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EXCLUSIVE: सूअर शराब शबाब के 'गुलाम' मोहम्मद अली जिन्ना पर आंसू बहाने वाले बताएं पाकिस्तान में जिन्ना जूतों से क्यों पिटे?

वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ल ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में खुलासा किया कि कैसे मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत को बांटकर पाकिस्तान बनवाया और वहां पाकिस्तानी मुस्लिमों ने उन्हें जूतों से पीटा. जिन्ना की भारत विरोधी साजिश और अल्लामा इक़बाल की भूमिका आज भी इतिहास में विवादित बनी हुई है.

EXCLUSIVE: सूअर शराब शबाब के गुलाम मोहम्मद अली जिन्ना पर आंसू बहाने वाले बताएं पाकिस्तान में जिन्ना जूतों से क्यों पिटे?
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संजीव चौहान
By: संजीव चौहान10 Mins Read

Updated on: 14 March 2026 10:52 PM IST

भारत में मौजूद एक वर्ग-विशेष आज भी यहीं के अन्न-पानी के बलबूते जिंदा रहने के बाद भी, जब जब मरहूम मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र आता है तो उन्हें ‘कायद-ए-आजम’ कहते नहीं थकता है. भारत की रोटियों पर पल बढ़ फल फूल रही यह कौम जिन्ना के जिंदा रहते रहते और अब उसे कई दशक मरे हुए होने के बाद भी, उसके गुणगान करते नहीं थकती है.

इस कौम के लिए पहले भी और आज भी जिन्ना बेपनाह मुहब्बत करने वाला ‘हीरो’ था. जिन्ना ने भारत का गद्दार बनकर अपनी अय्याशी की खातिर अंग्रेजों के हाथों में खेलकर भारत के टुकड़े करवा कर, भारत को काटकर पाकिस्तान बनवाना मंजूर किया था. यह बात आज भी भारत में मूंग दल रही इस कौम को कतई बर्दाश्त नहीं होता है. जबकि सच यही है कि जिन्ना अगर भारत के साथ वफादार रहे होते तो न केवल देश बंटने से बच जाता. अपितु अंग्रेजों की देश से भागते भागते भी “फूट डालो राज करो” की घिनौनी सोच को आज तक खाद पानी न मिल रहा होता.

कौन हैं विवेक शुक्ल?

जिन्ना किस कदर मय गवाह और सबूतों के कालांतर में भारत के गद्दार साबित हुए? इस बात का खुलासा कुछ वक्त पहले स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान नई दिल्ली में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार-स्तंभकार विवेक शुक्ल ने किया. स्टेट मिरर हिंदी के लिए किए गए एक पॉडकास्ट-इंटरव्यू के दौरान. विवेक शुक्ल से जब पूछा गया कि आखिर जिन्ना को भारत में मौजूद आज भी एक कौम-विशेष के लाखों लोग अपना ‘मसीहा’ क्यों मानते हैं? जैसे ही भारत में कोई जिन्ना को देश का गद्दार कहता है वैसे ही जिन्ना की वकालत करने वालों के तन-बदन-दिल-ओ-जेहन क्यों सुलग उठते हैं?

जिन्ना पर किताब क्यों?

स्टेट मिरर हिंदी के सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार और जिन्ना के ऊपर अनुसंधान करके किताब लिखने में व्यस्त विवेक शुक्ल कहते हैं, “दरअसल जिन्ना मेरी ही क्या पूरे भारत की नजर में एक जलील इंसान था. इस बात को दुनिया के तमाम भारत प्रेमी और इस्लाम को मानने वाले भी सहज स्वीकार करते हैं. जो मुस्लिम दिल से जिन्ना से घृणा करते थे या करते हैं वे, किसी व्यक्ति-विशेष से यानी जिन्ना से नहीं उसके कुकर्मों से खिन्न हैं थे और आइंदा भी रहेंगे.”

जिन्ना पर रोने वाले भारतीय कैसे होंगे?

जिन्ना पर जिक्र में अपनी बेबाक बात जारी रखते हुए विवेक शुक्ल कहते हैं, “दरअसल जो लोग आज भारत में रहकर जिन्ना का गुणगान करते हैं. वे भारतीय कैसे हो सकते हैं. वे इस्लाम धर्म के भी सगे कैसे हो सकते हैं. जिन्ना से इस्लाम को मानने वाले इसलिए घृणा नहीं करते थे कि उसने भारत पाकिस्तान का बंटवारा कराया. इस्लाम के असली अनुयायी मुस्लिम इस बात से मोहम्मद अली जिन्ना से घिन खाते थे क्योंकि वे शराब-शबाब और सूअर का गुलाम थे. ऐसा नहीं है कि यह मैं कोई विशेष या दबी छिपी बात बता रहा हूं. इससे जिन्ना की जिंदगी के इतिहास के काले पन्ने भरे पड़े हैं.”

उनका बयान बकवास से ज्यादा कुछ नहीं?

कुछ वक्त पहले मैं एक पॉडकास्ट के लिए समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद, प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी से मिला था. जो खुद को गांधी परिवार का सबसे अंदर का आदमी बता रहे थे. भले ही इतने अंदर के आदमी होने के बाद भी उन्हें कभी गांधी परिवार ने कोई राजनीतिक ओहदा न सौंपा हो. ऐसे शाहिद सिद्दीकी जो आज एआई की तेजी से आगे बढ़ती दुनिया में भी खुद व्हाट्सएप पर मौजूद रहने के बाद भी आज के पत्रकारों को ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से पढ़ा होने की दुहाई बार-बार देते न हाँफ रहे थे. उनका कहना था कि पाकिस्तान का बंटवारा जिन्ना ने नहीं कराया. जिन्ना बेहद नेकदिल, मजबूर और बिचारे इंसान थे. जिन्हें अंग्रेजों ने भारत-पाकिस्तान बंटवारे में जमकर दूहा और इस्तेमाल करके छोड़ दिया. शाहिद सिद्दीकी के इस व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञान से उपजे दावे में कितना दम है?

शाहिद सिद्दीकी का बयान बकवास क्यों?

स्टेट मिरर हिंदी के सवाल के जवाब में मोहम्मद अली जिन्ना की जिंदगी (अतीत) की रग-रग से वाकिफ होकर ही उनके कर्म-कुकर्मों पर किताब लिख रहे वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ल कहते हैं, “सब कोरी बकवास है. जिन्ना के बारे में पूछे जाने पर जो शाहिद सिद्दीकी आज बड़ी बड़ी हांक रहे हैं. ज्ञान दे रहे हैं. आज की पीढ़ी को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़ा बता कर खुद को काबिल साबित करने पर तुले हैं. वह शायद जिन्नाह की करतूतों का उतना सच खुद भी नहीं जानते हैं. जितना कि जिन्ना के ऊपर अनुसंधान करके अब मैं किताब में जिन्ना के अतीत के पन्नों का काला-सफेद सच मैं लिख रहा हूं.”

बंटवारे में जिन्ना के पीछे कौन?

जो आज जिन्ना के बारे में सवाल पूछने पर भड़क जाते हैं. शाहिद सिद्दीकी जैसे जो कुछ लोग आज भारत में मौजूद रहकर भी जिन्ना को मासूम, मजबूर लाचार नेकदिल होने का दम भर रहे हैं. दरअसल उन्हें या तो जिन्ना की काली और भारत विरोधी करतूतों के बारे में पता ही नहीं है. या फिर उन्हें सबकुछ मालूम है मगर चूंकि सच कड़वा होता है. और वे सच मंजूर करके उसका सामना करने की हैसियत नहीं रखते हैं. इसलिए मोहम्मद अली जिन्ना को वे मासूम-बिचारा कहकर उनका बचाव करने में नहीं शर्माते हैं. भारत के बंटवारे के लिए बेशक सीधे तौर पर जिन्ना जिम्मेदार न हों. मगर जिन्नाह ने जिनके नक्श-ए-कदम पर आगे बढ़ते हुए अंग्रेजों के कुचक्र में फंसकर भारत के टुकड़े करवाकर पाकिस्तान बनवाया, वह जिन्ना के पीछे असल आदमी थे तब के प्रमुख शायर विचारक अल्लामा इक़बाल.

अल्लामा इक़बाल को अंग्रेजों ने कैसे भुनाया?

कैसे और किससे प्रभावित होकर शराब शबाब और सूअर के शौकीन मोहम्मद अली जिन्ना आंख मूंदकर भारत का बंटवारा करके पाकिस्तान बनाने की बेहया जिद पर अड़ गए? इस सवाल के जवाब में बात करते हुए विवेक शुक्ल कहते हैं, “तब के मशहूर भारतीय शायर विचारक अल्लामा इक़बाल ने 29 दिसंबर 1930 को अब के प्रयागराज और तब के इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय भाषण में उत्तर पश्चिम भारत में मुस्लिम बहुल राज्यों को मिलाकर एक अलग राज्य बनाने का प्रस्ताव रखा था. उसी प्रस्ताव को भारत को बांटकर पाकिस्तान बनाने के लिए फिर अंग्रेजों ने हमारे खिलाफ तुरुप के पत्ते सा आगे चल दिया. आज का पाकिस्तान अंग्रेजों की उसी चाल का मलिच्छ नमूना कहूं या नासूर सामने है.”

जिन्ना ने पाकिस्तान में जूते क्यों खाये?

स्टेट मिरर हिंदी के साथ लंबी विशेष बातचीत में पत्रकार विवेक शुक्ल कहते हैं, “चूंकि असल मायने में भारत को बांटकर पाकिस्तान बनाने की प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से होली अल्लामा इक़बाल ने ही 29 दिसंबर 1930 को इलाहाबाद में आयोजित मुस्लिम लीग के अधिवेशन में रख दी थी. अंग्रेजों ने तो भारत को काटकर पाकिस्तान बनाकर हमेशा के लिए हिंदुस्तान को नासूर देने के लिए मोहम्मद अली जिन्ना का कंधा इस्तेमाल किया था. जो जिन्ना ने भी खुशी खुशी अपने घटिया शौकों को पूरा करने की मैली गरज में मंजूर कर लिया था. जिन्ना अगर हिंदुस्तान के प्रति ईमानदार वफादार होते तो, अंग्रेज कभी भी भारत के दो हिस्से करके पाकिस्तान अपने बलबूते नहीं बना सकते थे.”

पाकिस्तान में जिन्ना जूतों से क्यों पिटे?

यहां उल्लेखनीय है कि जिन अल्लामा इक़बाल के उठाये मुद्दे को अंग्रेजों के हाथों कैश करवाकर मक्कार मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान बनवाकर वहां के कायद-ए-आजम बन बैठे थे. बकौल वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार विवेक शुक्ल, “बाद में उसी पाकिस्तान में वह दिन भी ऐसी घटिया सोच वाले मोहम्मद अली जिन्ना की जिंदगी में आया जब, जिन्ना को पाकिस्तान बनने के बाद ढाका में पाकिस्तानी मुस्लिमों ने जूतों चप्पलों से सरेआम जमकर पीटा था. यह बात तब की है जब उत्तरी पाकिस्तान को काटकर भारत तब तक बांग्लादेश नहीं बनवा सका था. जो लोग आज भारत में बैठकर जिन्ना को अपना मसीहा, हिंदुस्तान का सच्चा सिपाही, मासूम बेकसूर बता रहे हैं, मैं उनसे सवाल करता हूं कि आखिर फिर उनके इतने शरीफजादे जिन्नाह को उन्हीं की कौम वालों ने पाकिस्तान बन जाने के बाद ढाका में जूतों से क्यों पीटा था?”

फिर भी शर्म क्यों नहीं खाते हैं?

भारत के मशहूर पत्रकार विवेक शुक्ल का यह सवाल जायज है. इस सवाल का जवाब शाहिद सिद्दीकी या उनके जैसे वे लोग बेहतर दे सकते हैं जो आज की पीढ़ी को व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़ा हुआ गाते-बजाते नहीं थक रहे हैं. और खुद को जिन्ना के बारे में सबसे ज्यादा काबिल समझकर आज की पीढ़ी के सामने जिन्ना को भारत के प्रति जलील न बताकर, मुस्लिमों का सबसे बड़ा रहनुमा गाते बजाते जरा भी शर्म नहीं खाते हैं. यहां जिक्र करना जरूरी है कि पाकिस्तान बन जाने के बाद वहां इन्हीं अल्लामा इक़बाल को “मुफ्फकिर-ए-पाकिस्तान” (आइडियोलॉजिकल फादर, पाकिस्तान का विचारक) और “शायर-ए-मशरीक” कहा गया था.

अल्लामा की खोदी खाई में जिन्ना क्यों गिरे?

यह वही भारत विरोधी सोच और कट्टर चरमपंथी मानसिकता वाले अल्लामा इक़बाल थे जिन्होंने 29 दिसंबर 1930 को इलाहाबाद में आयोजित मुस्लिम लीग के अधिवेशन में भारत का विभाजन करके “द्वि-राष्ट्र सिद्धांत” (Two Nation Theory) की होली रखी थी. यह वही अल्लामा इक़बाल थे जिन्होंने भारत को काटकर पंजाब, उत्तर पश्चिम फ्रंटियर, बलूचिस्तान और सिंध को मिलाकर एक स्वतंत्र मुस्लिम राज्य (आज का पाकिस्तान) की खाई अपनी मैली सोच के पंजों से खोदी थी. वही खाई जिसमें गिरने के बाद मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तानी मुस्लिमों ने अपने ही देश में घेरकर खुलेआम कालांतर में जूतों-चप्पलों से (तब के पूर्वी पाकिस्तान के ढाका में आज बांग्लादेश की राजधानी ढाका में) पीटा था.

स्टेट मिरर स्पेशल
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