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पॉटी बेचकर कर कमाएं 1.5 करोड़! वायरल वीडियो ने चौंकाया, जानिए पूप डोनेशन से पैसे कमाने का पूरा साइंस

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि लोग अपना मल दान करके हजारों डॉलर कमा सकते हैं. दरअसल यह फेकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (FMT) नाम की मेडिकल तकनीक से जुड़ा है, जो कई बीमारियों के इलाज में उपयोग होती है.

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( Image Source:  Instagram: truelysimran )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 12 March 2026 10:19 AM

आजकल सोशल मीडिया पर ऑनलाइन पैसे कमाने के कई अजीबोगरीब और अनोखे तरीके वायरल हो रहे हैं. ऐसे ही एक वीडियो ने लोगों का काफी ध्यान खींचा है, जिसमें एक महिला ने एक बहुत ही चौंकाने वाला और मजेदार दावा किया है. यह दावा है कि आप अपने पूप (पॉटी) को दान करके अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं. यह वीडियो काफी छोटा है, लेकिन इसमें बताई गई बात ने लोगों को हैरान कर दिया है. कुछ लोग हंस पड़े, कुछ ने मजाक उड़ाया, तो कुछ लोग सच में इस बारे में और जानना चाहते थे कि आखिर यह कैसे संभव है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है.

वीडियो की शुरुआत में महिला बहुत एक्साइटमेंट से कहती है, 'अगर मैं आपको बताऊं कि आप अपनी पूप के बदले 1.5 करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं, तो आपको कैसा लगेगा? जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना. उसके अनुसार, अमेरिका की एक कंपनी लोगों से मल दान करने के लिए पैसे दे रही है. सामान्य दान पर हर बार लगभग 41,000 रुपये (यानी करीब 500 डॉलर) मिल सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति रोजाना दान करता है, तो पूरे साल में 1.5 करोड़ रुपये (करीब 1,80,000 डॉलर) तक की कमाई हो सकती है.

ये फेक है या रियल?

वीडियो में कंपनी की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट भी दिखाया जाता है, जहां लिखा है, 'पैसे कमाओ, जिंदगियां बचाओ. पूप (मल) दान करो – FMT (फेकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट) या रिसर्च के लिए.' इससे पता चलता है कि यह कोई फेक बात नहीं, बल्कि एक असली मेडिकल कंपनी है जो इस काम को बढ़ावा दे रही है. महिला यह भी कहती हैं कि जो लोग बहुत फिट, एथलेटिक और अच्छी सेहत वाले होते हैं, उन्हें और ज्यादा पैसे मिल सकते हैं. कुछ खास मामलों में एक बार के दान पर 10 लाख डॉलर (करीब 8-9 करोड़ रुपये) तक देने की बात भी कही गई है. उनका कहना है कि ऐसे लोगों का मल किसी बीमार व्यक्ति की जिंदगी पूरी तरह बदल सकता है, इसलिए कंपनी इस पर इतना ज्यादा खर्च करने को तैयार है.

इसके पीछे का विज्ञान क्या है?

वीडियो में महिला समझाती हैं कि यह सब क्यों काम करता है. हमारे मल का लगभग आधा हिस्सा आंतों के अच्छे बैक्टीरिया (गुट माइक्रोबायोम) से बना होता है. ये बैक्टीरिया हमारे पाचन, मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम और यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. कई बीमारियां जैसे मोटापा, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), क्रोहन रोग, सी. डिफिसाइल इंफेक्शन और कुछ मानसिक समस्याएं तब होती हैं जब आंतों में अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं या खराब बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. इस समस्या को ठीक करने के लिए डॉक्टर फेकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (FMT) नाम की तकनीक इस्तेमाल करते हैं. इसमें स्वस्थ व्यक्ति के मल से अच्छे बैक्टीरिया निकालकर कैप्सूल, एनिमा या अन्य तरीके से बीमार व्यक्ति के शरीर में डाले जाते हैं. यह तरीका कई मामलों में बहुत सफल साबित हुआ है, खासकर कुछ गंभीर आंतों की बीमारियों में।कंपनियां ऐसे बहुत स्वस्थ और फिट लोगों की तलाश करती हैं जिनके मल में सबसे अच्छे और मजबूत बैक्टीरिया हों. ऐसे डोनर बहुत कम होते हैं, कहा जाता है कि 0.1% से भी कम लोग क्वालिफाई करते हैं, इसलिए वे इतने ज्यादा पैसे देने को तैयार रहते हैं.

कंपनी कौन सी है?

यह प्रोग्राम Human Microbes नाम की कंपनी चला रही है. इसकी शुरुआत 2020 में माइकल हैरोप ने की थी. कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा में काम करती है, लेकिन दुनिया भर से डोनर एक्सेप्ट करती है और जरूरत पड़ने पर इंटरनेशनल शिपिंग भी करती है. माइकल हैरोप खुद अपनी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहे हैं. उन्होंने देखा कि आजकल कितने लोग खराब सेहत से जूझ रहे हैं. इसलिए उन्होंने माइक्रोबायोम, FMT और मानव स्वास्थ्य पर गहराई से रिसर्च की. उन्होंने HumanMicrobiome.info नाम का एक बड़ा ऑनलाइन डेटाबेस भी बनाया है, जहां माइक्रोबायोम से जुड़े हजारों रिसर्च आर्टिकल्स को समझाया गया है.

लोगों की प्रतिक्रियाएं क्या रहीं?

8 मार्च को शेयर किया गया यह वीडियो अब तक लाखों बार देखा जा चुका है. कमेंट्स में लोग काफी मजाकिया और हैरान होने वाले रिएक्शन दे रहे हैं. कोई लिखता है, 'अब बस यही बाकी था.' दूसरे ने कहा, 'हे भगवान, यह वीडियो मुझे इतनी देर से क्यों मिला?.' मजाक में एक शख्स ने कहा, 'आखिरकार एक ऐसा काम मिल गया जो करने के लिए मैं पैदा हुआ था.' लेकिन कुछ लोग संदेह भी जताते हैं, 'मतलब दूसरे के पूप को कैप्सूल में डालकर इंजेक्शन लगाते हैं? नहीं जी, धन्यवाद.' यह तरीका सच में अजीब लगता है, लेकिन विज्ञान की दुनिया में यह एक वैध और बढ़ता हुआ क्षेत्र है. अगर आपकी सेहत बहुत अच्छी है और आप इच्छुक हैं, तो आप Human Microbes की वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें, स्क्रीनिंग बहुत सख्त होती है – ज्यादातर लोग क्वालिफाई नहीं कर पाते.

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