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14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने वाले कौन थे निर्मल पुर्जा? कैसे हुई मौत, जानिए पर्वतारोही की कहानी

नेपाल के मशहूर पर्वतारोही निर्मल 'निम्सदाई' पुर्जा की पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में मौत हो गई. 14 सबसे ऊंची चोटियां रिकॉर्ड समय में फतह करने वाले पुर्जा की उपलब्धियां उन्हें पर्वतारोहण जगत का महान नाम बनाती हैं.

14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने वाले कौन थे निर्मल पुर्जा? कैसे हुई मौत, जानिए पर्वतारोही की कहानी
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( Image Source:  nimsdai- instagram )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Updated on: 1 Aug 2026 5:40 PM IST

दुनिया भर में अपनी ऐतिहासिक पर्वतारोहण उपलब्धियों के लिए पहचाने जाने वाले नेपाल के दिग्गज पर्वतारोही निर्मल 'निम्सदाई' पुर्जा अब इस दुनिया में नहीं रहे. पाकिस्तान के काराकोरम पर्वतमाला स्थित ब्रॉड पीक पर अभियान के दौरान आए भीषण हिमस्खलन में उनकी मौत हो गई. हादसे के बाद से वे लापता थे और बाद में उनके अभियान से जुड़ी संस्था Elite Exped ने आधिकारिक बयान जारी कर उनके निधन की पुष्टि की.

43 वर्षीय निर्मल पुर्जा उस अभियान की अगुवाई कर रहे थे, जिसका लक्ष्य 8,000 मीटर से अधिक ऊंची और दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में गिने जाने वाले ब्रॉड पीक पर सफल चढ़ाई करना था. लेकिन अभियान के दौरान अचानक आए हिमस्खलन ने पूरी टीम को अपनी चपेट में ले लिया और उनसे संपर्क टूट गया.

निर्मल पुर्जा को बचाने के लिए क्या किया गया?

हादसे के समय अभियान दल में नेपाल के छह पर्वतारोहियों के अलावा पाकिस्तान, अमेरिका, चीन और ओमान से भी सदस्य शामिल थे. पाकिस्तान के जाने-माने पर्वतारोही सोहैल सखी भी इसी टीम का हिस्सा थे. हिमस्खलन की सूचना मिलते ही पाकिस्तान अल्पाइन क्लब और स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया. हेलीकॉप्टर की मदद से खोज अभियान चलाया गया, लेकिन आखिरकार निर्मल पुर्जा के निधन की पुष्टि कर दी गई.

छह महीने में 14 ऊंची चोटियां फतह कर रचा था इतिहास

निर्मल पुर्जा ने वर्ष 2019 में वह कारनामा कर दिखाया था, जिसे पर्वतारोहण की दुनिया लगभग असंभव मानती थी. उन्होंने दुनिया की सभी 14 ऐसी चोटियों पर चढ़ाई की, जिनकी ऊंचाई 8,000 मीटर से अधिक है, और यह उपलब्धि महज छह महीने से कुछ अधिक समय में हासिल कर ली. इससे पहले यह रिकॉर्ड दक्षिण कोरिया के पर्वतारोही किम चांग-हो के नाम था, जिन्होंने यही चुनौती पूरी करने में करीब सात वर्ष लगाए थे. निर्मल की इस उपलब्धि ने उन्हें विश्वभर में अलग पहचान दिलाई.

नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री से मिली वैश्विक पहचान

निर्मल पुर्जा की रिकॉर्डतोड़ यात्रा पर आधारित नेटफ्लिक्स की चर्चित डॉक्यूमेंट्री "14 Peaks: Nothing Is Impossible" ने उनकी कहानी को दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाया. इस फिल्म में उनके साहस, संघर्ष और असंभव लक्ष्य को हासिल करने के जुनून को दिखाया गया, जिसने उन्हें पर्वतारोहण की दुनिया का वैश्विक चेहरा बना दिया.

सेना की वर्दी से शुरू हुआ था असाधारण सफर

पर्वतारोहण में नाम कमाने से पहले निर्मल पुर्जा ने करीब 16 वर्षों तक ब्रिटिश सेना में सेवाएं दीं. उन्होंने पहले ब्रिगेड ऑफ गुरखा में जिम्मेदारी निभाई और बाद में ब्रिटेन की प्रतिष्ठित स्पेशल बोट सर्विस (SBS) का हिस्सा बने. यह यूनिट दुनिया की सबसे कठिन सैन्य इकाइयों में गिनी जाती है. सैन्य सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें Member of the Order of the British Empire (MBE) सम्मान से भी सम्मानित किया था.

एक ट्रेक ने बदल दी पूरी जिंदगी

निर्मल पुर्जा के जीवन में निर्णायक मोड़ वर्ष 2012 में आया, जब उन्होंने पहली बार एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा की. इसी अनुभव ने उनके भीतर पर्वतों को जीतने का जुनून पैदा किया. इसके बाद उन्होंने लगातार कठिन अभियानों में हिस्सा लिया और देखते ही देखते दुनिया के शीर्ष पर्वतारोहियों में अपनी जगह बना ली. उन्होंने बाद में Nimsdai Foundation की भी स्थापना की, जो नेपाल के पर्वतीय इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्वतारोहियों के सहयोग के लिए काम करती है.

क्यों खास है ब्रॉड पीक?

ब्रॉड पीक की ऊंचाई 8,051 मीटर है और इसे दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी माना जाता है. यह पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत क्षेत्र में K2 के नजदीक स्थित है. खराब मौसम, बर्फीले तूफान, हिमस्खलन और कठिन चढ़ाई के कारण इसे दुनिया की सबसे जोखिमभरी चोटियों में गिना जाता है. इस पर्वत पर पहली सफल चढ़ाई वर्ष 1957 में ऑस्ट्रिया के पर्वतारोहियों की टीम ने की थी.

हमेशा याद रखा जाएगा 'निम्सदाई' का साहस

निर्मल 'निम्सदाई' पुर्जा सिर्फ एक पर्वतारोही नहीं थे, बल्कि उन लोगों के लिए प्रेरणा थे जो सीमाओं को चुनौती देने का साहस रखते हैं. उनकी उपलब्धियां, उनका अनुशासन और असंभव को संभव बनाने का जज्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा. पर्वतारोहण जगत ने उनके रूप में एक ऐसा नाम खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा.

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