7 साल की उम्र में थामा रैकेट, अब जीता पहला World Tour खिताब; जानिए कोरिया मास्टर्स जीतने वाली Ashmita Chaliha की कहानी
असम की 26 साल की बैडमिंटन खिलाड़ी Ashmita Chaliha ने अपना पहला BWF World Tour खिताब जीत लिया है. कोरिया मास्टर्स 2026 के फाइनल में उन्होंने चीन की हान कियान शी को 14-21, 21-14, 21-14 से हराकर खिताब अपने नाम किया. घुटने की चोट के कारण अश्मिता तीन महीने तक कोर्ट से दूर रहीं थीं.
Who is Ashmita Chaliha: भारतीय बैडमिंटन के लिए यह लगातार दूसरा शानदार सप्ताह रहा है. अश्मिता चालिहा ने रविवार को कोरिया मास्टर्स 2026 के महिला एकल फाइनल में चीन की हान कियान शी को हराकर अपने करियर का पहला BWF World Tour खिताब जीत लिया.
असम की इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने फाइनल में शुरुआत में पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी की और मुकाबला 14-21, 21-14, 21-14 से अपने नाम किया, लेकिन अश्मिता की यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी की कहानी नहीं है. इसके पीछे चोट, लंबा ब्रेक, संघर्ष और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कहानी भी है.
फाइनल में पहले गेम में पिछड़ीं, फिर बदला पूरा मैच
- फाइनल में अश्मिता का सामना चीन की चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हान कियान शी से था, जो विश्व रैंकिंग में 35वें स्थान पर थीं. मुकाबले की शुरुआत भारतीय खिलाड़ी के लिए अच्छी नहीं रही.
- हान ने पहले गेम में लगातार दबाव बनाया और अश्मिता को अपनी लय हासिल करने का ज्यादा मौका नहीं दिया. अश्मिता पहला गेम 14-21 से हार गईं. इसके बाद मुकाबला पूरी तरह बदल गया.
- अश्मिता ने अपने आक्रामक खेल को और धार दी और रैलियों में तेजी लाते हुए हान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने 21-14 से जीत दर्ज कर मुकाबला बराबरी पर ला दिया. अब फैसला तीसरे गेम में होना था.
- तीसरे गेम की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. एक समय तक स्कोर बेहद करीबी रहा, लेकिन मध्यांतर के बाद अश्मिता ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी. उन्होंने लगातार शानदार विनर्स लगाए और हान की गलतियों का भी फायदा उठाया.
- अश्मिता ने 12-11 की बढ़त बनाने के बाद एक शानदार शॉट के जरिए बढ़त को आगे बढ़ाया और कुछ ही देर में 15-11 से आगे निकल गईं.
- इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. क्रॉस-कोर्ट विनर से स्कोर 19-14 हुआ और हान का अगला शॉट बाहर जाने के साथ ही मुकाबला खत्म हो गया.
- अश्मिता ने निर्णायक गेम 21-14 से जीतकर 53 मिनट में अपना पहला BWF World Tour खिताब हासिल कर लिया.
तीन महीने कोर्ट से दूर थीं अश्मिता
इस जीत को खास बनाने वाली सबसे बड़ी वजह उनका हालिया संघर्ष है. अश्मिता को दाहिने घुटने में चोट लगी थी, जिसके कारण उन्हें करीब तीन महीने तक प्रतियोगिताओं से दूर रहना पड़ा. उन्होंने मई में BWF Tour पर वापसी की. इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपनी फिटनेस और फॉर्म वापस हासिल की. मैकाउ ओपन में सेमीफाइनल तक पहुंचना भी उनके कमबैक का अहम पड़ाव रहा. अब कोरिया मास्टर्स का खिताब उनकी वापसी को एक बड़ी उपलब्धि में बदल चुका है.
कौन हैं अश्मिता चालिहा?
- अश्मिता चालिहा असम के गुवाहाटी से आने वाली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं. उनका जन्म 18 अक्टूबर 1999 को हुआ. वह बाएं हाथ से खेलती हैं और अपने आक्रामक स्ट्रोक्स तथा तेज खेल के लिए जानी जाती हैं.
- अश्मिता के परिवार में भी खेल का माहौल रहा है. उनके पिता ध्रुव ज्योति चालिहा पूर्व टेनिस खिलाड़ी रहे हैं. उनकी बड़ी बहन हर्षिता चालिहा भी राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल चुकी हैं, लेकिन टखने की गंभीर चोट के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा.
- अश्मिता ने महज 7 साल की उम्र में बैडमिंटन रैकेट थामा था. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में बैडमिंटन उनका सपना नहीं था. गुवाहाटी में SAI का कनकलता इंडोर स्टेडियम उनके घर के करीब था. इसलिए उनके पिता ने उन्हें वहां ट्रेनिंग के लिए भेज दिया.
- शुरुआत में अश्मिता को ट्रेनिंग करना खास पसंद नहीं था. वह घर पर रहना, अपने पालतू कुत्तों के साथ खेलना और वीडियो गेम्स खेलना ज्यादा पसंद करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे खेल के प्रति उनका नजरिया बदला और उन्होंने बैडमिंटन को गंभीरता से लेना शुरू किया.
- अश्मिता ने गुवाहाटी की असम बैडमिंटन अकादमी से अपने खेल को आगे बढ़ाया. शुरुआती दौर में कोच सुरंजन भोबोरा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके बाएं हाथ के आक्रामक खेल को निखारने में मदद की. इसके बाद 2017 में इंडोनेशिया के अनुभवी कोच एडविन इरियावान असम बैडमिंटन अकादमी से जुड़े.
- एडविन इससे पहले भारतीय स्टार साइना नेहवाल के साथ भी काम कर चुके थे. उनके मार्गदर्शन में अश्मिता की स्टैमिना, कोर्ट मूवमेंट और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्ट्रोक्स पर काम हुआ. यही ट्रेनिंग आगे चलकर उनकी खेल शैली की बड़ी ताकत बनी.
- कोरिया मास्टर्स 2026 भले ही अश्मिता का पहला BWF World Tour खिताब है, लेकिन यह उनकी पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है. उन्होंने 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में महिला एकल और टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था.
- इसके अलावा, वह 2024 एशियाई टीम चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रही हैं. अब World Tour का पहला खिताब उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ चुका है.
भारत की महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों का शानदार दौर
अश्मिता की जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले ही तन्वी शर्मा ने Taipei Open का महिला एकल खिताब जीता था. यानी भारतीय महिला खिलाड़ियों ने लगातार दो सप्ताह BWF World Tour पर महिला एकल के खिताब अपने नाम किए हैं. अश्मिता फिलहाल विश्व रैंकिंग में 50वें स्थान के आसपास हैं. गुवाहाटी स्थित National Centre of Excellence में पार्क ताए-सांग के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग करती हैं.
हिमंता बिस्वा सरमा ने दी बधाई
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी अश्मिता को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी. उन्होंने अश्मिता को असम की अपनी बेटी और भारत की उभरती हुई बैडमिंटन स्टार बताते हुए कहा कि भारत आने वाले वर्षों में बैडमिंटन कोर्ट पर दबदबा बनाएगा.
अश्मिता के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने चोट के बाद वापसी करके इसे हासिल किया है. ऐसे में कोरिया मास्टर्स का खिताब उनके लिए सिर्फ पहला World Tour खिताब नहीं, बल्कि मुश्किल दौर से निकलकर खुद को फिर साबित करने की कहानी भी है.




