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लंदन में धूम मचा रहा है Ghantawala Bihari Samosa, फिरंगियों का बना फेवरेट स्नैक्स; कैसे 50 साल से तीन जनरेशन ने खड़ा किया बिजनेस

कभी बिहार के घरेलू स्वाद से शुरू हुआ 'घंटावाला बिहारी समोसा' आज लंदन की सड़कों पर धूम मचा रहा है. 1972 में गुजरात के नडियाद से शुरू हुआ यह ब्रांड अब यूके के साउथ हैरो और वेम्बली में ग्राहकों की लंबी कतारें लगवा रहा है. पारंपरिक बिहारी रेसिपी, साफ-सुथरी पैकेजिंग और स्मार्ट सोशल मीडिया मार्केटिंग ने इसे वायरल बना दिया.

लंदन में धूम मचा रहा है Ghantawala Bihari Samosa, फिरंगियों का बना फेवरेट स्नैक्स; कैसे 50 साल से तीन जनरेशन ने खड़ा किया बिजनेस
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( Image Source:  Instagram: biharisamosa.uk )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 6 Jan 2026 12:05 PM

Ghantawala Bihari Samosa: कभी-कभी एक छोटी सी शुरुआत बड़ी सफलता की नींव रखती है. ऐसी ही एक इंस्पिरेशनल स्टोरी है 'घंटावाला बिहारी समोसा' की, जो भारत के बिहार से निकलकर गुजरात होते हुए अब ब्रिटेन के लंदन शहर में धूम मचा रही है. यह कहानी एक साधारण आदमी की मेहनत, स्वाद की विरासत और स्मार्ट मार्केटिंग की है, जिसने यूके जैसे देश में जहां कई बिज़नेस इकनोमिक चैलेंजेज से जूझ रहे हैं, वहां इस रेस्टोरेंट के बाहर कस्टमर्स की लंबी-लंबी कतारें लगवा दी हैं. जहां पहले प्रतिदिन मुश्किल से 3000 ग्राहक आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 10,000 से ज्यादा हो गई है.

सबसे पहले बात करते हैं इस ब्रांड की जड़ों की साल 1972 में, एक बिहारी प्रवासी कलिशाप्रसाद किशनलाल शाह ने गुजरात के नडियाद शहर में एक छोटी सी दुकान शुरू की. उनका परिवार मूल रूप से बिहार से था, जहां समोसे का स्वाद घर-घर में मशहूर होता है. कलिशाप्रसाद जी ने अपनी मां की रेसिपी से समोसे बनाना शुरू किया क्रिस्पी बाहर से, अंदर से मसालेदार आलू, मटर और खास बिहारी मसाले से भरे हुए. यह समोसे इतने स्वादिष्ट थे कि जल्दी ही नडियाद में लोकप्रिय हो गए. दुकान का नाम रखा 'घंटावाला बिहारी समोसा', क्योंकि समोसे बेचते समय वे एक छोटी घंटी बजाते थे, जो ग्राहकों को आकर्षित करती थी. यह घंटी आज भी उनके ब्रांड का ट्रेडमार्क है. शुरू में यह सिर्फ एक छोटा सा स्टॉल था, लेकिन परिवार की तीन पीढ़ियों ने इसे बड़ा बनाया. आज भारत में उनके कई आउटलेट्स हैं, लेकिन असली कमाल तो लंदन में हुआ.

यूके में भारतीय स्ट्रीट फूड

अब आते हैं यूके वाली कहानी पर साल 2024 में, परिवार की तीसरी जनरेशन ने फैसला किया कि बिहारी समोसे का स्वाद दुनिया को चखाना है. उन्होंने लंदन के साउथ हैरो में पहला आउटलेट खोला. यूके में भारतीय स्ट्रीट फूड पहले से ही पॉपुलर है, लेकिन यहां की चुनौतियां अलग हैं ठंडा मौसम, महंगी जगहें, और कस्टमर्स की अलग-अलग पसंद ऊपर से, यूके की अर्थव्यवस्था में कई छोटे व्यवसाय संघर्ष कर रहे हैं, जैसे कि बढ़ती महंगाई, सप्लाई चेन की दिक्कतें और कम होते कस्टमर्स। लेकिन घंटावाला बिहारी समोसा ने इन सबको पीछे छोड़ दिया। कैसे? उनकी स्मार्ट मार्केटिंग और अनोखे तरीकों से.

मार्केटिंग की सूझबूझ तो कमाल की है!

सबसे पहले, उन्होंने सोशल मीडिया का पूरा फायदा उठाया. इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर वीडियो पोस्ट किए, जहां दुकान के मालिक पारंपरिक भारतीय कपड़ों में समोसे बेचते नजर आते हैं. एक वायरल वीडियो में वे लंदन की अंडरग्राउंड ट्रेन में समोसे बेचते दिखे हॉट समोसे, मिंट और इमली की चटनी के साथ. वीडियो में वे मजाकिया अंदाज में कहते हैं, 'लोग क्रोइसेंट खाना छोड़ देंगे और बिहारी समोसे खाएंगे!' यह वीडियो इतना वायरल हुआ कि 25 मिलियन से ज्यादा व्यूज हो गए।लोग हंसते-हंसते दुकान पर पहुंचने लगे. इसके अलावा, उन्होंने हाइजीन पर बहुत जोर दिया साफ-सुथरी दुकान, फ्रेश मटेरियल, और प्रीमियम पैकेजिंग. यूके के कस्टमर्स को यह पसंद आया, क्योंकि वहां फूड सेफ्टी बहुत जरुरी है. उन्होंने कीमत भी स्मार्ट रखी दो समोसे £5 (करीब 500 रुपये) में, जो थोड़ी महंगी है लेकिन स्वाद के हिसाब से वैल्यू फॉर मनी.

करीब 8-10 लाख रुपये की कमाई?

साउथ हैरो की दुकान के बाहर लंबी कतारें लगने लगी. लोग घंटों इंतजार करते, सिर्फ एक समोसा चखने के लिए. शुरू में प्रतिदिन 3000 के आसपास कस्टमर्स आते थे, लेकिन वायरल होने के बाद यह संख्या बढ़कर 10,000 से ज्यादा हो गई. इतनी डिमांड हुई कि जल्दी ही उन्होंने वेम्बली में दूसरा आउटलेट खोल दिया. अब दावा है कि वे प्रतिदिन £7,500 से £10,000 (करीब 8-10 लाख रुपये) की कमाई कर रहे हैं. जहां यूके के कई रेस्टोरेंट्स और स्ट्रीट फूड स्टॉल्स बंद हो रहे हैं या घाटे में चल रहे हैं, वहां यह बिहारी समोसा ब्रांड चमक रहा है. ग्राहक सिर्फ भारतीय नहीं, बल्कि ब्रिटिश, यूरोपीय और अन्य देशों के लोग भी हैं, जो इस देसी स्वाद के दीवाने हो गए हैं.

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