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क्या आप भी रिश्तों में ‘चार्जर’ बनकर तो नहीं रह गए? अंकुर वारिकू ने बताया आजकल के रिलेशनशिप का सच

रिश्तों में हमेशा देने वाला इंसान कब खुद खाली हो जाता है, पता ही नहीं चलता. अंकुर वारिकू ने ‘चार्जर’ की मिसाल से बताया कि दूसरों को संभालते-संभालते अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करना रिश्ते नहीं, खुद से दूरी बढ़ा सकता है.

क्या आप भी  रिश्तों में ‘चार्जर’ बनकर तो नहीं रह गए? अंकुर वारिकू ने बताया आजकल के रिलेशनशिप का सच
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जानें फोन चार्जर आपके रिश्ते के बारे में क्या बताता है

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 11 Aug 2026 9:48 AM IST

आज के रिश्तों में प्यार और परवाह के साथ एक सवाल भी जरूरी है- क्या आप भी हमेशा सामने वाले को ‘चार्ज’ करने में लगे रहते हैं? अंकुर वारिकू ने फोन के चार्जर का उदाहरण देकर रिश्तों की एक ऐसी सच्चाई समझाई है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. जिस तरह किसी का फोन बार-बार कम बैटरी होने पर आपका चार्जर मांगता है, उसी तरह कुछ रिश्तों में भी सामने वाला जरूरत पड़ने पर आपका समय, ध्यान और एनर्जी लेता रहता है.

दिक्कत तब होती है जब दूसरे का फोन 100% हो जाता है, लेकिन आपकी अपनी बैटरी लगातार डाउन होती रहती है. अंकुर का इशारा इसी तरफ है कि दूसरों की मदद और रिश्तों की परवाह अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए खुद को पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं. अगर हर बार आप ही समय दें, आप ही सुनें और आप ही समझें, तो एक वक्त ऐसा आ सकता है जब रिश्ते को संभालते-संभालते आप खुद को ही खो दें.

क्या है फोन के चार्जर का रिश्तों से कनेक्शन?

अंकुर वारिकू ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि मान लीजिए कोई व्यक्ति आपके पास आता है और कहता है कि उसके फोन की बैटरी खत्म होने वाली है और उसे थोड़ी देर के लिए आपका चार्जर चाहिए. आप अपना चार्जर उसे दे देते हैं. अब उसका फोन चार्ज होने लगता है, लेकिन इसी दौरान आपके अपने फोन की बैटरी भी कम होती जा रही है. इसके बावजूद आप इस बात पर ध्यान नहीं देते, क्योंकि आपका पूरा ध्यान दूसरे व्यक्ति के फोन को चार्ज करने पर है.

रिश्ते में कैसे होती है आपकी एनर्जी डाउन?

कुछ समय बाद उसके फोन की बैटरी पूरी तरह चार्ज हो जाती है. वह व्यक्ति चार्जर वापस लेकर चला जाता है और आपको तभी याद करता है जब उसके फोन की बैटरी दोबारा लगभग खत्म होने लगती है. वारिकू का कहना है कि असल जिंदगी में हम शायद अपने चार्जर के साथ ऐसा होने नहीं देंगे. लेकिन रिश्तों में कई बार बिल्कुल यही गलती कर बैठते हैं.

दूसरों को कितना समय देना सही?

वारिकू ने इसी उदाहरण को रिश्तों से जोड़ते हुए समझाया कि कई बार हम सामने वाले की हर जरूरत को पूरा करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करने लगते हैं. हम अपना समय, ध्यान और भावनात्मक ऊर्जा लगातार दूसरों पर खर्च करते रहते हैं. समस्या तब शुरू होती है जब यह एकतरफा आदत बन जाती है. सामने वाला अपनी परेशानी में आपको याद करता है, आप उसकी मदद के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं, लेकिन जब आपको खुद सहारे या समय की जरूरत होती है, तब वही व्यक्ति आपके लिए मौजूद हो, यह जरूरी नहीं.

खुद की कीमत समझें

वारिकू की इस बात का सीधा मतलब यह है कि दूसरों की मदद करना या अपने रिश्तों को समय देना गलत नहीं है. समस्या तब होती है जब ऐसा करते हुए आप अपनी खुशियों, जरूरतों और मानसिक शांति को लगातार नजरअंदाज करने लगते हैं. अगर आपका पूरा समय दूसरों के लिए है और अपने लिए कुछ भी नहीं, तो धीरे-धीरे आपको खुद से ही दूरी महसूस होने लग सकती है. इसलिए रिश्तों में प्यार और परवाह के साथ अपनी सीमाओं को समझना भी जरूरी है.

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