2 महीने में 1,100 से ज्यादा छापे, बड़े-बड़े रेस्टोरेंट पर गिरी गाज; कौन हैं महाराष्ट्र के IAS तुकाराम मुंढे, हो चुके 25 ट्रांसफर?
महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पद संभालने के बाद 2 महीने में 1,131 से ज्यादा छापेमारी कर 56 रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित किए. इसके बाद से ही उनकी काफी चर्चा हो रही है.
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के नए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पदभार संभालने के बाद राज्यभर में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया है. 25 मई को पद संभालने के बाद से उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में 1,131 से अधिक निरीक्षण कराए हैं. इस दौरान करोड़ों रुपये का खाद्य सामान जब्त किया गया, कई रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित किए गए और गुटखा नेटवर्क के खिलाफ MCOCA जैसी कड़ी कार्रवाई भी की गई. उनकी कार्यशैली की जहां कई लोग तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे बेहद सख्त और समझौता न करने वाला रवैया बता रहे हैं.
मुंबई के फूड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि तुकाराम मुंढे से मिलना आसान है, लेकिन नियमों के उल्लंघन पर राहत मिलना लगभग नामुमकिन है. पदभार संभालने के बाद जारी अपने पहले आधिकारिक बयान में उन्होंने साफ कहा था कि जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी. पिछले दो महीनों में उनकी कार्रवाई ने महाराष्ट्र के FDA को राज्य के सबसे चर्चित विभागों में शामिल कर दिया है.
पदभार संभालने के बाद क्या-क्या किया?
25 मई को पदभार संभालने के बाद FDA ने महाराष्ट्र में 1,131 निरीक्षण किए.
- यानी विभाग ने औसतन हर दिन 20 से ज्यादा जगहों पर जांच की.
- कार्रवाई के दौरान 49.57 करोड़ रुपये का खाद्य स्टॉक जब्त किया गया.
- करीब 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध भी जब्त किया गया.
- संगठित गुटखा नेटवर्क के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाया गया.
- 56 रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित किए गए.
किन बड़े रेस्टोरेंट पर हुई कार्रवाई?
- 73 साल पुराना K Rustom & Co.
- नूर मोहम्मदी
- शालीमार
- आदित्य बिड़ला न्यू एज हॉस्पिटैलिटी के Waarsa और Flint
- शेफ राहुल अकरकर से जुड़ा प्रतिष्ठान
- 110 साल पुराना पारसी डेयरी फार्म
कौन हैं तुकाराम मुंढे?
- तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के बीड जिले के तडसोन्ना गांव के रहने वाले हैं.
- उनका बचपन सूखा प्रभावित इलाके में बीता.
- उन्होंने खेतों में काम किया, साप्ताहिक बाजारों में सब्जियां बेचने में परिवार की मदद की.
- उनकी पढ़ाई जिला परिषद स्कूल में हुई.
- वर्ष 2005 में उन्होंने IAS सेवा जॉइन की.
- वह अपनी ईमानदारी और मेहनत का श्रेय अपने पिता को देते हैं.
- दो दशक के करियर में FDA उनकी लगभग 25वीं पोस्टिंग मानी जाती है.
- उन्होंने 16 से ज्यादा बड़े प्रशासनिक पदों पर काम किया है.
- उनकी पहचान अचानक निरीक्षण, सख्त कार्रवाई और नियमों के कड़ाई से पालन कराने वाले अधिकारी के रूप में बनी है.
- समर्थकों का कहना है कि बार-बार ट्रांसफर इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने कभी दबाव में काम नहीं किया.
- आलोचकों का कहना है कि उनकी कार्यशैली में बातचीत और समझौते की गुंजाइश कम रहती है.
'वॉटर मैन ऑफ महाराष्ट्र' कैसे बने?
- सोलापुर के कलेक्टर रहते हुए उन्होंने जलयुक्त शिवार योजना पर काम किया.
- इस योजना के तहत सैकड़ों गांवों को टैंकर मुक्त बनाने में सफलता मिली.
- इसके बाद उन्हें "वॉटर मैन ऑफ महाराष्ट्र" कहा जाने लगा.
नेताओं से भी हो चुका है विवाद?
- 2015 की आषाढ़ी वारी के दौरान उन्होंने ट्रैफिक और सुरक्षा नियम सख्ती से लागू किए.
- इसी दौरान तत्कालीन राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे के काफिले को लेकर विवाद हुआ.
- अजित पवार ने विधानसभा में उन पर जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया था.
नवी मुंबई में भी रही सख्त छवि?
- नवी मुंबई नगर निगम के आयुक्त रहते हुए उन्होंने अवैध निर्माण और होर्डिंग्स के खिलाफ अभियान चलाया. संपत्ति कर वसूली तेज की.
- "वॉक विद कमिश्नर" अभियान शुरू किया. उनकी कार्यशैली को लेकर NCP, कांग्रेस और शिवसेना ने 2016 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया.
- तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अनियमितताओं को उजागर करने वाले अधिकारी को दंडित नहीं किया जाना चाहिए.
- हालांकि बीजेपी के भीतर भी सभी नेता उनके समर्थन में नहीं थे. विधायक मंदा म्हात्रे बाद में उनकी आलोचक बन गईं.
ज्वाइनिंग के बाद FDA दफ्तर में क्या बदला?
- अधिकारियों के मुताबिक मुंढे रोज सुबह करीब 9:40 बजे दफ्तर पहुंचते हैं और शाम 6:15 बजे तक काम करते हैं.
- पहले कई अधिकारी 11 बजे तक आते थे, लेकिन अब अधिकांश 10 से 10:30 बजे तक पहुंच जाते हैं.
- अधिकारियों का कहना है कि अब देर तक बैठने की अपेक्षा नहीं होती, लेकिन काम समय पर पूरा करना जरूरी होता है.
- फूड सेफ्टी अधिकारियों के अनुसार, उनकी ड्यूटी सुबह शुरू होकर देर रात तक चलती है.
- पिछले पूरे साल में करीब 15 हजार खाद्य नमूनों की जांच हुई थी. जबकि इस साल सिर्फ 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच ही करीब 8,700 नमूनों की जांच की गई.
- विभाग ने बैच टेस्टिंग और दो शिफ्ट में काम शुरू किया, जबकि कर्मचारियों की संख्या वही रही.
मीडिया से संवाद भी बना रणनीति?
- अब FDA लगभग रोज प्रेस नोट जारी कर रहा है.
- छापेमारी की फोटो, वीडियो और आंकड़े साझा किए जा रहे हैं.
- अधिकारियों को मीडिया के सवालों का जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं.
- मुंढे ने कार्यभार संभालने के कुछ दिनों के भीतर पत्रकारों से मुलाकात की.
- इसके बाद चार प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जा चुकी हैं.
मुंढे की कार्यशैली पर क्या कहते हैं लोग?
पूर्व अधिकारियों और सहयोगियों का कहना है कि उनकी ईमानदारी और काम के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाए जाते. लेकिन उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार बहस होती रहती है. कई लोगों का मानना है कि वे नियमों को राजनीति से ऊपर रखते हैं. कुछ का कहना है कि प्रशासन में संवाद भी उतना ही जरूरी है जितना सख्त कार्रवाई.
विधानसभा में भी पहुंचा मामला?
- NCP (SP) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सरकार से मांग की कि तुकाराम मुंढे का कम से कम तीन साल तक तबादला न किया जाए.
- उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे हैं और मुंढे व उनके परिवार को धमकियां भी मिली हैं.
- बीजेपी विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी उनका समर्थन किया.
- FDA मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधानसभा में कहा कि फिलहाल उनके तबादले का कोई प्रस्ताव नहीं है.




