शरीर के लिए क्यों जरूरी है Magnesium? कमी के शुरुआती संकेत पहचानें, वरना हो सकते हैं गंभीर नुकसान
मैग्नीशियम एक ऐसा मिनिरल है जिसे अकसर नजरअंदाज किया जाता है. हालांकि, इसकी कमी किसी भी इंसान को काफी बीमार बना सकती है. आइये जानते हैं इसके बारे में पूरा समझते हैं.
मैग्नीशियम शरीर के लिए एक बेहद जरूरी मिनरल है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. आमतौर पर जब पोषण की बात होती है तो प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम या विटामिन्स का जिक्र ज्यादा होता है, लेकिन मैग्नीशियम भी उतना ही महत्वपूर्ण है. यह शरीर की सैकड़ों केमिकल प्रोसेस में हिस्सा लेता है और इसकी कमी कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है.
अकसर हम विटामिन्स पर ज्यादा फोकस करते हैं और ये भूल जाते हैं कि मिनिरल्स भी शरीर के लिए काफी जरूरी है. मैग्नीशियम की कमी से होने वाली समस्या को लेकर हमने डॉक्टर समीर से बात की. उन्होंने बताया कि शरीर में इस मिनिरल की कमी को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए.
मैग्नीशियम क्या है और यह कैसे काम करता है?
डॉक्टर समीर (MBBS, Kolkata) के मुताबिक, मैग्नीशियम एक आवश्यक मिनरल है, जो शरीर की लगभग 300 से ज्यादा एंजाइमेटिक रिएक्शन्स में शामिल होता है. यह मांसपेशियों के काम करने, नर्व सिस्टम को नियंत्रित रखने, ब्लड शुगर को संतुलित करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. शरीर में मौजूद कुल मैग्नीशियम का लगभग 60 प्रतिशत हड्डियों में पाया जाता है, जबकि बाकी हिस्सा मांसपेशियों, ऊतकों और खून में होता है.
यह मिनरल एनर्जी प्रोडक्शन में भी अहम भूमिका निभाता है. जब हम खाना खाते हैं, तो शरीर उसे ऊर्जा में बदलता है और इस प्रक्रिया में मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण को-फैक्टर के रूप में काम करता है.
शरीर के लिए मैग्नीशियम क्यों जरूरी है
- यह मांसपेशियों और नसों के काम को नियंत्रित करता है. अगर शरीर में मैग्नीशियम का स्तर सही है, तो मांसपेशियां ठीक से सिकुड़ती और ढीली होती हैं. इसकी कमी से मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी महसूस हो सकती है. जिसकी वजह से हाथों-पैरों में दर्द की समस्या हो सकती है.
- यह दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. मैग्नीशियम दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है. यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी सहायक है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है.
- यह हड्डियों को मजबूत बनाने में भूमिका निभाता है. अक्सर लोग हड्डियों के लिए केवल कैल्शियम को ही जरूरी मानते हैं, लेकिन मैग्नीशियम भी कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों की मजबूती को बनाए रखता है.
- यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है. कई शोध बताते हैं कि मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा लेने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है.
- यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है. मैग्नीशियम तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है और नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है.
मैग्नीशियम की कमी क्यों होती है?
आज की जीवनशैली में मैग्नीशियम की कमी होना आम बात हो गई है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. खराब खानपान. प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और रिफाइंड अनाज में मैग्नीशियम की मात्रा बहुत कम होती है. दूसरा कारण है मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट. आधुनिक खेती के कारण जमीन में पोषक तत्व कम हो गए हैं, जिससे फल और सब्जियों में भी मैग्नीशियम की मात्रा घट गई है.
इनके अलावा, तनाव और असंतुलित जीवनशैली. ज्यादा तनाव होने पर शरीर ज्यादा मैग्नीशियम का उपयोग करता है, जिससे इसकी कमी हो सकती है. कुछ बीमारियां जैसे डायबिटीज, पाचन संबंधी समस्याएं और किडनी की दिक्कतें भी मैग्नीशियम की कमी का कारण बन सकती हैं.
मैग्नीशियम की कमी के लक्षण क्या हैं?
- मांसपेशियों में ऐंठन या झटके आना. खासकर पैरों में रात के समय क्रैम्प्स होना इसका संकेत हो सकता है.
- थकान और कमजोरी. शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना मैग्नीशियम की कमी से जुड़ा हो सकता है.
- नींद से जुड़ी समस्याएं. अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती या बार-बार नींद टूटती है, तो इसका एक कारण मैग्नीशियम की कमी हो सकता है.
- मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन. मैग्नीशियम नर्व सिस्टम को शांत रखने में मदद करता है, इसलिए इसकी कमी से एंग्जायटी और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं.
- दिल की धड़कन का अनियमित होना. गंभीर मामलों में यह स्थिति खतरनाक भी हो सकती है.
मैग्नीशियम की कमी से होने वाले नुकसान क्या हैं?
अगर लंबे समय तक शरीर में मैग्नीशियम की कमी बनी रहती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. यह दिली की बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है. मैग्नीशियम की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. इसके साथ ही जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है. हड्डियों की कमजोरी. लंबे समय तक कमी रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. मैग्नीशियम इंसुलिन की संवेदनशीलता को प्रभावित करता है, इसलिए इसकी कमी से ब्लड शुगर नियंत्रण में दिक्कत आ सकती है. मैग्नीशियम की कमी मानसिक स्वास्थ्य पर असर. डिप्रेशन, चिंता और नींद की समस्याएं मैग्नीशियम की कमी से जुड़ी हो सकती हैं. इससे मांसपेशियों और नसों की समस्या. लगातार ऐंठन, कमजोरी और झटके आना इसका परिणाम हो सकता है.
मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत क्या हैं?
- हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों इसके अच्छे स्रोत हैं.
- नट्स और बीज जैसे बादाम, काजू, कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज में भी अच्छी मात्रा में मैग्नीशियम होता है.
- साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस और क्विनोआ भी इसके अच्छे स्रोत हैं.
- फल जैसे केला और एवोकाडो भी मैग्नीशियम प्रदान करते हैं.
- डार्क चॉकलेट भी मैग्नीशियम का एक अच्छा स्रोत मानी जाती है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए.
क्या सप्लीमेंट लेना जरूरी है?
अगर किसी व्यक्ति में मैग्नीशियम की कमी ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है. लेकिन बिना सलाह के सप्लीमेंट लेना सही नहीं है, क्योंकि ज्यादा मात्रा में मैग्नीशियम लेने से दस्त, मतली और अन्य समस्याएं हो सकती हैं. संतुलित आहार के जरिए ही अधिकतर लोग अपनी जरूरत पूरी कर सकते हैं.
दिनभर में कितनी मात्रा जरूरी है?
एक सामान्य वयस्क पुरुष को रोजाना लगभग 400 से 420 मिलीग्राम मैग्नीशियम की जरूरत होती है, जबकि महिलाओं के लिए यह मात्रा 310 से 320 मिलीग्राम के बीच होती है. गर्भवती महिलाओं में इसकी जरूरत थोड़ी ज्यादा हो सकती है.




