मुस्लिम बहुल नगांव में बीजेपी की जीत, कांग्रेस तीसरे नंबर पर; अखिल गोगोई बोले- गौरव को अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिए; 10 Points
नगांव लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की जीत और कांग्रेस के तीसरे स्थान पर आने के बाद रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई ने गौरव गोगोई के इस्तीफे की मांग की. अखिल ने दावा किया कि कांग्रेस का अल्पसंख्यक वोट शेयर 25 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत रह गया है.
गौरव गोगोई और अखिल गोगोई
Nagaon Bypoll Result 2026: असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव में बीजेपी की जीत और कांग्रेस के तीसरे स्थान पर खिसकने से राज्य की विपक्षी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस के पूर्व सहयोगी और रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने इस हार को असम की बीजेपी-विरोधी ताकतों के लिए बड़ा झटका बताया है. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की.
अखिल गोगोई का आरोप है कि कांग्रेस उस सीट पर भी अल्पसंख्यक मतदाताओं का समर्थन बनाए रखने में नाकाम रही, जहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 55 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का अल्पसंख्यक वोट शेयर 25 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत रह गया है.
बीजेपी के देवाशीष शर्मा ने दर्ज की जीत
नगांव उपचुनाव में बीजेपी के देवाशीष शर्मा ने जीत दर्ज की, जबकि AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल दूसरे और कांग्रेस के शिवामणि बोरा तीसरे स्थान पर रहे. इस नतीजे ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच उसके जनाधार को लेकर बहस तेज कर दी है.
नगांव उपचुनाव के बाद असम की राजनीति की 10 बड़ी बातें
- गौरव गोगोई के इस्तीफे की मांग, अखिल गोगोई का सीधा हमला: रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई ने नगांव में कांग्रेस की हार के लिए प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि गौरव गोगोई को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रह गया है. अखिल ने उनके तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए पार्टी में बुनियादी बदलाव की जरूरत बताई.
- मुस्लिम बहुल सीट पर कांग्रेस तीसरे स्थान पर: नगांव सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है. इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार शिवामणि बोरा बीजेपी के देवाशीष शर्मा और AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से पीछे रहे. यह नतीजा कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी लंबे समय से अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन को असम में अपने प्रमुख चुनावी आधारों में गिनती रही है.
- अखिल गोगोई का दावा - अल्पसंख्यक वोट शेयर 25 से 5 प्रतिशत हुआ: अखिल गोगोई ने ANI से बातचीत में दावा किया कि कांग्रेस का अल्पसंख्यक वोट शेयर 25 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत रह गया है. उन्होंने इसे पार्टी की रणनीति और नेतृत्व की विफलता से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक तौर-तरीकों पर दोबारा विचार करना चाहिए.
- बीजेपी की जीत, AIUDF दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर: नगांव उपचुनाव में बीजेपी के देवाशीष शर्मा ने जीत हासिल की. AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार शिवामणि बोरा तीसरे स्थान पर खिसक गए. इस परिणाम ने असम में विपक्षी मतों के बंटवारे और कांग्रेस के मुकाबले अन्य विपक्षी दलों की स्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.
- कांग्रेस और रायजोर दल का गठबंधन पहले ही टूट चुका था: असम कांग्रेस ने 3 सितंबर को अखिल गोगोई के नेतृत्व वाली रायजोर दल के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दिया था. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि रायजोर दल के नेताओं ने उसके नेताओं की लगातार आलोचना की और गठबंधन की सहमति का पालन नहीं किया. दूसरी ओर, अखिल गोगोई ने सीट बंटवारे के दौरान अपनी पार्टी को नजरअंदाज किए जाने और अपमानित किए जाने की शिकायत की थी.
- गठबंधन टूटने के बाद भी रायजोर दल ने नगांव से उम्मीदवार नहीं उतारा: अखिल गोगोई ने 15 सितंबर को घोषणा की थी कि रायजोर दल नगांव उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी. उन्होंने इसके पीछे सांप्रदायिक ताकतों को आगे बढ़ने से रोकने का व्यापक उद्देश्य बताया था. अखिल का कहना था कि उनकी पार्टी कांग्रेस का समर्थन करना पसंद करती, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद उसे साथ लेकर चलने की स्थिति नहीं बनी.
- रायजोर दल की शुरुआत CAA विरोधी आंदोलन के बाद हुई: अखिल गोगोई ने अक्टूबर 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ आंदोलनों की पृष्ठभूमि में रायजोर दल की स्थापना की थी. पार्टी ने असम की राजनीति में क्षेत्रीय मुद्दों और सरकार विरोधी आंदोलनों को आधार बनाकर अपनी पहचान बनाई. असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के दो विधायक हैं-अखिल गोगोई शिवसागर से और महबूब मुक्तार धिंग से प्रतिनिधित्व करते हैं.
- नगांव सीट पर उपचुनाव क्यों हुआ? नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी में शामिल होने और दिसपुर विधानसभा सीट जीतने के बाद खाली हुई थी. कांग्रेस ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में नगांव सीट जीती थी, इसलिए इसे राज्य में पार्टी के महत्वपूर्ण संसदीय गढ़ों में गिना जाता था. उपचुनाव में हार के बाद कांग्रेस के लिए इस सीट पर अपना प्रभाव बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है.
- असम विधानसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पर दबाव: अप्रैल 2026 के असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 126 में से 19 सीटें मिलीं, जबकि 2021 में पार्टी ने 29 सीटें जीती थीं. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 102 सीटें हासिल कीं. इस कमजोर प्रदर्शन के बाद नगांव में हार ने कांग्रेस के सामने संगठन, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल और गहरे कर दिए हैं.
- गौरव गोगोई के सामने दोहरी चुनौती-संगठन और घटता चुनावी आधार: नगांव के नतीजे के बाद गौरव गोगोई पर पार्टी के भीतर और बाहर से दबाव बढ़ सकता है. एक ओर अखिल गोगोई जैसे पूर्व सहयोगी नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को अल्पसंख्यक मतदाताओं सहित अपने परंपरागत समर्थक समूहों के बीच पकड़ बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. AIUDF का दूसरे स्थान पर आना भी कांग्रेस के लिए रणनीतिक सवाल खड़ा करता है कि असम में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी वोटों को एकजुट करने का रास्ता क्या होगा.
नगांव उपचुनाव का नतीजा असम में विपक्ष की स्थिति पर बहस को नया आधार देता है. हालांकि, एक सीट के परिणाम से पूरे राज्य में किसी समुदाय के वोटिंग व्यवहार के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा. कांग्रेस के लिए असली चुनौती अब यह समझना है कि नगांव में उसके उम्मीदवार के पीछे रहने के कारण क्या रहे और संगठन को मजबूत करने के लिए कौन-से राजनीतिक बदलाव जरूरी हैं. वहीं, गौरव गोगोई के नेतृत्व पर अखिल गोगोई का हमला इस चुनावी हार को कांग्रेस के भीतर और विपक्षी खेमे में नेतृत्व की बहस से जोड़ रहा है.z




