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महाअष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, अधूरी रह सकती है पूजा! जानें सही नियम

महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है. ऐसे में इस पर्व पर कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए. अष्टमी के दिन पूर्व दिशा में ही पूजा करें. इसके अलावा, कन्या पूजन से पहले व्रत न खोलें.

महाअष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, अधूरी रह सकती है पूजा! जानें सही नियम
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( Image Source:  META AI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 17 Oct 2026 11:00 AM IST

शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन यानी महाअष्टमी पर मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है. इस दिन भक्त मां का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं और कन्या पूजन करते हैं. साल 2026 में महाअष्टमी 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा-पाठ के साथ कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना भी अहम माना जाता है, ताकि पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से की जा सके.

अगर आप भी महाअष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन करने वाले हैं, तो कुछ बातों को नजरअंदाज करने से बचें. पूजा के बाद हवन करना, कन्या पूजन के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना और व्रत खोलने के सही समय का ख्याल रखना जरूरी माना जाता है.

कब है महाअष्टमी 2026?

पंचांग के मुताबिक, अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे होगी. यह तिथि अगले दिन यानी 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी. उदया तिथि को मानते हुए महाअष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करेंगे और परंपरा के अनुसार कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेंगे.

अष्टमी के दिन न करें ये गलतियां

महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा की आराधना करने के बाद हवन करना भी शुभ माना जाता है. इस दौरान भक्त मंत्रों का उच्चारण करते हुए आहुति देते हैं और परिवार की खुशहाली व सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. मान्यता है कि हवन से पूजा संपन्न होती है. हालांकि, इसे करने का तरीका अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार बदल सकता है.

पूजा करते समय दिशा का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, महाअष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा करते समय बैठने की दिशा का भी खास महत्व होता है. कहा जाता है कि पूजा के दौरान भक्तों को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए. वहीं, कन्या पूजन के लिए साफ जगह चुनें और बच्चियों को आदर के साथ बैठाकर पूजा करें. कुछ धार्मिक परंपराओं में कन्याओं को उत्तर दिशा की ओर बैठाने की बात भी कही गई है.

कन्या पूजन से पहले व्रत न खोलें

महाअष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है. इस दिन भक्त छोटी बच्चियों को घर बुलाकर उनका आदर-सत्कार करते हैं, उनके माथे पर तिलक लगाते हैं और श्रद्धापूर्वक भोजन कराते हैं. इसके बाद कन्याओं को भेंट या दक्षिणा देकर सम्मान के साथ विदा किया जाता है. कई घरों में इस रस्म के पूरा होने के बाद ही व्रत खोला जाता है. हालांकि, व्रत के पारण का समय और तरीका परिवार की परंपरा व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

कन्या पूजन में न करें ये गलतियां

कन्या पूजन के दौरान बच्चियों के बैठने और भोजन करने के लिए साफ जगह पर बैठाए. कन्याओं के साथ प्यार से बात करें. रस्म निभाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि किसी भी बच्ची को परेशानी या असहजता न हो.

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