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Zubeen Case में एक साल सजा काट रही Amritprabha Mahanta की रिहाई पर मचा बवाल, बाकी के आरोपियों के लिए Update में क्या

जुबीन गर्ग केस में गायिका अमृतप्रभा महंत को जमानत मिलने पर विवाद क्यों बढ़ा? जानिए कोर्ट की टिप्पणी, गरिमा गर्ग के आरोप और केस के 10 बड़े अपडेट.

Zubeen Case में एक साल सजा काट रही Amritprabha Mahanta की रिहाई पर मचा बवाल,  बाकी के आरोपियों के लिए Update में क्या
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असम के मशहूर सिंगर जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. उनकी मौत की जांच में आरोपी बनाई गईं गायिका अमृतप्रभा महंत एक साल से ज्यादा समय जेल में रहने के बाद बाहर आ गई हैं. गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उन्हें 9 अक्टूबर को जमानत दी, जिसके बाद मंगलवार को असम की जेल से उनकी रिहाई हुई. लेकिन इस रिहाई ने जुबीन के परिवार और उनके प्रशंसकों के बीच नाराजगी बढ़ा दी है.

जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने आरोप लगाया कि अमृतप्रभा ने जुबीन के आखिरी पलों के वीडियो बनाए थे, जिन्हें बाद में डिलीट कर दिया गया. उनका कहना है कि इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका पैदा होती है और केस कमजोर हो सकता है. वहीं, रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई ने जमानत को गंभीर संकेत बताते हुए इसे रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की है. सवाल है कि जुबीन गर्ग की मौत के मामले में अब तक क्या हुआ, अमृतप्रभा पर क्या आरोप हैं और उनकी जमानत के बाद आखिर इतना बवाल क्यों मचा है?

जुबीन गर्ग केस के 10 बड़े अपडेट

1. कौन हैं अमृतप्रभा महंत, जिन्हें मिली जमानत?

अमृतप्रभा महंत असम की गायिका हैं और जुबीन गर्ग के साथ सिंगापुर गई थीं. वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (NEIF) के दौरान उनके साथ मौजूद थीं. जुबीन की मौत की जांच में SIT ने उन्हें आरोपी बनाया था. 2 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में थीं. अब इस मामले में जमानत पाने वाली वह पहली आरोपी हैं.

2. कैसे और किन शर्तों पर मिली जमानत?

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को अमृतप्रभा को 50 हजार रुपये के बॉन्ड और इतनी ही रकम की दो जमानतदारियों पर राहत दी. मंगलवार, 13 अक्टूबर को औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वह हाफलोंग सब-जेल से बाहर आईं. जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है. मुकदमा जारी रहेगा.

3. जुबीन गर्ग की मौत कब और कैसे हुई?

19 सितंबर 2025 को 52 वर्षीय जुबीन गर्ग की सिंगापुर में लाजरस आइलैंड के पास समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी. वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने गए थे. उनकी मौत की खबर के बाद असम में व्यापक आक्रोश फैला और मामले की गहराई से जांच की मांग उठी.

4. हत्या की साजिश का आरोप कैसे लगा?

असम सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिसंबर 2025 में विधानसभा में कहा था कि जुबीन की हत्या एक साजिश के तहत हुई. हालांकि, सिंगापुर की जांच और वहां की Coroner's Court का निष्कर्ष अलग था. अदालत ने मौत को दुर्घटनावश डूबने का मामला माना और किसी साजिश के सबूत नहीं पाए. इस तरह सिंगापुर के निष्कर्ष और असम में चल रही आपराधिक जांच के बीच अहम अंतर है.

5. अमृतप्रभा पर क्या-क्या आरोप हैं?

SIT की चार्जशीट में अमृतप्रभा के खिलाफ हत्या, साजिश, साझा मंशा और सबूत नष्ट करने समेत गंभीर आरोप लगाए गए. एजेंसी ने चार लोगों—अमृतप्रभा महंत, फेस्टिवल आयोजक श्यामकानु महंत, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और बैंड सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी—पर हत्या का आरोप लगाया है. ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं; अदालत में दोष साबित होना बाकी है.

6. जुबीन की पत्नी गरिमा ने जमानत पर क्या कहा?

गरिमा सैकिया गर्ग ने अमृतप्रभा की रिहाई पर नाराजगी जताई है. उनका दावा है कि अमृतप्रभा ने जुबीन के आखिरी पलों के कई वीडियो बनाए थे, जिन्हें बाद में डिलीट कर दिया गया. गरिमा ने आशंका जताई कि इससे सबूतों से छेड़छाड़ हुई हो सकती है और आरोपी की रिहाई से केस प्रभावित हो सकता है. यह गरिमा की ओर से लगाए गए आरोप हैं; वीडियो डिलीट किए जाने और सबूतों से छेड़छाड़ की बात को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता.

7. हाईकोर्ट ने जमानत देते समय क्या कहा?

12 अक्टूबर को सामने आए विस्तृत आदेश के मुताबिक, न्यायमूर्ति प्रांजल दास ने कहा कि उपलब्ध जांच सामग्री और अब तक दर्ज गवाही से अमृतप्रभा के खिलाफ हत्या की साजिश का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं होता. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर उन्हें जमानत से वंचित रखना उचित नहीं होगा. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि यह टिप्पणी केवल जमानत पर विचार के लिए है. उनकी दोषिता या निर्दोषता का अंतिम फैसला ट्रायल में होगा.

8. जमानत के बाद सड़कों पर क्यों उतरे जुबीन के प्रशंसक?

अमृतप्रभा की रिहाई के बाद जुबीन के प्रशंसकों और परिवार के समर्थकों ने न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन किया. सोमवार को सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र में गरिमा सैकिया गर्ग के साथ प्रशंसक जुटे. प्रदर्शनकारियों ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. मोरीगांव में भी जुबीन के लिए न्याय की मांग को लेकर नारेबाजी की खबरें सामने आई हैं.

9. अखिल गोगोई ने क्या मांग की?

रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई ने अमृतप्रभा को जमानत दिए जाने पर सवाल उठाए और इसे गंभीर संकेत बताया. उन्होंने असम सरकार से जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की मांग की है. यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है; जमानत रद्द होगी या नहीं, इसका फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा.

10. बाकी छह आरोपी कौन हैं, आगे क्या होगा?

अमृतप्रभा की रिहाई के बाद भी छह आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. इनमें NEIF के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, उनके चचेरे भाई और निलंबित DSP संदीपन गर्ग, बैंड सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी तथा दो निजी सुरक्षा अधिकारी नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य शामिल हैं. सुरक्षा अधिकारियों को एक अलग आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन जुबीन की मौत के केस में वे जेल में हैं. मामले की सुनवाई विशेष फास्ट-ट्रैक सेशंस कोर्ट में जारी है.

जुबिन गर्ग
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