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सिर्फ एक दफ्तर नहीं, इतिहास का हिस्सा! क्या Congress से छिन जाएगा उसका सबसे 'भावनात्मक' ठिकाना; जानें इस ऑफिस के पीछे की कहानी

48 सालों तक सियासत का केंद्र रहा 24 अकबर रोड अब खाली कराने के आदेश से नए विवाद का कारण बन गया है, जिससे Indian National Congress और सरकार आमने-सामने आ सकते हैं।

सिर्फ एक दफ्तर नहीं, इतिहास का हिस्सा! क्या Congress से छिन जाएगा उसका सबसे भावनात्मक ठिकाना; जानें इस ऑफिस के पीछे की कहानी
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( Image Source:  X-@ANI )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी3 Mins Read

Updated on: 25 March 2026 11:36 AM IST

Congress Office Eviction Notice: सरकार ने मुख्य विपक्षी दल Indian National Congress को उसके 24, अकबर रोड स्थित दफ्तर को शनिवार तक खाली करने के लिए कहा है. यह बंगला पिछले 48 सालों से कांग्रेस का मुख्यालय रहा है. पिछले साल पार्टी ने कोटला मार्ग पर अपना नया मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ शुरू किया था, लेकिन इसके बावजूद अकबर रोड स्थित परिसर अभी तक खाली नहीं किया गया है और वहां पार्टी की गतिविधियां जारी हैं.

कांग्रेस को 5, रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के लिए कहा गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में राहत पाने के लिए कांग्रेस कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है. इन्हें खाली करने के लिए 28 मार्च तक का वक्त दिया गया है.

पुराने दफ्तर से कांग्रेस का कैसे जुड़ाव?

पिछले साल जब Sonia Gandhi ने नए मुख्यालय का उद्घाटन किया था, तब कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि 24, अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बना रहेगा. अकबर रोड स्थित इस दफ्तर की दीवारें इतिहास की गवाह रही हैं. कभी यह बंगला वायसराय Lord Linlithgow की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास हुआ करता था.

1960 के दशक की शुरुआत में यह बंगला म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का घर था. उनकी बेटी Aung San Suu Kyi, जिन्हें बाद में नोबेल शांति पुरस्कार मिला, ने भी इस घर में कई साल बिताए.

इस बंगले के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दौर 1970 के दशक के अंत में शुरू हुआ. 1977 के चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी में विभाजन हो गया था. Indira Gandhi ने अलग गुट का नेतृत्व किया और उस समय पार्टी को काम करने के लिए जगह की जरूरत थी. राज्यसभा सांसद जी वेंकटस्वामी, जो इंदिरा गांधी के करीबी थे, ने अपना अकबर रोड स्थित बंगला उन्हें दिया.

यहीं से कांग्रेस की वापसी की कहानी शुरू हुई. यह बंगला Rajiv Gandhi, P. V. Narasimha Rao और Manmohan Singh के कार्यकाल तक पार्टी का मुख्यालय बना रहा. समय के साथ इसकी जगह भी बढ़ाई गई, जब तक कि कांग्रेस को आखिरकार नया मुख्यालय नहीं मिल गया.

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