TMC छोड़ी तो खुला 20.5 करोड़ की जमीन का रास्ता? यूसुफ पठान को मिलेगा उनका मनपसंद प्लॉट, आखिर क्या है पूरी कहानी?
यूसुफ पठान के वडोदरा स्थित 20.5 करोड़ रुपये के विवादित प्लॉट को गुजरात सरकार ने आवंटन की मंजूरी दी है. जानें 14 साल पुराने जमीन विवाद, अतिक्रमण के आरोप और हाईकोर्ट में हुई सुनवाई की पूरी कहानी.
गुजरात सरकार ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में नगर निगम के एक विवादित प्लॉट के आवंटन को मंजूरी दे दी है. इस प्लॉट पर कथित अतिक्रमण को लेकर दो साल पहले उन्हें नोटिस दिया गया था. वडोदरा नगर निगम (VMC) की ओर से तैयार प्रस्ताव अब उसकी स्थायी समिति के सामने रखा गया है. यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब यूसुफ पठान ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एक दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया है.
विवादित प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 978 वर्ग मीटर है. गुजरात सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, इसमें से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय इस्तेमाल के लिए उपहार के रूप में दी जाएगी, जबकि बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन रियायती दर पर किया जाएगा. इसके लिए वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (VUDA) की मूल्यांकन समिति की ओर से 17 मार्च 2026 को तय किए गए मूल्य का 55 प्रतिशत लिया जाएगा.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फैसले को भविष्य में दूसरे मामलों के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा. साथ ही, राज्य का राजस्व विभाग वडोदरा नगर निगम को उतने मूल्य की दूसरी जमीन आवंटित करेगा, जितनी कीमत की जमीन निगम यूसुफ पठान को देगा.
कहां है विवादित प्लॉट और कितनी है इसकी कीमत?
यह प्लॉट वडोदरा के तंदलजा इलाके में टाउन प्लानिंग स्कीम नंबर 22 के तहत फाइनल प्लॉट नंबर 90 पर स्थित है. यह पठान परिवार के प्रसिद्ध सफेद रंग के बंगले के ठीक बगल में है. इसी बंगले में यूसुफ पठान अपने छोटे भाई और पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान, परिवार के अन्य सदस्यों और माता-पिता के साथ रहते हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, निगम को गुजरात सरकार की ओर से प्लॉट आवंटित करने की मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसकी कुछ शर्तों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. आयुक्त ने कहा कि निगम को पहले सरकार की मंजूरी में दी गई विस्तृत शर्तों का अध्ययन करना होगा. उन्होंने बताया कि जल्द ही विवरण तय कर लिया जाएगा. इसके बाद प्रस्ताव निगम की सामान्य मंजूरी प्रक्रिया से गुजरेगा. इसमें स्थायी समिति और सामान्य सभा की मंजूरी शामिल है.
इस साल जुलाई में वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने इस प्लॉट की सार्वजनिक नीलामी की तैयारी शुरू की थी. समिति ने जमीन का मूल्य 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तय करने की मंजूरी दी थी. इस हिसाब से पूरे प्लॉट की अनुमानित कीमत करीब 20.5 करोड़ रुपये बैठती थी.
आखिर क्यों अटका था प्लॉट का आवंटन?
हालांकि, बाद में इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया. नगर निगम की सर्वोच्च विधायी और निर्णय लेने वाली संस्था सामान्य सभा ने यूसुफ पठान पर कथित अतिक्रमण को लेकर सवाल उठाए थे. उसका कहना था कि जब तक अतिक्रमण का मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक जमीन का निपटारा नहीं किया जा सकता. अब नगर निगम के भूमि संपदा विभाग ने स्थायी समिति के माध्यम से सामान्य सभा की मंजूरी लेने के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है. इसके बाद ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.
2012 से शुरू हुआ विवाद, क्या चाहते थे पठान?
यूसुफ पठान और वडोदरा नगर निगम के बीच जमीन को लेकर विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई थी. उस समय पठान ने निगम से अनुरोध किया था कि उन्हें बंगले के पास स्थित खाली नगर निगम की जमीन 99 साल की लीज पर दी जाए. उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया से छूट देने की मांग की थी.
अपने आवेदन में यूसुफ पठान ने क्या कहा था?
अपने आवेदन में पठान ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के कारण उनकी सार्वजनिक पहचान है और इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि घर के पास की जमीन आवासीय इस्तेमाल के लिए सुविधाजनक होगी.
यूसुफ पठान ने मार्च 2012 में भारत के लिए अपना आखिरी वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था. वह 2011 से 2017 तक इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेले. टीम के 2012 और 2014 में खिताब जीतने के अभियानों में उनकी अहम भूमिका रही थी.
उस समय वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा ने पठान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. तब जमीन का मूल्य 57,270 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया था. इस हिसाब से पूरे प्लॉट की कीमत करीब 5.6 करोड़ रुपये थी. पठान ने यह राशि चुकाने की इच्छा भी जताई थी.
गुजरात सरकार की इजाजत थी जरूरी?
लेकिन जमीन को सीधे पठान को देने के लिए गुजरात सरकार की मंजूरी जरूरी थी, क्योंकि इसमें सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया को दरकिनार किया जा रहा था. जून 2014 में राज्य के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके बाद वडोदरा नगर निगम ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बावजूद पठान ने प्लॉट पर बाड़ लगाकर उस पर कब्जा कर लिया था.
सांसद बनते ही अतिक्रमण नोटिस?
जून 2024 में यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बने थे. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पांच बार सांसद रह चुके अधीर रंजन चौधरी को हराया था. सांसद बनने के कुछ ही दिनों बाद वडोदरा नगर निगम ने उन्हें नोटिस जारी किया. इसमें कथित अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था. पठान ने इस नोटिस को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी.
अदालत ने क्या कहा था?
अगस्त 2025 में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया. अदालत ने कहा कि लंबे समय तक किसी जमीन पर कब्जा बनाए रखने और उसके लिए भुगतान नहीं करने से कानूनी अधिकार पैदा नहीं हो जाता. अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि मशहूर हस्तियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को विशेष सुविधा देने से गलत संदेश जा सकता है.
यूसुफ पठान की कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की अपील?
इसके बाद यूसुफ पठान ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की. इस साल जून में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि जमीन आवंटन की औपचारिकताएं पूरी किए बिना और भुगतान किए बिना किसी सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कैसे जारी रह सकता है. उस समय खंडपीठ की अगुवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल कर रही थीं, जो अब सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश हैं.
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि यदि अनधिकृत कब्जा साबित होता है, तो नुकसान की भरपाई तय करते समय इस पहलू पर अलग से विचार करना होगा. ऐसा तब भी हो सकता है, जब पठान को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए राज्य की नीति के तहत राहत मिल जाए.
31 अगस्त को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि यूसुफ पठान ने अपने वकील को अपील वापस लेने का निर्देश दिया है. वकील ने अदालत को बताया था कि इस मामले का समाधान अदालत के बाहर ही हो सकता है. इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि मामला अपील वापस लेने के कारण खारिज किया जाता है.
TMC छोड़ने के बाद फिर चर्चा में आए यूसुफ पठान?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे. इसके बाद 9 मई को शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने राज्य में सत्ता संभाली. 14 जून को यूसुफ पठान समेत तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने घोषणा की कि वे अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ हैं. इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर ममता बनर्जी की पार्टी से अलग बैठने की मांग भी की थी.
सितंबर में खबर आई थी कि यूसुफ पठान को NCPI का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इस पार्टी के बारे में पहले बहुत कम जानकारी थी. तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के इससे जुड़ने के बाद यह चर्चा में आई. NCPI का मुख्य कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल इलाके के हटगाचा में एक इमारत में बताया जाता है. यह जगह कोलकाता के मध्य क्षेत्र से करीब 100 किलोमीटर दूर है. पार्टी के अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी हैं, जिनके बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी उपलब्ध है.
टीएमसी छोड़ते ही जमीन पर दोबारा विचार?
इस साल जुलाई में वडोदरा नगर निगम के आयुक्त अरुण महेश बाबू ने जमीन के मूल्यांकन से संबंधित प्रस्ताव को दोबारा विचार करने के लिए वापस ले लिया था. इसके बाद विश्वामित्री बचाओ समिति नाम के एक नागरिक समूह ने सार्वजनिक प्लॉटों से कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की थी.
समिति का कहना था कि नगर निगम को पहले पठान के कथित अतिक्रमण को हटाकर जमीन का भौतिक कब्जा अपने हाथ में लेना चाहिए. इसके बाद ही उसे सार्वजनिक नीलामी के लिए पेश किया जाना चाहिए.
समिति ने अनुमान लगाया था कि कथित तौर पर 14 साल तक जमीन पर कब्जा रखने के लिए करीब 7.5 करोड़ रुपये का शुल्क बन सकता है. यह अनुमान नगर निगम की ओर से टाउन प्लानिंग के तहत खाली प्लॉटों के अस्थायी इस्तेमाल के लिए तय 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन की दर पर आधारित था.
अब आगे क्या होगा?
गुजरात सरकार की मंजूरी के बाद यूसुफ पठान को विवादित प्लॉट आवंटित करने का प्रस्ताव फिर से आगे बढ़ा है. हालांकि, जमीन का अंतिम आवंटन नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा की मंजूरी के बाद ही हो सकेगा. इसके अलावा, जमीन पर कथित अतिक्रमण, कब्जे की अवधि के लिए संभावित शुल्क और आवंटन की शर्तों से जुड़े सवाल अभी बाकी हैं. नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की मंजूरी की विस्तृत शर्तों का अध्ययन करने और पठान से भुगतान को लेकर बातचीत करने के बाद ही इन मामलों पर आगे फैसला होगा.




