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Delhi Govindpuri Fire: बिल्डिंग में आधी रात लगी आग तो लोगों ने ऐसे बचाई जान, साड़ियां बनीं लाइफ सेवर: Detail

गोविंदपुरी में हुई भीषण आग की घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि स्थानीय लोगों और पड़ोसियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बचाया. कई लोगों ने घरों से साड़ियों को निकाला और लोगों की मदद की.

Delhi Govindpuri Fire: बिल्डिंग में आधी रात लगी आग तो लोगों ने ऐसे बचाई जान, साड़ियां बनीं लाइफ सेवर: Detail
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दिल्ली के गोविंदपुरी के पास तुगलकाबाद एक्सटेंशन में शुक्रवार तड़के एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी आग ने तीन लोगों की जान ले ली, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. अधिकारियों के अनुसार आग की सूचना रात करीब 2:03 बजे गली नंबर-1 स्थित एक इमारत से मिली. आग ग्राउंड फ्लोर पर बने पार्किंग क्षेत्र में लगी और देखते ही देखते घना धुआं पूरी इमारत में फैल गया.

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले ही हौज रानी स्थित एक बेड एंड ब्रेकफास्ट सुविधा केंद्र में लगी भीषण आग में 23 लोगों की मौत हुई थी. तुगलकाबाद की इस घटना में स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही अपने स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया और कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

कैसे बचाई पड़ोसियों ने लोगों की जान?

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 45 वर्षीय रेनू भूटानी ने बताया कि वह उस समय जाग रही थीं क्योंकि उन्हें रात में क्राइम ड्रामा देखने की आदत है. उन्होंने बताया कि वह अपने बेटे के साथ पीछे वाली दो मंजिला इमारत की छत पर पहुंचीं और वहां से दो लकड़ी की सीढ़ियों को बांधकर पांच मंजिला इमारत की छत तक पहुंचे. छत का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे उनके बेटे ने पत्थर मारकर तोड़ा.

रेनू भूटानी के मुताबिक, जैसे ही दरवाजा खुला, घने धुएं का गुबार बाहर निकला. उन्होंने छत पर रखी पानी की टंकियों को पत्थरों से तोड़ दिया ताकि पानी सीढ़ियों में बह सके और धुएं व आग का असर कुछ कम हो. इसके बाद वे खुद को पानी से भिगोकर इमारत के अंदर दाखिल हुए.

उन्होंने बताया कि चौथी मंजिल पर फंसी दो लड़कियों को उसी रास्ते से बाहर निकाला गया, जिससे वे अंदर पहुंचे थे. तीसरी मंजिल पर फंसे एक दंपति को बचाने के लिए उनके फ्लैट का दरवाजा ग्राइंडर से तोड़ना पड़ा. उन्होंने दूसरी मंजिल पर फंसी दो अन्य लड़कियों की आवाज भी सुनी, लेकिन घना धुआं होने के कारण तीसरी मंजिल से नीचे जाना संभव नहीं था.

कैसे बची साड़ी की मदद से जान?

रेनू भूटानी ने बताया कि सामने वाली इमारत में मौजूद एक व्यक्ति को इशारा कर साड़ी फेंकने के लिए कहा गया. दूसरी मंजिल पर मौजूद लड़कियों ने उस साड़ी को बालकनी की रेलिंग से बांधा और उसके सहारे नीचे उतरने में सफल रहीं. इसी दौरान दमकल कर्मी भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने बचाव अभियान संभाल लिया.

इलाके में रहने वाले एक शख्स ने बताया कि मदद के लिए लोगों की चीखें सुनकर पूरा इलाका जाग गया और लोग बचाव के लिए दौड़ पड़े. उन्होंने कहा कि उनकी मां उस समय जाग रही थीं क्योंकि उनके पिता की नाइट ड्यूटी थी. अचानक चीखें सुनाई दीं और चारों तरफ धुआं फैल गया.

कई लोग इमारत की छत पर पहुंच गए थे. पड़ोसी, दुकानदार और आसपास के लोग धुएं के बावजूद लोगों को बचाने के लिए मौके पर पहुंच गए. रिपोर्ट के मुताबिक इलाकाई लोगों ने बताया कि दूसरी मंजिल पर मौजूद एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की साड़ी को बालकनी से बांधा और उसके सहारे नीचे उतरने की कोशिश की. उनके भाई समेत कुछ लोगों ने नीचे खड़े होकर उसे सुरक्षित पकड़ लिया.

उन्होंने यह भी कहा कि इमारत में वेंटिलेशन की भारी कमी थी. उनका मानना है कि नई इमारतों में अधिक से अधिक जगह का इस्तेमाल करने के चक्कर में वेंटिलेशन को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे ऐसे हादसों में लोगों के फंसने का खतरा बढ़ जाता है.

आम आदमी पार्टी ने साधा निशाना

आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया," गोविंदपुरी में आग लगने की घटना बेहद दुखद है. जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति गहरी संवेदनाएँ. इस त्रासदी में एक बात सामने आई कि स्थानीय लोगों और पड़ोसियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बचाने की कोशिश की. कहीं साड़ियों के सहारे लोग नीचे उतारे गए, तो कहीं पड़ोसियों ने राहत कार्य में मदद की. ऐसे मानवीय प्रयास सराहनीय हैं.

लेकिन हर बड़ी आग की घटना के बाद एक और सवाल खड़ा होता है. जांच के आदेश तो तुरंत दे दिए जाते हैं, मगर रिपोर्टें कभी सार्वजनिक नहीं होतीं. पालम, विवेक विहार, मालवीय नगर और अब गोविंदपुरी — आखिर इन हादसों की जांच रिपोर्टें कहां हैं? अगर रिपोर्टें सामने ही नहीं आएंगी, तो जिम्मेदारी कैसे तय होगी और ऐसी घटनाओं पर रोक कैसे लगेगी? दिल्ली की जनता को जवाब चाहिए...

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