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शालीनता पर ज्ञान देने की जरूरत नहीं, पवन खेड़ा को बेल मिलने पर; हिमंत और सिंघवी की तू-तू मै-मै

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और वरिष्ठ कांग्रेस नेता Abhishek Manu Singhvi के बीच बयानबाजी इतनी तेज हो गई है कि मामला अब सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है.

शालीनता पर ज्ञान देने की जरूरत नहीं, पवन खेड़ा को बेल मिलने पर; हिमंत और सिंघवी की तू-तू मै-मै
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( Image Source:  ANI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी3 Mins Read

Updated on: 1 May 2026 7:35 PM IST

असम की राजनीति एक बार फिर तनाव के केंद्र में है. मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और वरिष्ठ कांग्रेस नेता Abhishek Manu Singhvi के बीच बयानबाजी इतनी तेज हो गई है कि मामला अब सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है. इस पूरे विवाद की जड़ में कांग्रेस प्रवक्ता Pawan Khera से जुड़ा एक मामला बताया जा रहा है, जिसने राज्य की सियासत को गर्म कर दिया है.

सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह टकराव अब खुली राजनीतिक जंग का रूप ले चुका है. एक तरफ मुख्यमंत्री सरमा अपने बयानों को लेकर बेहद आक्रामक नजर आ रहे हैं, वहीं कांग्रेस खेमे से भी लगातार जवाबी हमले किए जा रहे हैं.

हिमंता बिस्वा सरमा ने सिंघवी पर क्या कहा?

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें किसी से भी लोकतंत्र, सार्वजनिक संवाद या शालीनता पर 'उपदेश' लेने की जरूरत नहीं है, खासकर अभिषेक मनु सिंघवी से. उन्होंने कहा कि शालीनता और सिंघवी का एक साथ होना संभव नहीं है और यह टिप्पणी सीधे तौर पर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई.

पूरा विवाद आखिर शुरू कहां से हुआ?

मुख्यमंत्री सरमा के मुताबिक, यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी का नहीं है, बल्कि एक निजी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने से जुड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक ऐसी महिला, जिनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है, उन्हें राष्ट्रीय टेलीविजन पर बदनाम किया गया. सरमा ने यह भी दावा किया कि इस दौरान 'विदेशी फर्जी दस्तावेजों' का इस्तेमाल कर चरित्र हनन करने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने गंभीर आरोप बताया.

मुख्यमंत्री ने अदालत को लेकर क्या कहा?

सरमा ने भरोसा जताया कि यह मामला जल्द ही अदालतों के सामने आएगा और न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे कानून के तहत सजा मिलेगी. उनके मुताबिक, यह सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.

सिंघवी पर क्या और आरोप लगाए गए?

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अभिषेक मनु सिंघवी ऐसे मंचों पर बयान देते हैं जहां सामने वाला जवाब नहीं दे सकता. उन्होंने इसे 'निष्पक्ष बहस से बचने की कोशिश' बताया. सरमा ने कहा कि वास्तविक बहस वही होती है जिसमें दोनों पक्ष मौजूद हों, न कि एकतरफा बयानबाजी. अपने बयान के अंत में हिमंता बिस्वा सरमा ने सख्त लहजे में कहा कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि 'यह सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं… सत्य की ही विजय होगी, सत्यमेव जयते.'

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?

यह पूरा विवाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़े एक मामले के बाद और गहरा गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में Supreme Court of India ने उन्हें अग्रिम जमानत दी थी. यह मामला कथित तौर पर मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़ी टिप्पणियों और उसके बाद उठे राजनीतिक विवादों से संबंधित बताया जा रहा है, जिसके बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई. इस पूरे घटनाक्रम ने असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है. दोनों पार्टियां लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं, जिससे राज्य की राजनीति में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है.

हिमंत बिस्वा सरमा
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