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सालेहा खातून और सरबानू बेगम- असम की ये दो महिला कौन? सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश भेजने पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित की गई दो महिलाओं- Saleha Khatun और Sarbhanu Begum के बांग्लादेश डिपोर्टेशन पर अंतरिम रोक लगा दी है.

सालेहा खातून और सरबानू बेगम- असम की ये दो महिला कौन? सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश भेजने पर लगाई रोक
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5 जून (शुक्रवार) को सुप्रीम कोर्ट ने असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा 'विदेशी नागरिक' घोषित की गई दो महिलाओं Saleha Khatun और Sarbhanu Begum के बांग्लादेश डिपोर्टेशन पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस फैसले के बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है.

अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए साफ किया कि अगली सुनवाई तक दोनों महिलाओं को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा. फिलहाल दोनों महिलाएं मार्च 2026 से असम के गोलपाड़ा डिटेंशन सेंटर में बंद हैं.

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें सालेहा खातून और सरबानू बेगम को भारतीय नागरिक न मानते हुए विदेशी घोषित कर दिया गया था. इस निर्णय के बाद प्रशासन ने उनके डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन दोनों महिलाओं ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति Vikram Nath और V. Mohana की वेकेशन बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, असम सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि जब तक इस मामले की अंतिम सुनवाई नहीं होती, तब तक दोनों महिलाओं के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी.

सालेहा खातून कौन?

50 वर्षीय सालेहा खातून खुद को असम की मूल निवासी और एक गरीब, अशिक्षित भारतीय नागरिक बताती हैं. उनका दावा है कि उनका परिवार कई दशकों से भारत में रह रहा है. नागरिकता साबित करने के लिए उन्होंने 1971 से पहले के माता-पिता के मतदाता रिकॉर्ड और एनआरसी (NRC) लीगेसी डेटा जैसे दस्तावेज भी अदालत में प्रस्तुत किए हैं. मार्च 2026 से वे गोलपाड़ा डिटेंशन सेंटर में बंद हैं और लगातार अपनी नागरिकता साबित करने की कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं.

सरबानू बेगम के बारे में...

Sarbhanu Begum भी इसी ट्रिब्यूनल फैसले से जुड़ी हुई हैं और उन्हें भी विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. वे इस पूरे मामले में सह-याचिकाकर्ता हैं और उनकी दलील भी दस्तावेजी प्रमाण और नागरिकता के दावों की वैधता पर आधारित है.

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले को पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था. इसके बाद दोनों महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है और फिलहाल डिपोर्टेशन पर रोक लगाकर राहत प्रदान की है.

अगली सुनवाई कब होगी?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 तय की है. तब तक यथास्थिति बनी रहेगी और दोनों महिलाओं को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा. यह मामला केवल दो व्यक्तियों की नागरिकता का विवाद नहीं है, बल्कि भारत की नागरिकता व्यवस्था, NRC प्रक्रिया और फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के निर्णयों की विश्वसनीयता जैसे बड़े सवालों को भी सामने लाता है. आने वाले समय में यह केस कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक बहसों का केंद्र बन सकता है.

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