क्या है सालों पुराना ‘मेडिकेटेड स्मोकिंग’? सिर दर्द से लेकर बंद नाक तक से दिलाता है राहत
आयुर्वेद का सदियों पुराना ‘मेडिकेटेड स्मोकिंग’ इन दिनों फिर चर्चा में है. इसमें औषधीय चीजों से बने धुएं का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पारंपरिक रूप से बंद नाक, कफ और सिर से जुड़ी दिक्कतों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.
आयुर्वेद में सेहत से जुड़े कई मेथड बताए गए हैं, जिनमें कुछ तरीके आज भी लोगों को हैरान करते हैं. ऐसा ही एक तरीका इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसे आयुर्वेदिक धूमपान कहा जाता है. इसका नाम सुनकर आपको सिगरेट या बीड़ी का ख्याल आ सकता है, लेकिन आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाला यह तरीका तंबाकू वाले धूम्रपान से अलग बताया जाता है.
इसमें तंबाकू की जगह कुछ खास औषधीय चीजों से तैयार चीजों के धुएं का इस्तेमाल किया जाता है. धूमपान का इस्तेमाल नाक बंद होने, कफ और सिर से जुड़ी कुछ परेशानियों में किया जाता रहा है. हालांकि, इसे खुद से आजमाने के बजाय किसी एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है.
शेनाज ट्रेजरी ने क्या दिखाया?
शेनाज हाल ही में केरल के एक आयुर्वेदिक सेंटर गई थीं. वहीं उन्होंने धूमपान की इस प्रक्रिया का एक्सपीरियंस लिया. उन्होंने अपने वीडियो के जरिए लोगों को बताया कि आयुर्वेद में दवाओं से बने धुएं का इस्तेमाल भी कुछ कंडीशन में किया जाता है. वीडियो में शेनाज ने डॉक्टर से इसके बारे में जानकारी ली. डॉक्टर ने इसे इंद्रियों को बेहतर महसूस कराने, नाक में जमा रुकावट को कम करने और दिमाग को आराम देने से जुड़ा बताया.
आयुर्वेदिक धूमपान क्या होता है?
आयुर्वेदिक धूमपान एक पुराना आयुर्वेदिक प्रोसेस है. इसमें सिगरेट की तरह तंबाकू नहीं जलाया जाता. इसके बजाय कुछ खास औषधीय चीजों से तैयार चीजों को जलाकर उससे निकलने वाले धुएं का इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेदिक सोर्स में इसके लिए हल्दी, गुग्गुल, नीम और घी जैसी चीजों का इस्तेमाल किए जाने का जिक्र है. हालांकि, कौन-सी चीज इस्तेमाल होगी, यह व्यक्ति की जरूरत और समस्या के आधार पर अलग हो सकती है.
धूमपान क्यों किया जाता है?
आयुर्वेद में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मुख्य रूप से नाक, गले और सिर से जुड़ी कुछ परेशानियों में किया जाता रहा है. इसे नाक में जमा बलगम और रुकावट कम करने में मददगार माना जाता है. कुछ आयुर्वेदिक तरीकों में नाक में दवा की बूंदें डालने के बाद भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसका मकसद नाक और गले के रास्ते को साफ रखने तथा जमा कफ को कम करना बताया जाता है.
क्या इसे सिगरेट समझना सही है?
बिल्कुल नहीं. आयुर्वेदिक धूमपान और तंबाकू वाला धूम्रपान एक जैसी चीजें नहीं हैं. फिर भी किसी भी तरह के धुएं को शरीर के अंदर लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है. इसे खुद से आजमाना सही नहीं माना जाना चाहिए.
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है. किसी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.




