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जागृति मिश्रा कौन? 70 लाख के पशु शेल्टर पर क्यों चला बुलडोजर, AAP नेताओं पर लगाए रिश्वत के आरोप; जानें पूरा विवाद

दिल्ली में पशु कल्याण कार्यकर्ता जागृति मिश्रा ने निर्माणाधीन शेल्टर गिराने पर सवाल उठाए हैं. जानें 70 लाख के नुकसान, रिश्वत और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की पूरी कहानी.

जागृति मिश्रा कौन? 70 लाख के पशु शेल्टर पर क्यों चला बुलडोजर, AAP नेताओं पर लगाए रिश्वत के आरोप; जानें पूरा विवाद
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सागर द्विवेदी
सागर द्विवेदी13 Mins Read

Updated on: 24 Oct 2026 7:29 PM IST

दिल्ली में बेजुबान जानवरों के रेस्क्यू और उनकी देखभाल करने वाली पशु कल्याण कार्यकर्ता जागृति मिश्रा इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. उनके संगठन Street Worldz Trust से जुड़े एक निर्माणाधीन पशु आश्रय स्थल को तोड़े जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. जागृति मिश्रा का आरोप है कि मौके पर पहुंचे नगर निगम के अधिकारियों ने बिना पूर्व नोटिस दिए निर्माण को गिरा दिया. उन्होंने कथित तौर पर रिश्वत मांगने और इस कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी लगाए हैं.

इस मामले में उन्होंने जूनियर इंजीनियर विकास गुप्ता, सोनू डबास और आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े लोगों का नाम लिया है. उन्होंने मनीष सिसोदिया का भी जिक्र करते हुए सवाल उठाए हैं. हालांकि, रिश्वत मांगने, राजनीतिक हस्तक्षेप और कार्रवाई के पीछे बताए जा रहे कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित अधिकारियों और नेताओं का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना जरूरी है. फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद यह मामला चर्चा में है.

जागृति मिश्रा कौन?

जागृति मिश्रा दिल्ली में पशु कल्याण और रेस्क्यू से जुड़े काम करती हैं. वह Street Worldz Trust नाम के संगठन के माध्यम से सड़क पर रहने वाले बेसहारा, घायल और बीमार जानवरों की देखभाल करने का काम करती हैं. उनके सोशल मीडिया वीडियो में खास तौर पर घायल और लकवाग्रस्त कुत्तों की देखभाल, उनके इलाज और उन्हें सुरक्षित जगह पर रखने से जुड़ी गतिविधियां दिखाई देती हैं.

जागृति का काम उन जानवरों पर केंद्रित है, जिन्हें सड़क पर चोट लगने, बीमारी या दिव्यांगता के कारण सामान्य जीवन जीने में मुश्किल होती है. ऐसे जानवरों को भोजन, उपचार और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना उनके काम का हिस्सा बताया जाता है. जागृति मिश्रा सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं. उनके वीडियो के जरिए पशु रेस्क्यू और देखभाल से जुड़ी गतिविधियां लोगों तक पहुंचती हैं. हालिया विवाद के बाद उनके निर्माणाधीन शेल्टर से जुड़े वीडियो भी तेजी से प्रसारित हो रहे हैं.

क्या है जागृति मिश्रा का पूरा विवाद?

अक्टूबर 2026 में जागृति मिश्रा उस समय चर्चा में आईं, जब उन्होंने अपने निर्माणाधीन पशु आश्रय स्थल को गिराए जाने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक, वह बेसहारा और घायल जानवरों को स्थायी जगह उपलब्ध कराने के लिए शेल्टर का निर्माण करवा रही थीं. इसी दौरान मौके पर नगर निगम के अधिकारी और पुलिस पहुंचे. जागृति का आरोप है कि जूनियर इंजीनियर विकास गुप्ता पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और जेसीबी की मदद से निर्माण को गिरवा दिया. उनका दावा है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जागृति निर्माण स्थल पर मौजूद लोगों से बहस करती दिखाई देती हैं. वह तोड़फोड़ पर सवाल उठाती हैं और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज तथा नोटिस की मांग करती नजर आती हैं. हालांकि, वायरल वीडियो से अपने आप यह साबित नहीं होता कि कार्रवाई गैरकानूनी थी. इसके लिए संबंधित विभाग का आदेश, जमीन के दस्तावेज, निर्माण की अनुमति और नोटिस से जुड़े रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है.

जागृति मिश्रा ने क्या आरोप लगाए हैं?

जागृति मिश्रा ने वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी में कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

1. बिना नोटिस शेल्टर गिराने का आरोप

जागृति का कहना है कि वह बेजुबान जानवरों के लिए आश्रय स्थल तैयार करवा रही थीं. इसी दौरान अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण गिरा दिया. उनका दावा है कि उन्हें पहले कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया था. वीडियो में वह कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि अधिकारियों को पहले इंतजार करना चाहिए था और उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए था. वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कहती हैं.

2. करीब 70 लाख रुपये के नुकसान का दावा

जागृति मिश्रा ने आरोप लगाया है कि निर्माण गिराए जाने से उन्हें लगभग 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. उनके मुताबिक, शेल्टर बनाने में काफी पैसा लगाया गया था, जिसका उद्देश्य बेसहारा जानवरों के लिए सुरक्षित जगह तैयार करना था. हालांकि, 70 लाख रुपये के नुकसान की राशि की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसकी वास्तविक स्थिति निर्माण की लागत, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और नुकसान के आकलन के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है.

3. रिश्वत मांगने का आरोप

इस विवाद का एक अहम पहलू कथित रिश्वत मांगने का आरोप है. जागृति का दावा है कि स्थानीय स्तर पर उनसे पैसे मांगे गए थे. उनका आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने के बाद उनके निर्माणाधीन शेल्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई. उन्होंने इस मामले में स्थानीय लोगों और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, रिश्वत की मांग किए जाने और इसके कारण ही निर्माण गिराए जाने की बात अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुई है.

4. सोनू डबास और जूनियर इंजीनियर विकास गुप्ता का नाम

जागृति मिश्रा ने अपने आरोपों में सोनू डबास और जूनियर इंजीनियर विकास गुप्ता का नाम लिया है. उनका दावा है कि इन लोगों की भूमिका निर्माण गिराए जाने की कार्रवाई में थी. वायरल वीडियो में वह मौके पर मौजूद लोगों से सवाल-जवाब करती और निर्माण गिराए जाने पर आपत्ति जताती नजर आती हैं. लेकिन किसी व्यक्ति का नाम वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट में आने भर से उसके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो जाते. मामले की सच्चाई जानने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष और कार्रवाई के आधिकारिक दस्तावेज जरूरी हैं.

मनीष सिसोदिया और AAP को लेकर क्या हैं आरोप?

जागृति मिश्रा ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने मनीष सिसोदिया का नाम लेते हुए राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर साझा की जा रही पोस्ट में भी AAP से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की जा रही है. हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी से यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि मनीष सिसोदिया ने निर्माण गिराने का आदेश दिया था या वह इस कार्रवाई में सीधे तौर पर शामिल थे. इसी तरह, किसी स्थानीय व्यक्ति के कथित राजनीतिक संबंध अपने आप पार्टी की संस्थागत भूमिका साबित नहीं करते. इसलिए इस मामले में जागृति के आरोपों और सत्यापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है. मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी और संबंधित अधिकारियों का इस विशेष मामले पर आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद के कई पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में जागृति मिश्रा निर्माण स्थल पर मौजूद लोगों से बहस करती नजर आती हैं. वह सवाल उठाती हैं कि बिना नोटिस दिए निर्माण क्यों गिराया गया. वीडियो में वह कथित नुकसान का जिक्र करती हैं और कानूनी कार्रवाई करने की बात कहती हैं. एक अन्य आरोप में वह अधिकारियों और स्थानीय लोगों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती हैं. वह आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ भी नाराजगी जताती हैं. हालांकि, वायरल वीडियो में कही गई बातों को आरोपों के रूप में ही रिपोर्ट करना उचित है. वीडियो की पूरी रिकॉर्डिंग, उसकी तारीख, घटनास्थल, कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बिना पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.

क्या जागृति मिश्रा का शेल्टर अवैध था?

फिलहाल इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने के लिए पर्याप्त सत्यापित जानकारी उपलब्ध नहीं है. जागृति मिश्रा का दावा है कि वह जानवरों के लिए शेल्टर बनवा रही थीं और निर्माण गिराने से पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया गया. दूसरी ओर, कार्रवाई का कानूनी आधार क्या था, निर्माण के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं और जमीन के दस्तावेज क्या कहते हैं. इन सवालों के जवाब आधिकारिक रिकॉर्ड से ही मिल सकते हैं. अगर नगर निगम ने किसी नियम के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की थी, तो संबंधित आदेश और नियम सामने आने चाहिए. वहीं, यदि रिश्वत मांगने या प्रक्रिया का उल्लंघन किए जाने के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

मामले में अब किन सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं?

  • इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने लाने के लिए कुछ सवाल अहम हैं:
  • क्या निर्माण गिराने से पहले कोई लिखित नोटिस जारी किया गया था?
  • संबंधित जमीन का मालिकाना हक किसके पास है और निर्माण की अनुमति थी या नहीं?
  • तोड़फोड़ की कार्रवाई किस विभागीय आदेश के तहत की गई?
  • क्या जागृति मिश्रा से रिश्वत मांगे जाने की कोई शिकायत या सबूत उपलब्ध है?
  • सोनू डबास और जूनियर इंजीनियर विकास गुप्ता की वास्तविक भूमिका क्या थी?
  • क्या मनीष सिसोदिया या AAP के किसी पदाधिकारी का इस कार्रवाई से कोई प्रत्यक्ष संबंध था?
  • क्या करीब 70 लाख रुपये के नुकसान के दावे का दस्तावेजों से आकलन किया जा सकता है?
  • इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.
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