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Shiv Barat: कैसे निकली थी शिव बारात, कौन-कौन हुआ था शामिल, दूल्हा बन ऐसा था महादेव का स्वरूप

राहुल गांधी ने अपने विरोध को शिव की बारात बताया. महादेव की बारात दुनिया में सबसे अलग थी, क्योंकि इसमें भूत-प्रेत भी शामिल थे.

Shiv Barat: कैसे निकली थी शिव बारात, कौन-कौन हुआ था शामिल, दूल्हा बन ऐसा था महादेव का स्वरूप
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( Image Source:  META AI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत6 Mins Read

Updated on: 12 Oct 2026 4:13 PM IST

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन को शिव का तांडव कहा है. उन्होंने कहा कि जैसे शिव की बारात में कोई भी शामिल हुआ था, वैसे ही इस प्रदर्शन में कोई भी आ सकता है. हमारी कोई प्लानिंग नहीं है. आज यहां है, कल कहीं और होंगे. हम सोच-समझकर प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं. ऐसे में ख्याल आता है कि आखिर शिव की बारात क्यों अनोखी थी.

दरअसल, इस बारात में एक तरफ देवता अपने सुंदर रथों और वाहनों पर सवार हैं, तो दूसरी तरफ भूत-प्रेत और अजीब रूप वाले शिवगण नाचते-गाते आगे बढ़ रहे हैं. सबसे आगे दूल्हा बनकर चल रहे हैं महादेव, जिनके शरीर पर भस्म, गले में सर्प और हाथों में त्रिशूल-डमरू है. रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने शिव-पार्वती विवाह के इस प्रसंग को बेहद रोचक ढंग से बताया है.

किसे दिया सबसे पहले निमंत्रण?

कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का शुभ समय तय होने के बाद निमंत्रण देने की तैयारी हुई. सबसे पहले ब्रह्मा जी को विवाह की सूचना पहुंचाई गई. यह खबर सुनकर वे प्रसन्न हो गए. इसके बाद उन्होंने देवताओं और ऋषि-मुनियों को एक जगह बुलाया और सभी को महादेव के विवाह का संदेश दिया. निमंत्रण सुनते ही वहां खुशी का माहौल बन गया. देवताओं की ओर से फूल बरसाए गए और मंगल ध्वनि गूंजने लगी. इसके बाद सभी अपने-अपने वाहनों को सजाकर बारात में शामिल होने के लिए तैयार हो गए.

महादेव का स्वरूप

बारात निकलने से पहले शिवगणों ने भगवान शिव को दूल्हे के रूप में सजाया. उनकी जटाओं को मुकुट जैसा रूप दिया गया. शरीर पर भस्म लगाई गई और गले में सर्प सुशोभित हुए. उन्होंने बाघ की खाल धारण की और हाथों में त्रिशूल व डमरू ले लिया. इसके बाद महादेव अपने वाहन नंदी पर सवार होकर चल पड़े. उनका रूप आम दूल्हों से बिल्कुल अलग था. दूसरी ओर, देवता अपने सुंदर रथों और वाहनों पर सवार होकर बारात में शामिल हो रहे थे. कुछ देवताओं को चिंता भी हुई कि महादेव के इस अनोखे रूप को देखकर नगर के लोग क्या सोचेंगे. वे आपस में चर्चा करने लगे कि कहीं इस बारात में उनकी सुंदर छवि पर भी सवाल न उठने लगें.

कौन-कौन हुआ बारात में शामिल?

जब शिव बारात की बात आती है, तो उसमें शामिल गणों का वर्णन सबसे खास माना जाता है. कथा में बताया गया है कि महादेव के गणों के रूप एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे. किसी के कई चेहरे थे, तो किसी के शरीर पर बहुत सारी भुजाएं थीं. कोई बिना पैरों के दिखाई देता था, तो किसी की कई आंखें थीं. कुछ गणों के शरीर दुबले-पतले थे, जबकि कुछ का आकार बेहद विशाल था. भूत, प्रेत, पिशाच और योगियों की टोली भी बारात में शामिल हो गई. सभी अपने-अपने ढंग से नाचते, गाते और विचित्र आवाजें निकालते हुए आगे बढ़ रहे थे. इस अनोखे नजारे ने शिव बारात को बाकी सभी बारातों से अलग बना दिया.

बारात देखकर क्या हुआ?

उधर, हिमवान ने अपनी नगरी को विवाह के लिए खूबसूरती से सजाया था. जगह-जगह सजावट की गई थी और मेहमानों के स्वागत की तैयारियां थीं. जब शिव बारात नगर के पास पहुंची, तो लोग उसे देखने के लिए घरों से बाहर निकल आए. लेकिन शिवगणों का विचित्र रूप देखकर कई लोग घबरा गए. कुछ बच्चे डरकर घरों में चले गए, तो कई लोग हैरानी से बारात को देखते रह गए. महिलाओं ने भी महादेव का रूप देखकर चिंता जताई. उन्हें लगा कि सुंदर माता पार्वती के लिए ऐसा वर कैसे चुना गया.

माता मैनावती क्यों हुई दुखी?

जब माता पार्वती की मां मैनावती ने लोगों की बातें सुनीं, तो वे भी परेशान हो गईं. उन्होंने पार्वती को अपने पास बैठाया और दुख जताया कि उन्होंने बेटी के लिए कुछ और सोचा था. इस पर माता पार्वती ने उन्हें समझाया कि भाग्य में जो लिखा है, उसे बदलना आसान नहीं. तभी नारद जी ने भी वहां पहुंचकर शिव के वास्तविक स्वरूप और उनकी महिमा के बारे में बताया. उन्होंने समझाया कि महादेव को केवल उनके बाहरी रूप से नहीं परखना चाहिए. उनकी बात सुनकर माता मैना की चिंता धीरे-धीरे दूर हुई.

विधि-विधान से संपन्न हुआ विवाह

इसके बाद विवाह की रस्में शुरू हुईं. नगर में भोजन की व्यवस्था की गई और मंगल गीत गाए जाने लगे. कथा के अनुसार, विवाह के समय महिलाओं ने हंसी-मजाक में बारातियों को पारंपरिक गालियां भी सुनाईं, जिन्हें सुनकर देवता आनंदित हुए. फिर ऋषि-मुनियों के मार्गदर्शन में गणेश जी की पूजा हुई. हिमवान ने माता पार्वती का हाथ भगवान शिव को सौंपा और महादेव ने उनका हाथ थामकर विवाह की रस्म पूरी की. यह देखकर सभी देवता खुशी से झूम उठे और जय-जयकार करने लगे. इस तरह भूत-प्रेत, शिवगणों और देवताओं से सजी अनोखी बारात के बाद शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ.

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