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वो 4 'विलेन' जिनकी वजह से RJD हारी राज्यसभा चुनाव, NDA के सामने फिर बिखर गया विपक्ष

बिहार राज्यसभा चुनाव में 4 विधायकों की गैरहाजिरी से महागठबंधन को बड़ा झटका लगा. NDA ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज की, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई.

वो 4 विलेन जिनकी वजह से RJD हारी राज्यसभा चुनाव, NDA के सामने फिर बिखर गया विपक्ष
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Published on: 16 March 2026 9:22 PM

16 मार्च सोमवार को राज्यसभा चुनाव की 11 सीटों के नतीजे सामने आ गए. बिहार की पांचों सीटों पर एनडीए का दबदबा दिखा, जबकि महागठबंधन को बड़ा झटका लगा. चुनाव के दौरान उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब महागठबंधन के चार विधायक मतदान के दौरान गायब रहे. इन विधायकों की गैरहाजिरी ने विपक्षी रणनीति को कमजोर कर दिया और एनडीए के लिए पांचवीं सीट का रास्ता आसान हो गया.

सोमवार शाम 4 बजे तक चली वोटिंग के बाद यह साफ हो गया कि महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं. जिन चार विधायकों ने मतदान नहीं किया, उनमें एक आरजेडी और तीन कांग्रेस के विधायक शामिल बताए जा रहे हैं. इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.

कौन हैं वो 4 विधायक जिनकी गैरहाजिरी ने खेल पलट दिया?

राज्यसभा चुनाव में मतदान से अनुपस्थित रहने वालों में आरजेडी विधायक Faisal Rahman के अलावा कांग्रेस के तीन विधायक Manohar Prasad, Surendra Kushwaha और Manoj Biswas का नाम सामने आ रहा है. इन चारों विधायकों के वोट न डालने से महागठबंधन की रणनीति पूरी तरह बिगड़ गई और विपक्ष का गणित कमजोर पड़ गया. हालांकि, स्टेट मिरर हिंदी इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

क्यों अहम था यह मतदान?

बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था. एक तरफ एनडीए का उम्मीदवार मैदान में था तो दूसरी ओर महागठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ उतरा था. एनडीए की ओर से उम्मीदवार Upendra Kushwaha थे, जबकि महागठबंधन की तरफ से AD Singh चुनाव लड़ रहे थे. ऐसे में हर एक वोट बेहद अहम माना जा रहा था.

कांग्रेस के तीन विधायक क्यों रहे गायब?

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के तीनों विधायक पूरे दिन पार्टी नेतृत्व के संपर्क से बाहर रहे. उनके मोबाइल फोन या तो बंद थे या फिर कॉल का जवाब नहीं दिया गया. इस वजह से महागठबंधन के नेताओं के बीच चिंता का माहौल बन गया. मतदान के समय उनकी गैरमौजूदगी ने विपक्ष की रणनीति को बड़ा झटका दिया.

बाकी सीटों पर किसकी जीत तय मानी जा रही थी?

राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक चार सीटों पर जीत पहले से लगभग तय मानी जा रही थी. इनमें जेडीयू की ओर से Nitish Kumar और Ramnath Thakur के अलावा बीजेपी के Nitin Nabin और Shivam Kumar शामिल थे. लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट पर था, जहां हर वोट की अहमियत बढ़ गई थी.

विपक्ष ने विधायकों को होटल में क्यों रखा था?

राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन ने अपने विधायकों को पटना के एक होटल में ठहराया था. इसका उद्देश्य कथित तौर पर विधायकों की ‘पोचिंग’ या टूट-फूट को रोकना था. दूसरी ओर एनडीए ने भी अपने विधायकों के साथ लगातार बैठकें कर चुनावी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश की.

बिहार विधानसभा का गणित क्या कहता है?

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं. हालांकि सभी पांच सीटें जीतने के लिए 205 विधायकों का समर्थन जरूरी माना जा रहा था. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में महागठबंधन को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी. उसे All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के पांच विधायकों और एक बीएसपी विधायक के समर्थन की उम्मीद थी. लेकिन चार विधायकों की गैरहाजिरी ने पूरा समीकरण बदल दिया और इसका सीधा फायदा एनडीए को मिलता दिखाई दिया.

तीन राज्यों में क्या रहा राज्यसभा चुनाव का नतीजा?

हरियाणा, बिहार और ओडिशा की कुल 11 राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार को मतदान हुआ. बिहार की पांचों और ओडिशा की तीन सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की. बिहार में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष Sanjay Saraogi ने ऐलान किया कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar और बीजेपी नेता Nitin Nabin निर्विरोध जीत गए हैं.

तेजस्वी यादव ने क्या कहा?

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने चुनाव के बाद कहा कि हम सभी जानते थे कि हमारे महागठबंधन की ताकत 35 विधायकों की थी. शुरुआत में हम छह वोट कम थे और एनडीए तीन वोट कम था. इसके बावजूद हमने झुकने के बजाय मुकाबला करने का फैसला किया. हम हमेशा उनकी विचारधारा के खिलाफ लड़ते रहेंगे. चार विधायकों की गैरहाजिरी को लेकर हम बाद में जवाब देंगे. लेकिन अगर कुछ लोगों ने हमारे साथ विश्वासघात नहीं किया होता तो आज हमारी जीत तय थी, क्योंकि हमने जरूरी छह वोटों का इंतजाम कर लिया था. AIMIM के पांच विधायकों ने हमारा समर्थन किया और BSP ने भी साथ दिया. धोखाधड़ी, हेराफेरी, पैसे का इस्तेमाल और प्रशासन का दुरुपयोग बीजेपी की आदत बन चुकी है. यह सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि हमें जानकारी मिली है कि आज जिन अन्य राज्यों में चुनाव हुए, वहां भी ऐसी ही बातें सामने आई हैं."

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