तिब्बत में भारत का पलड़ा भारी तो अरुणाचल के रास्ते घेराबंदी की तैयारी? चीन की चाल पर संजय कुलकर्णी ने चेताया
तिब्बत में भारत की रणनीतिक बढ़त के बीच चीन अरुणाचल प्रदेश के रास्ते दबाव बढ़ा सकता है. संजय कुलकर्णी ने चीन की संभावित रणनीति को लेकर चेताया.
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पीएलए और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच आमने-सामने की झड़प एक बार फिर चर्चा में है. इसी पृष्ठभूमि में लेफ्टिनेंट कर्नल संजय कुलकर्णी ने चीन की रणनीति और भारत के लिए पूर्वी मोर्चे पर बढ़ती चुनौतियों को लेकर चेताते हुए कहा कि ड्रैगन के लिए तिब्बत का ऊंचाई वाला इलाका सैन्य अभियानों के लिहाज से आसान नहीं है और ऐसे में वह भारत के नॉर्थ ईस्ट वाल हिस्से पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है. इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारत को अब इस मोर्चे पर चीन के नजरिए से सतर्क रहने की जरूरत है. चीन जो काम पाकिस्तान के साथ मिलकर अभी तक नहीं कर सका, वही काम अब वो बांग्लादेश के साथ हाथ मिलाकर कर सकता है. संजय कुलकर्णी के बयान को इस संदर्भ में देखतें तो उनका दावा काफी हर तक सच होता नजर आ रहा है.
अरुणाचल में चीनी सैनिकों से झड़प का खुलासा कैसे?
आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने एक कार्यक्रम में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है. आईटीबीपी की ओर से इन परिस्थितियों में भारतीय जवानों द्वारा जवाब दिए जाने और सीमा पर तैयारियों को मजबूत करने की बात कही गई है. जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है.
तिब्बत की ऊंचाई चीन के लिए चुनौती कैसे?
लेफ्टिनेंट कुलकर्णी संजय कुलकर्णी ने हाल ही में स्टेट मिरर से बातचीत में कहा था कि तिब्बत का ऊंचाई वाला भूभाग चीन की वायु सैन्य क्षमता के सामने एक चुनौती पैदा करता है. ऊंचाई वाले इलाकों में हवा का घनत्व कम होने के कारण लड़ाकू विमानों की परिचालन क्षमता प्रभावित हो सकती है. उनके आकलन के मुताबिक भारत के विमानों को तिब्बत के खिलाफ अभियान में कुछ परिस्थितियों में फायदा मिल सकता है, खासकर पेलोड और उड़ान क्षमता के लिहाज से.
क्या अरुणाचल के रास्ते दबाव बनाने की तैयारी में है चीन?
कुलकर्णी का कहना है कि चीन की रणनीति को केवल तिब्बत तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. भारत के पूर्वी हिस्से और पूर्वोत्तर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. इसी वजह से अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर जारी तनाव और आसपास के क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर भारत को लगातार नजर रखनी होगी.
बांग्लादेश और सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी अहम कैसे?
संजय कुलकर्णी ने बांग्लादेश में चीन की बढ़ती भूमिका को भी भारत के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बताया है. उनके मुताबिक अगर चीन बांग्लादेश में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करता है तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है. खास तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही संकरा भू-भाग पूर्वोत्तर के राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है.
उत्तरी बांग्लादेश में लालमनिरहाट एयरबेस को लेकर भी सामरिक चिंताएं सामने आती रही हैं. कुलकर्णी के आकलन में बांग्लादेश के जरिए चीन को भारत के पूर्वी हिस्से के करीब रणनीतिक स्थिति बनाने का अवसर मिल सकता है. हालांकि, एयरबेस के इस्तेमाल या चीन की किसी निश्चित सैन्य योजना से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
भारत के लिए वैकल्पिक रास्ता क्यों जरूरी?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता के बीच भारत की कलादान बहु-माध्यमीय परियोजना को वैकल्पिक संपर्क मार्ग के तौर पर देखा जाता है. इस परियोजना के जरिए कोलकाता से म्यांमार के सित्तवे बंदरगाह, फिर कलादान नदी के रास्ते पलेतवा और वहां से मिजोरम तक संपर्क विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर तक पहुंच के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर का वैकल्पिक मार्ग तैयार करना है. हालांकि म्यांमार में जारी राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता के कारण इसके सामने भी कई चुनौतियां हैं.
चीन की गतिविधियों पर भारत की नजर क्यों?
अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति, तिब्बत की भौगोलिक चुनौती और पूर्वोत्तर के आसपास बदलती सामरिक परिस्थितियां भारत के लिए कई मोर्चों को एक साथ महत्वपूर्ण बनाती हैं. संजय कुलकर्णी के मुताबिक भारत को इन सभी घटनाक्रमों को एक साथ देखते हुए अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियों को पहले से ज्यादा मजबूत रखना होगा.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है. यह अरुणाचल में उत्तर-पूर्वी सीमा पर चल रहे टकराव की पहली आधिकारिक पुष्टि है, जहां हाल के महीनों में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है. ऐसी खबरें सामने आई थीं कि तक्सिंग इलाके में चीनी सैनिक भारतीय बलों को LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पास अहम पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक जाने से रोक रहे हैं. ITBP कर्मियों के लिए आयोजित एक वार्षिक सम्मान समारोह में कपूर ने कहा, "पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी है जहां अरुणाचल में कई जगहों पर आमना-सामना हुआ है, और यह अभी भी जारी है."




