दिल्ली-NCR को मिलेंगे 4 नए ‘नमो’ शहर, क्यों पड़ रही नई सिटीज की जरूरत, क्या होगा खास, FAQ से जानें सब
दिल्ली-NCR में 4 नए नमो शहरों की तैयारी, 5000 करोड़ का प्लान, स्मार्ट सुविधाएं, नई कनेक्टिविटी और बढ़ती आबादी-प्रदूषण की चुनौती का समाधान जानें.
दिल्ली-NCR में आने वाले वर्षों में शहरी विकास की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. बढ़ती आबादी, भीषण ट्रैफिक जाम और लगातार बढ़ते प्रदूषण के दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े मास्टर प्लान पर काम तेज कर दिया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को अब चार नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहर मिलने की तैयारी है, जिन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘नमो शहर’ के रूप में विकसित किया जाएगा. इन शहरों का ब्लू प्रिंट NCR योजना-2041 के तहत तैयार किया जा रहा है.
इन नए शहरों में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित क्षेत्र, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार केंद्र और ‘वॉक-टू-वर्क’ मॉडल जैसी सुविधाएं होंगी. सरकार का लक्ष्य दिल्ली पर बढ़ते दबाव को कम करना और NCR को भविष्य के लिए तैयार करना है. अब सबसे बड़ा सवाल है- ये चार हाईटेक शहर आखिर कहां बसेंगे और इनसे किन इलाकों की तस्वीर बदलेगी?
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दिल्ली-NCR में 4 नए नमो शहरों की तैयारी, जानिए कहां बनेंगे स्मार्ट शहर और कैसे बदलेंगे ट्रैफिक, प्रदूषण व विकास का भविष्य.
दिल्ली-NCR पिछले कई दशकों से तेजी से बढ़ती आबादी, ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. राजधानी पर जनसंख्या और शहरी गतिविधियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. केंद्र सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2041 तक NCR की आबादी करीब 15 करोड़ तक पहुंच सकती है और शहरी आबादी का हिस्सा लगभग 67 प्रतिशत हो जाएगा. इसी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. ताकि दिल्ली पर बढ़ता दबाव कम हो और क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके.
‘नमो सिटी’ प्रस्तावित आधुनिक ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों की योजना है. ग्रीनफील्ड सिटी का मतलब ऐसी खाली या अविकसित जमीन पर बसाया जाने वाला नया शहर है, जहां पहले बड़े स्तर पर निर्माण नहीं हुआ हो. इन शहरों का उद्देश्य सिर्फ नई कॉलोनियां बनाना नहीं बल्कि रोजगार, परिवहन, पर्यावरण और आधुनिक सुविधाओं के साथ भविष्य के शहर तैयार करना है. इन्हें NCR योजना-2041 के तहत विकसित किया जाएगा.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की बैठक में चार नए ग्रीनफील्ड शहर विकसित करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है. केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई NCRPB की 42वीं बैठक में इस योजना पर चर्चा हुई. केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में इस परियोजना के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की सहायता देने की तैयारी की है. इसके लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से प्रस्ताव मांगे जाएंगे.
योजना के अनुसार दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एक-एक नया शहर विकसित किया जाएगा. उत्तर प्रदेश की ओर से नोएडा, दादरी, जेवर और बुलंदशहर को संभावित स्थानों के तौर पर प्रस्तावित किया गया है. अंतिम चयन जमीन, कनेक्टिविटी और तकनीकी मानकों की जांच के बाद किया जाएगा.
दिल्ली में तीन जगहों को शुरुआती तौर पर शॉर्टलिस्ट किया गया है- नरेला-बवाना, द्वारका फेज-2 और अलीपुर-बुराड़ी. नरेला-बवाना में बड़ी मात्रा में खाली जमीन उपलब्ध है और यह NH-44 से जुड़ा हुआ है. भविष्य में यहां मेट्रो और RRTS कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है. अलीपुर-बुराड़ी क्षेत्र लैंड पूलिंग नीति और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है. द्वारका फेज-2 एयरपोर्ट, द्वारका एक्सप्रेसवे और यशोभूमि के पास होने के कारण ‘वॉक-टू-वर्क’ मॉडल के लिए मजबूत विकल्प माना जा रहा है.
नमो सिटी को ग्रीन और स्मार्ट मॉडल पर विकसित किया जाएगा. यहां 24 घंटे बिजली-पानी, स्मार्ट कचरा प्रबंधन, भूमिगत यूटिलिटी नेटवर्क, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा संस्थान और बेहतर आवासीय सुविधाएं होंगी. इन शहरों में बड़े स्तर पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी. इलेक्ट्रिक वाहनों और साइकिल आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि प्रदूषण कम किया जा सके.
सरकार की योजना इन शहरों को नमो भारत रैपिड रेल (RRTS), मेट्रो और हाई-स्पीड रोड नेटवर्क से जोड़ने की है. ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल के कारण लोग सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे. वॉक-टू-वर्क’ मॉडल के तहत घर, दफ्तर और जरूरी सुविधाएं आसपास होंगी, जिससे रोजाना लंबी दूरी की यात्रा कम होगी. इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है.
NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए BS-1, BS-2 और BS-3 श्रेणी के पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी है. सरकार स्क्रैपिंग नीति को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. नए शहरों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भविष्य में प्रदूषण का स्तर नियंत्रित किया जा सके.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का कुल क्षेत्रफल 55,083 वर्ग किलोमीटर है. इसमें दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के जिले शामिल हैं. हरियाणा के 14 जिले NCR में आते हैं, जिनका क्षेत्रफल 25,327 वर्ग किलोमीटर है. उत्तर प्रदेश के 8 जिलों का क्षेत्रफल 14,826 वर्ग किलोमीटर है. राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले NCR में शामिल हैं, जिनका क्षेत्रफल 13,447 वर्ग किलोमीटर है. दिल्ली का क्षेत्रफल 1,483 वर्ग किलोमीटर है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि NCR का मौजूदा क्षेत्रफल बदला नहीं जाएगा और किसी जिले को बाहर नहीं किया जाएगा.
नए शहरों और बेहतर कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली में द्वारका, दक्षिण पश्चिम दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, बवाना, बुराड़ी, अलीपुर, नजफगढ़, रोहिणी, पालम विहार, डीएलए आदि. यूपी में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, दादरी, जेवर और आसपास के क्षेत्रों को मिल सकता है. ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को भी गति देने की योजना है. हरियाणा की बात करें तो गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, बहादुरगढ़, झज्जर व अन्य क्षेत्र. सरकार का मानना है कि नमो सिटी परियोजना से रोजगार, निवेश, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी. आने वाले वर्षों में यह योजना दिल्ली-NCR की जीवनशैली और शहरी ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती है.




