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Chhath 2025 : गुड़ नहीं, तो खरना अधूरा! छठ की खीर में क्यों वर्जित है चीनी? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

इस साल बिहार में 1.5 करोड़ से अधिक व्रती छठ मना रहे हैं. पटना के 85 घाटों पर कोसी की रोशनी और ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था है. NDRF की 40 टीमें तैनात हैं. प्रशासन ने गुड़ और गन्ने की किल्लत को देखते हुए सब्सिडी वाले स्टॉल लगाए हैं.

Chhath  2025 : गुड़ नहीं, तो खरना अधूरा! छठ की खीर में क्यों वर्जित है चीनी? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
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( Image Source:  Create By AI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Published on: 26 Oct 2025 12:10 PM

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के घरों में छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं. नहाय-खाय से शुरू होकर अर्घ्य और पारण तक फैली यह चार दिवसीय लोक आस्था की महापर्व आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं को जीवंत रखे हुए है. इनमें से दूसरा दिन 'खरना' का होता है, जब व्रती दिन भर निर्जला उपवास के बाद शाम को गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल ग्रहण करते हैं. लेकिन सवाल उठता है खरना की खीर में चीनी की जगह गुड़ ही क्यों मिलाया जाता है? क्या यह सिर्फ स्वाद की बात है या इसके पीछे गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व छिपा है?. क्या यह सिर्फ स्वाद की बात है या इसके पीछे गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व छिपा है?.

छठ पूजा के चार दिनों में खरना दूसरा दिन होता है। पहले दिन 'नहाय-खाय' में स्नान कर शुद्ध शाकाहारी भोजन (कद्दू-भात, चना दाल) लिया जाता है. खरना में व्रती सूर्योदय से सूर्यास्त तक कठोर उपवास रखते हैं न पानी, न अन्न. शाम को 'खरना प्रसाद' बनता है- गुड़ की खीर (खीर को 'खिरनी' भी कहते हैं), पूरी तरह से गेहूं के आटे की रोटी (बिना नमक) और मौसमी फल. यह प्रसाद पहले छठी मैया को अर्पित किया जाता है, फिर व्रती इसे ग्रहण करते हैं.

गुड़ क्यों? चीनी नहीं?

छठ पूजा की हर रस्म में शुद्धता सर्वोपरि है. व्रती न केवल भोजन, बल्कि विचार, वाणी और कर्म में भी पवित्रता रखते हैं. यही कारण है कि खरना की खीर में गुड़ का प्रयोग अनिवार्य है. आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण.

धार्मिक शुद्धता और प्राकृतिकता- छठ सूर्य और प्रकृति की उपासना है. गुड़ प्राकृतिक रूप से गन्ने से बनता है, बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के. जबकि चीनी रिफाइंड होती है, जिसमें बोन चारकोल (जानवरों की हड्डी से बने चारकोल) का प्रयोग हो सकता है. जो शाकाहारी शुद्धता के खिलाफ है. पुराणों में गुड़ को 'क्षार' कहा गया है, जो पवित्र माना जाता है. छठ व्रत कथा में उल्लेख है कि गुड़ से बनी खीर सूर्य देव को प्रिय है.

मेडिसिनल और हेल्थ बेनिफिट्स- दिन भर निर्जला उपवास के बाद शरीर में शुगर लेवल गिर जाता है. गुड़ प्राकृतिक ग्लूकोज और फ्रक्टोज का स्रोत है, जो तुरंत एनर्जी देता है बिना ब्लड शुगर को अचानक बढ़ाए. आयुर्वेद के अनुसार गुड़ पाचन शक्ति बढ़ाता है, कब्ज दूर करता है और खून साफ करता है- जो उपवास के बाद जरूरी है. चीनी की तुलना में गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं.

परंपरा और लोक विश्वास- बुजुर्ग बताते हैं कि गुड़ सूर्य की किरणों से बने गन्ने का सार है. छठ में सूर्य को अर्घ्य देने वाले व्रती गुड़ की खीर से सूर्य देव की ऊर्जा को आत्मसात करते हैं. कई गांवों में मान्यता है कि गुड़ की खीर खाने से 'छठी मैया की कृपा से संतान सुख' मिलता है.'

खरना प्रसाद की विधि:

सामग्री- चावल, दूध, गुड़, इलायची, कुछ सूखे मेवे

बनाने का तरीका- नए बर्तन में गाय का दूध उबालें

चावल धोकर डालें, गाढ़ा होने तक पकाएं

गुड़ को अलग से पानी में घोलकर छान लें, फिर खीर में मिलाएं (सीधे न डालें, कड़वाहट आ सकती है)

बिना नमक की रोटी सेंकें

विशेष: खाना मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनता है.

1.5 करोड़ से अधिक मना रहे हैं

इस साल बिहार में 1.5 करोड़ से अधिक व्रती छठ मना रहे हैं. पटना के 85 घाटों पर कोसी की रोशनी और ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था है. NDRF की 40 टीमें तैनात हैं. प्रशासन ने गुड़ और गन्ने की किल्लत को देखते हुए सब्सिडी वाले स्टॉल लगाए हैं. अंत में...खरना की गुड़ वाली खीर सिर्फ एक प्रसाद नहीं, बल्कि विश्वास, विज्ञान और परंपरा का संगम है. यह सिखाती है कि सादगी में ही सच्ची शुद्धता है. जैसे सूर्य बिना भेदभाव के सबको प्रकाश देता है, वैसे ही छठ का यह पर्व सबको एकजुट करता है.

छठ पूजा
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