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परशुराम जयंती 2026: जानिए क्यों भगवान परशुराम ने किया अपनी माता और भाइयों का वध

परशुराम जयंती के मौके पर भगवान परशुराम से जुड़ी कई कथाएं चर्चा में रहती हैं, जिनमें उनकी माता और भाइयों के वध की कहानी सबसे ज्यादा चौंकाने वाली मानी जाती है. यह घटना आज्ञा पालन, धर्म और कठोर निर्णयों से जुड़ी है, जिसे समझना बेहद जरूरी है.

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परशुराम ने क्यों किया था अपनी माता का वध

( Image Source:  AI SORA )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 8 April 2026 6:30 AM IST

भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था, जो स्वयं में अत्यंत शुभ और पुण्यदायक तिथि मानी जाती है. इस वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7:26 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी.

परशुराम जयंती का महत्व

हर वर्ष वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को परशुराम जयंती मनाई जाती है, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य कभी नष्ट नहीं होता. इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ, इसलिए उनकी शक्ति और तेज भी अक्षय माने जाते हैं.

कौन हैं भगवान परशुराम

भगवान परशुराम का जन्म भार्गव वंश में हुआ था. उनके पिता महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका थीं. यद्यपि वे ब्राह्मण कुल में जन्मे थे, लेकिन उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ शस्त्र उठाए और धर्म की रक्षा की. उनका जीवन साहस, पराक्रम और न्याय का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान परशुराम को अमर माना गया है. उनका नाम उन आठ चिरंजीवियों में लिया जाता है, जिनमें महर्षि वेदव्यास, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और ऋषि मार्कंडेय शामिल हैं. कहा जाता है कि उनके क्रोध से देवता भी भयभीत हो जाते थे. एक कथा के अनुसार उन्होंने क्रोध में आकर भगवान गणेश का एक दांत भी तोड़ दिया था.

क्यों किया माता और भाइयों का वध?

भगवान परशुराम अपने माता-पिता के अत्यंत आज्ञाकारी पुत्र थे. एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक दिन उनकी माता रेणुका नदी से जल लेने गईं. वहां उन्होंने गंधर्वराज चित्ररथ को अप्सराओं के साथ जल क्रीड़ा करते देखा और कुछ समय के लिए वहीं ठहर गईं. इस दौरान उनके मन में क्षणिक विकार उत्पन्न हुआ. जब वे घर लौटीं, तब तक हवन का समय हो चुका था. महर्षि जमदग्नि ने अपने तपोबल से इस बात को जान लिया और इसे गंभीर दोष माना. उन्होंने अपने बड़े पुत्रों को आदेश दिया कि वे अपनी माता का वध कर दें, लेकिन किसी ने भी इस कठोर आज्ञा का पालन नहीं किया. तब उन्होंने परशुराम को आदेश दिया कि वे अपनी माता और उन भाइयों का वध करें जिन्होंने आज्ञा का पालन नहीं किया. परशुराम ने बिना किसी संकोच के अपने पिता की आज्ञा का पालन किया और अपनी माता तथा भाइयों का वध कर दिया.

फिर कैसे जीवित हुए?

परशुराम की पितृभक्ति से प्रसन्न होकर महर्षि जमदग्नि ने उन्हें वरदान मांगने को कहा. परशुराम ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए अपनी माता और भाइयों को पुनर्जीवित करने का वर मांगा. साथ ही उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि उन्हें इस घटना की कोई स्मृति न रहे. महर्षि जमदग्नि के तपोबल से उनकी माता और भाई पुनः जीवित हो गए, जैसे वे गहरी नींद से जागे हों. इस प्रकार यह घटना परशुराम की आज्ञाकारिता, बुद्धिमत्ता और धर्म के प्रति समर्पण को दर्शाती है.

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