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धनतेरस पर झाड़ू खरीदना कितना जरूरी, गलत दिशा में रखना पड़ सकता है भारी, सुमिताचार्य की बातों से बढ़ेगी बरकत

दिवाली से पहले घर की सफाई और सजावट का सिलसिला शुरू हो जाता है. धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि झाड़ू का संबंध मां लक्ष्मी से है. लेकिन इसे घर में किस दिशा में रखना चाहिए? सुमिताचार्य से जानिए झाड़ू से जुड़े नियम.

धनतेरस पर झाड़ू खरीदना कितना जरूरी, गलत दिशा में रखना पड़ सकता है भारी, सुमिताचार्य की बातों से बढ़ेगी बरकत
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( Image Source:  Image Source: Chat GPT )

दीवाली का त्योहार आने ही वाला है, ऐसे में सभी लोग अपने घर की साफ-सफाई करते है, मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए लोग कई दिनों पहले से तैयारी करने लगते है, इस तैयारी में सबसे ज्यादा सहयोग देती है झाड़ू, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी झाड़ू को अगर सही दिशा में नहींम रखा जाएं तो इसके नुकसान भी होते हैं. आईए जानते हैं धनतेरस के दिन क्यों खरीदी जाती है झाड़ू और किसे हमें किस तरह और किस दिशा में रखना चाहिए.

स्टेट मिरर से बात करते हुए सुमिताचार्या ने बताया कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदना शुभ माना गया है. झाड़ू के हमेशा पश्चिम दिश में रखना चाहिए और कभी भी खड़ी करके नहीं रखना चाहिए. इस हमेशा लिटाकर रखना चाहिए. जहां झाड़ू को पूरब दिशा में रखा जाता है, वहां पर अक्सर सास- बहू के बाच कलेश होंगे. यहां तक की इसे दक्षिण दिशा की ओर और उत्तर दिशा में रखना भी शुभ नहीं है. कई घरों में दीवाली के दिन झाड़ू की पूजा भी की जाती है क्योंकि यह हमारे घर की गंदगी को बाहर निकालती है.

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झाड़ू से रिश्ते टूटने का कनेक्शन?

सुमिताचार्या ने बताया कि झाड़ू को हमेशा पूरब से पश्चिम की ओर रखना चाहिए. जिनम घरों में झाड़ू को खड़ा करके रखा जाता है उस परिवार में रिश्ते टूटते हैं. झाड़ू को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है, जो घर से दरिद्रता को दूर कर सुख-समृद्धि लाती है.

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कहां से आई झाड़ू?

आज से 16 से 18 लाख सालों पहले आदिमानव काल में झाड़ू आई थी. उस समय मानव के पास पूंछ होती थी क्योंकि वो कपी रूप में था. जब इनकी पूछ खत्म हो गई जो कुत्ते की साफ करने की प्रवृति को देखकर वह जानवरों के बाल से झाड़ू बनाने लगे. इसके बाद जंगली घांस से भी झाड़ू बनाई गई. हिंदू धर्म में देवी माता शीतला के हाथ में झाड़ू को दर्शाया गया है. संस्कृत में झाड़ू को सम्मार्जनी कहते हैं.

प्राचीन कालीन भारतीय इतिहास में जैन मुनियों के पास चंवर होने का वर्णन मिलता है. मनुस्मृति में पंचपाप संबंधी श्र्लोक में भी झाड़ू का उल्लेख किया गया है. अग्नि पुराण के 77वें अध्याय में भी चूल्हा, चक्की के साथ झाड़ू को व्यवस्थित रखने की बात कही गई है. यूपी के संभल जिले में बहजोई शिव मंदिर में शिवरात्रि पर्व पर झाड़ू चढ़ाने की परंपरा है. बिहार के गया में विष्णु पद मंदिर में जिस झाड़ू से सफाई की जाती है, भक्त उसे अपने माथे पर लगाते हैं.

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