22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी, भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की होती है पूजा, जानें महत्व और विधि
हिंदू धर्म में पापांकुशा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने पर पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जानिए पूजा विधि और पौराणिक कथा.
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विधान है. आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की आराधना करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी का महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा.
पापांकुशा एकादशी का महत्व
सनातन धर्म में सभी एकादशी तिथियों को भगवान विष्णु की उपासना के लिए शुभ माना गया है. मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पाने का अवसर मिलता है. इस दिन व्रत, पूजा-पाठ और भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन की शुद्धि होती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का पुण्य एक हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ सूर्य यज्ञ करने के समान बताया गया है. इस दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ दान-पुण्य करना भी विशेष फलदायी माना जाता है. पद्म पुराण में इस तिथि पर स्वर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करने का महत्व बताया गया है. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए दान से पुण्य की प्राप्ति होती है.
पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि
पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने का विधान है. इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण और भजन-कीर्तन करना भी पुण्यदायी माना जाता है.
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- भगवान को पीला चंदन, अक्षत, फल, फूल और तुलसी दल अर्पित करें.
- धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें.
- पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें.
- पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा सुनें और भगवान विष्णु का ध्यान करें.
- अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें.




