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सस्पेंस खत्म! हिंसा से जूझते मणिपुर को मिला NEW फेस, जानें कौन हैं नए सीएम युमनाम खेमचंद सिंह?

मणिपुर में लंबे राजनीतिक सस्पेंस के बाद युमनाम खेमचंद सिंह को नया मुख्यमंत्री चुना गया है. बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी. जानिए युमनाम खेमचंद सिंह का राजनीतिक सफर, उनका बैकग्राउंड, स्पीकर और मंत्री के तौर पर भूमिका, राष्ट्रपति शासन की स्थिति और मणिपुर की आगे की राजनीति.

सस्पेंस खत्म! हिंसा से जूझते मणिपुर को मिला NEW फेस, जानें कौन हैं नए सीएम युमनाम खेमचंद सिंह?
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( Image Source:  facebook/YKhemchandSingh )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 3 Feb 2026 7:31 PM IST

हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे Manipur में आखिरकार नेतृत्व को लेकर चला आ रहा सस्पेंस खत्म हो गया है. राजधानी इंफाल में बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल गया है, जिससे हालात में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है.

करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में Bharatiya Janata Party ने युमनाम खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लगाई. बैठक में नॉर्थ ईस्ट समन्वयक Sambit Patra, मणिपुर बीजेपी प्रभारी Ajit Gopchhade और पर्यवेक्षक Tarun Chugh भी मौजूद रहे. माना जा रहा है कि खेमचंद सिंह जल्द ही राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.

कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?

Yumnam Khemchand Singh मणिपुर के सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से आने वाले दो बार के विधायक हैं. वे इससे पहले मणिपुर विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं और मौजूदा सरकार में ग्रामीण विकास व पंचायती राज जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं. उनकी गिनती राज्य के कद्दावर नेताओं में होती है. वह मैतेई समुदाय से हैं.

राजनीति से पहले उनका बैकग्राउंड क्या रहा है?

राजनीति में आने से पहले खेमचंद सिंह एक खिलाड़ी के रूप में पहचाने जाते थे. वे ताइक्वांडो के अनुभवी खिलाड़ी रहे हैं और इस खेल को मणिपुर में आगे बढ़ाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. यही वजह है कि उनकी छवि जमीन से जुड़े और अनुशासित नेता की मानी जाती है.

युमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री कैसे चुना गया?

इंफाल में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों की राय के बाद युमनाम खेमचंद सिंह को दल का नेता चुना गया. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उनके अनुभव और शांत स्वभाव से राज्य में चल रहे तनाव को संभालने में मदद मिलेगी.

उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

राज्य में लंबे समय से चले आ रहे जातीय संघर्ष और प्रशासनिक ठहराव को खत्म करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी. लोगों को भरोसा है कि उनके अनुभव से कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संवाद को नई दिशा मिलेगी.

राष्ट्रपति शासन और सरकार गठन की स्थिति क्या है?

पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था, जिसकी मियाद 12 फरवरी तक है. 60 सदस्यीय विधानसभा फिलहाल निलंबित है. बीजेपी के 37 विधायक हैं, जबकि एनडीए सहयोगी दल एनपीपी और एनपीएफ के साथ निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी पार्टी को हासिल है. ऐसे में युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है.

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