.
इस मार्ग पर ट्रैफिक कम है और यहां प्रतिदिन केवल आठ ट्रेनें संचालित होती हैं. यह दिल्ली के काफी करीब है, जिससे रेलवे के इंजीनियरों और तकनीकी टीमों के लिए परीक्षण, निगरानी और रखरखाव करना आसान रहेगा.
यह ट्रेन प्रतिदिन दो फेरे लगाएगी. कुल दूरी लगभग 356 किलोमीटर प्रतिदिन और अनुमानित हाइड्रोजन खपत 300 किलोग्राम प्रतिदिन.
रेलवे के अनुमान के अनुसार 300 किलोग्राम हाइड्रोजन में ट्रेन लगभग 356 किलोमीटर चलेगी. यानी लगभग 1.2 किलोमीटर प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन की औसत क्षमता होगी.
भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का संचालन शुरू हुआ है. भारत से पहले यह तकनीक जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में अपनाई जा चुकी है.
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर लगभग 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरित हाइड्रोजन पर चलेगी. इस परियोजना के लिए ईंधन की आपूर्ति हेतु हरियाणा के जिंद में एक हरित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र बनाया गया है.




