खनन ट्रांसपोर्ट में बड़ा बदलाव: अब AI और डिजिटल सिस्टम से होगी निगरानी; नई तकनीक से होंगे बड़े फायदे
खनन परिवहन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार अब AI, कैमरा और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने जा रही है. इससे अवैध खनन, ओवरलोडिंग और भ्रष्टाचार पर सख्त रोक लगेगी और राजस्व में बढ़ोतरी होगी.
सरकार अब खनन के क्षेत्र में होने वाले परिवहन को पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और नियमों के अनुसार चलाने के लिए बहुत आधुनिक और नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करने वाली है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि खनन से जुड़े वाहनों जैसे ट्रक की हर गतिविधि पर पूरी नजर रखी जाए ताकि कोई भी गड़बड़ी, नियम तोड़ना या अवैध काम तुरंत पकड़ा जा सके. इससे न सिर्फ अवैध खनन और परिवहन पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकार को ज्यादा राजस्व भी मिलेगा और सड़कों पर भ्रष्टाचार भी काफी कम हो जाएगा.
खान एवं भू-तत्व विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा की अध्यक्षता में एक ऊंचे स्तर की समीक्षा बैठक हुई थी. इस बैठक में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के अधिकारी भी शामिल थे. बैठक में खनन वाहनों की निगरानी को और मजबूत करने पर गहन चर्चा हुई. सबने मिलकर तय किया कि अब पुरानी व्यवस्था को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल और स्वचालित सिस्टम लागू किया जाएगा.
खनन वाहनों पर लगी रेड स्ट्रिप की जांच
खनन के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रकों पर एक खास लाल पट्टी (रेड स्ट्रिप) लगाना अनिवार्य है. यह पट्टी वाहन की पहचान के लिए होती है, ताकि पता चल सके कि यह वैध खनन का ट्रक है या नहीं. अब चेक पोस्ट पर खास कैमरे लगाए जाएंगे. ये कैमरे खुद-ब-खुद ट्रक की फोटो खींचेंगे और चेक करेंगे कि उस पर लाल पट्टी सही से लगी हुई है या नहीं. अगर पट्टी नहीं लगी या वह फीकी/खराब है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देगा. साथ ही हर फोटो का डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित तरीके से रखा जाएगा, ताकि बाद में कोई सबूत चाहिए तो आसानी से मिल जाए.
ढके हुए ट्रकों में छिपे अवैध खनिज का पता लगाना
कई बार लोग ट्रकों को तिरपाल या कवर से ढककर अवैध खनिज ले जाते हैं. इसे रोकने के लिए सरकार नई तकनीक पर काम कर रही है. इस तकनीक से ट्रक में ढकी हुई चीज की असली माल का पता लगाया जा सकेगा यानी यह पता चलेगा कि ट्रक में वैध सामान है या अवैध खनिज छिपाकर ले जाया जा रहा है. हर लोड वाले ट्रक की उच्च गुणवत्ता वाली स्टिल इमेज लेना जरूरी होगा. अगर कोई ट्रक नियम तोड़ता पाया जाता है, तो उसका वीडियो फुटेज भी अपने आप रिकॉर्ड हो जाएगा. इससे जांच अधिकारी को मजबूत सबूत मिलेंगे और कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता आएगी.
ओवरलोडिंग की समस्या पर लगाम
ट्रक ज्यादा वजन लादकर चलते हैं. जिससे सड़कें खराब होती हैं. हादसे बढ़ते हैं और नियम तोड़ने वाले बच निकलते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए चेक पोस्ट पर Weigh-in-Motion (WIM) नाम की आधुनिक तकनीक लगाई जाएगी. इसे हिंदी में चलते-चलते वजन मापने का सिस्टम कहते हैं. इस सिस्टम में सड़क के अंदर विशेष सेंसर लगे होते हैं. जब ट्रक उस पर से गुजरता है तो सेंसर तुरंत ट्रक का पूरा वजन, एक्सल का वजन आदि माप लेते हैं. डेटा कंप्यूटर में अपने आप दर्ज हो जाता है और अगर वजन तय सीमा से ज्यादा है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देता है. इससे:
ट्रक को रोकने की जरूरत नहीं पड़ती, समय बचता है
- जांच 100% सटीक होती है
- ओवरलोडिंग करने वाले तुरंत पकड़े जाते हैं
- इन सबका कुल फायदा क्या होगा?
- हर वाहन की डिजिटल पहचान पूरी तरह सुनिश्चित हो जाएगी
- फोटो और वीडियो से मजबूत सबूत मिलेंगे, जिससे झूठ बोलना मुश्किल होगा
- ढके ट्रकों में छिपे अवैध खनिज आसानी से पकड़े जाएंगे
- ओवरलोडिंग की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी
- मानवीय हस्तक्षेप (जैसे रिश्वतखोरी) बहुत कम होगा, क्योंकि सब कुछ मशीन और कंप्यूटर से होगा
- अवैध खनन और परिवहन पर सख्त रोक लगेगी
- राज्य सरकार को ज्यादा राजस्व (टैक्स/रॉयल्टी) मिलेगा
- खनन क्षेत्र में अनुशासन, सुरक्षा और पारदर्शिता का एक नया मॉडल बनेगा
सरकार का मानना है कि ये नई तकनीकें लागू होने के बाद खनन का पूरा परिवहन सिस्टम बहुत बेहतर और भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा. इससे आम लोगों को भी फायदा होगा क्योंकि सड़कें सुरक्षित रहेंगी और पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा.




