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पीएम मोदी ने चखी झालमुरी, जानिए किसने बनाई ये देसी चटपटी डिश, कोलकाता से कैसे पहुंची बांग्लादेश

पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता की मशहूर झालमुरी खाई. कोलकाता में बिहार से आए मजदूरों को मुरमुरों की यह डिश इजात करने का श्रेय दिया जाता है.

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किसने बनाई झालमुरी देसी चटपटी डिश

( Image Source:  x-@narendramodi and @flavoursbymounika )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 20 April 2026 7:19 PM IST

पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कोलकाता की मशहूर स्ट्रीट फूड झालमुरी का स्वाद चखा, तो एक बार फिर यह देसी नाश्ता चर्चा में आ गया. हल्के-फुल्के मुरमुरे, सरसों के तेल की खुशबू और मसालों के तीखे स्वाद से बनी झालमुरी लंबे समय से बंगाल की पहचान रही है.

झालमुरी की शुरुआत कोलकाता में मानी जाती है, जहां बिहार से आए मजदूरों ने अपने पारंपरिक मुरमुरे के स्नैक को स्थानीय स्वाद के साथ नया रूप दिया. समय के साथ यह स्ट्रीट फूड इतना लोकप्रिय हुआ कि 1947 के बाद यह बांग्लादेश तक पहुंच गया, जहां आज भी लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं.

झालमुरी का इतिहास

झालमुरी की जड़ें पुराने कोलकाता (तब का कलकत्ता) से जुड़ी मानी जाती हैं, जब ब्रिटिश काल में यह शहर एक बड़ा व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र बन रहा था. उस समय बिहार से आए मजदूर और प्रवासी अपने साथ मुरमुरे से बने पारंपरिक स्नैक्स लेकर आए, जिन्हें उन्होंने स्थानीय स्वाद के अनुसार नया रूप दिया. धीरे-धीरे इसमें सरसों का तेल, मसाले, प्याज और हरी मिर्च जैसी चीजें मिलाई जाने लगीं, जिससे इसका स्वाद और भी खास बन गया.

बांग्लादेश तक कैसे पहुंचा झालुमरी?

20वीं सदी की शुरुआत में जब शहरों में स्ट्रीट फूड कल्चर बढ़ा, तब झालमुरी की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी. द्वितीय विश्व युद्ध के समय यह सस्ता और पेट भरने वाला विकल्प बनकर और ज्यादा लोगों तक पहुंचा. 1947 के बंटवारे के बाद, बिहार के मुस्लिम समुदाय के लोग इसे बांग्लादेश तक ले गए, जहां यह आज भी उतना ही लोकप्रिय है. समय के साथ यह स्नैक ब्रिटेन जैसे देशों तक भी पहुंच गया, जहां इसे भारतीय स्ट्रीट फूड के रूप में पसंद किया जाता है.

झालमुरी कैसे बनती है?

  • झालमुरी बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है, लेकिन इसका स्वाद इसकी खास तैयारी में छिपा होता है. सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मुरमुरे (फुले हुए चावल) लिए जाते हैं.
  • इसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर, उबले आलू के छोटे टुकड़े, हरी मिर्च और धनिया डाला जाता है. इसके बाद नमक, चाट मसाला, लाल मिर्च और खास तौर पर सरसों का तेल मिलाया जाता है, जो इसकी पहचान है.
  • आखिर में इसमें नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि हर कौर में स्वाद बराबर आए.
  • इसे आमतौर पर कागज के कोन (ठोंगा) में परोसा जाता है, जिससे इसका स्ट्रीट फूड वाला असली मजा मिलता है.
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