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4 साल की उम्र में थामा बल्ला, 15 में पहन ली टीम इंडिया की जर्सी; वैभव सूर्यवंशी का समस्तीपुर से लेकर इंटरनेशनल डेब्यू तक का सफर

बिहार के समस्तीपुर के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय लिख दिया है. इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मैच में डेब्यू करते ही वह भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए. आइए जानते हैं उनके अब तक के सफर के बारे में...

vaibhav sooryavanshi success story
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वैभव सूर्यवंशी  

Chase your dreams, they do come true... महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की यह लाइन अब बिहार के समस्तीपुर के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर बिल्कुल फिट बैठती है. इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर जैसे ही वैभव ने टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी, भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया.

सिर्फ 15 साल की उम्र में वैभव भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए. उन्होंने सचिन तेंदुलकर का करीब 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. यह सिर्फ एक डेब्यू नहीं था, बल्कि उस बच्चे के सपनों की जीत थी जिसने गांव की गलियों और घर के पीछे बने छोटे से नेट से अपनी शुरुआत की थी.

4 साल की उम्र में दिखा था क्रिकेट का हुनर

वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव में हुआ. यह वही साल था जब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने वनडे विश्व कप जीता था. वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी किसान हैं. उन्होंने सबसे पहले अपने बेटे की प्रतिभा तब पहचानी जब महज चार साल का वैभव प्लास्टिक की गेंद को जोरदार शॉट मारने लगा. इसके बाद पिता रोज खेत से लौटकर बेटे को घंटों गेंदबाजी कराते थे. इतना ही नहीं, उन्होंने घर के पीछे छोटा-सा प्रैक्टिस एरिया भी तैयार कराया ताकि बेटा रोज अभ्यास कर सके.

12 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू

वैभव ने जनवरी 2024 में सिर्फ 12 साल की उम्र में बिहार के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. वह रणजी ट्रॉफी खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हो गए. इसके बाद उन्होंने ACC अंडर-19 एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और पांच मैचों में 176 रन बनाए. फिर चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यूथ टेस्ट में सिर्फ 58 गेंदों में शतक लगाकर उन्होंने साफ कर दिया कि भारत को नया स्टार मिल चुका है.

13 साल में IPL कॉन्ट्रैक्ट, 14 में शतक

वैभव के शानदार प्रदर्शन का इनाम उन्हें IPL में मिला. महज 13 साल की उम्र में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा. वह IPL इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट मिला. 14 साल 23 दिन की उम्र में उन्होंने IPL डेब्यू किया और पहली ही गेंद पर शार्दुल ठाकुर को छक्का जड़कर सबको चौंका दिया. सिर्फ नौ दिन बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ उन्होंने 35 गेंदों में शतक ठोक दिया और IPL इतिहास के सबसे कम उम्र के शतकवीर बन गए.

IPL 2026 ने बदल दी किस्मत

2026 का IPL सीजन वैभव के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. उन्होंने 16 मैचों में 776 रन बनाए, 72 छक्के लगाए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने. इतना ही नहीं, उन्होंने एक साथ 5 बड़े अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया- ऑरेंज कैप, मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (MVP), इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन, सुपर स्ट्राइकर ऑफ सीजन और सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवार्ड. ऐसा करने वाले वह IPL इतिहास के पहले खिलाड़ी बने.

अंडर-19 और इंडिया A में भी मचाया धमाल

IPL से पहले ही वैभव अंतरराष्ट्रीय जूनियर क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके थे. उन्होंने अंडर-19 विश्व कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन ठोककर भारत को चैंपियन बनाया. पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया. इसके बाद इंडिया A की ट्राई सीरीज में उन्होंने 211 रन बनाए. फाइनल में 29 गेंदों पर 94 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को ट्रॉफी दिलाई.

रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त

वैभव सूर्यवंशी के नाम कम उम्र में ही कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं, जिसमें शामिल हैं;

  • भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
  • 12 साल में रणजी ट्रॉफी डेब्यू
  • IPL इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी
  • IPL के सबसे युवा शतकवीर
  • एक सीजन में 72 छक्के लगाकर नया रिकॉर्ड
  • IPL में ऑरेंज कैप, MVP और Emerging Player एक साथ जीतने वाले पहले खिलाड़ी
  • इंडिया अंडर-19 के लिए सबसे ज्यादा रन
  • यूथ ODI में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट (165.18)
  • अंडर-19 क्रिकेट में चार शतक

पिता की मेहनत बनी बेटे की सबसे बड़ी ताकत

वैभव की सफलता के पीछे उनके पिता संजीव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी भूमिका रही. समस्तीपुर से पटना तक करीब 90 किलोमीटर का सफर तय कर वह बेटे को नियमित अभ्यास के लिए ले जाते थे. कभी आर्थिक मुश्किलों को बहाना नहीं बनने दिया. आज उसी मेहनत का नतीजा है कि गांव का एक लड़का भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी जर्सी पहन चुका है.

अब असली चुनौती शुरू

15 साल की उम्र में टीम इंडिया तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं है, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि असली परीक्षा अब शुरू होगी. अगर वैभव अपनी मेहनत और निरंतरता बनाए रखते हैं तो आने वाले वर्षों में वह भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं.

क्रिकेट न्‍यूजस्टेट मिरर स्पेशल
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