गुफा में लेनी पड़ी शरण-विष्णु बने मोहिनी... भस्मासुर को वरदान देकर ऐसे फंसे महादेव, पढ़ें रोचक पौराणिक कथा
कहत हैं सावन के महीने में भगवान शिव की अराधना करने से मनोकामना पूरी होती है. ऐसी ही एक पौराणक कथा है जब भगवान ने भस्मासुर को वरदान दिया था और खुद गुफा में फंस गए थे. इस दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर लिया था.
सावन का पवित्र महीना चल रहा है, जिसमें शिवभक्त अपने आराध्य भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना हर दिन बड़े ही भक्ति भाव से करते हैं. भगवान शिव जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं, इसलिए इन्हें भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान दे देते हैं.
देव, दानव, मानव या कोई भी साधक यदि सच्चे मन से उनकी आराधना करे तो महादेव उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं. लेकिन कई बार उनकी यही सरलता उन्हें कठिन परिस्थिति में भी डाल देती है. पुराणों में वर्णित भस्मासुर की कथा इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण मानी जाती है. आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन-सा प्रसंग था, जब स्वयं भगवान शिव को अपने ही दिए हुए वरदान के कारण गुफा में छिपना पड़ा.
भस्मासुर ने की कठोर तपस्या और मांगा वरदान
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भस्मासुर नाम का एक बलशाली असुर था. उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया और वर्षों तक कठोर तपस्या की. उसकी कठिन साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा. भस्मासुर ने सबसे पहले अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन भगवान शिव ने बताया कि जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी की मृत्यु निश्चित है, इसलिए अमरत्व देना सृष्टि के नियमों के विरुद्ध है. इसके बाद भस्मासुर ने दूसरा वरदान मांगा कि वह जिसके सिर पर अपना हाथ रखे, वह तत्काल भस्म हो जाए. भोलेनाथ ने उसे यह वरदान दे दिया.
शिवजी पर ही आजमाने लगा वरदान
वरदान मिलते ही भस्मासुर के मन में अहंकार आ गया. उसने सोचा कि यदि भगवान शिव पर ही इस वरदान की परीक्षा कर ली जाए, तो वह संसार में सबसे अधिक शक्तिशाली बन जाएगा. वह महादेव के पीछे दौड़ पड़ा और उनके सिर पर हाथ रखने का प्रयास करने लगा. चूंकि शिव अपने दिए हुए वरदान को वापस नहीं ले सकते थे, इसलिए उन्हें वहां से निकलकर अपनी रक्षा करनी पड़ी. कहा जाता है कि इस दौरान भगवान शिव ने एक गुफा में शरण ली और फिर भगवान विष्णु से सहायता मांगी.
भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया
भगवान शिव की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का मोहक रूप धारण किया. मोहिनी का अनुपम सौंदर्य देखकर भस्मासुर मोहित हो गया और शिव का पीछा करना भूल गया. उसने मोहिनी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा. मोहिनी ने मुस्कुराकर कहा कि वह केवल उसी पुरुष से विवाह करेगी, जो उसके समान सुंदर नृत्य कर सके. भस्मासुर ने यह चुनौती स्वीकार कर ली और मोहिनी के हर नृत्य की नकल करने लगा.
अपने ही वरदान से हुआ भस्म
नृत्य करते-करते मोहिनी ने धीरे से अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया. भस्मासुर भी बिना सोचे-समझे उसी मुद्रा की नकल करने लगा. जैसे ही उसने अपना हाथ अपने सिर पर रखा, भगवान शिव के दिए हुए वरदान का प्रभाव उसी पर पड़ गया और वह तत्काल भस्म होकर नष्ट हो गया. इस प्रकार भगवान विष्णु की लीला से भस्मासुर का अंत हुआ और भगवान शिव संकट से मुक्त हुए.




