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SIR में 47.6 लाख नाम गायब..89 हजार लगे कैंप, फिर भी दिल्ली में कम क्यों आए आवेदन, जानें किस जिले से कितने लोगों ने भरा Form-6: Detail

दिल्ली में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से 47.6 लाख नाम हटाए गए. 89 हजार विशेष कैंप के बाद भी फॉर्म-6 के आवेदन कम क्यों हैं? जानें किस जिले से कितने आवेदन मिले और वोटर लिस्ट का पूरा अपडेट.

SIR में 47.6 लाख नाम गायब..89 हजार लगे कैंप, फिर भी दिल्ली में कम क्यों आए आवेदन, जानें किस जिले से कितने लोगों ने भरा Form-6: Detail
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दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए अब तक करीब 2.51 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के मुताबिक, 31 अगस्त को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी होने से लेकर 22 अक्टूबर तक फॉर्म-6 के कुल 2,50,754 आवेदन मिले हैं. इनमें नए मतदाता और SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए लोग, दोनों शामिल हैं. जिलेवार आंकड़ों में पश्चिमी दिल्ली सबसे आगे है, जबकि नई दिल्ली जिले में सबसे कम आवेदन मिले हैं.

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने से पहले भी फॉर्म-6 के 2,12,400 आवेदन प्राप्त हुए थे. यानी 31 अगस्त से पहले भी बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया था. ज्ञात हो कि फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 के जरिए किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई जा सकती है या नाम हटाने का अनुरोध किया जा सकता है.

कितने लोगों के नामों पर जताई गई थी आपत्ति?

CEO कार्यालय के अनुसार, करीब 33 लाख लोगों के नाम ऐसे लोगों की लिस्ट में शामिल थे, जिनका साल 2002 की आधार मतदाता सूची से कोई संबंध नहीं मिला था या जिनकी डिटेल में तार्किक गड़बड़ियां पाई गई थीं. इनमें से करीब 29.5 लाख मामलों का समाधान कर लिया गया है. इन लोगों के नाम आखिरी वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे, जब तक कि कोई व्यक्ति फॉर्म-7 भरकर उनके नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति नहीं जताता या नाम हटाने की मांग नहीं करता. ऐसी स्थिति में संबंधित मामले की जांच की जाएगी.

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को दोबारा सूची में शामिल कराने में मदद के लिए देशभर में खास कैंप्स लगाने का ऐलान किया गया था. दिल्ली में पहला विशेष शिविर 20 सितंबर को लगाया गया था. CEO कार्यालय के मुताबिक, इसके बाद से दिल्ली में करीब 89 हजार स्पेशल कैंप्स आयोजित किए जा चुके हैं. इन शिविरों का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है, जो मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराना चाहते हैं. 20 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच फॉर्म-6 के कुल 1,58,470 आवेदन प्राप्त हुए. यह अवधि विशेष शिविरों के आयोजन के बाद की है.

क्या आवेदन की संख्या कम?

एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि 89 हजार से अधिक विशेष शिविर लगाए जाने के बावजूद आवेदन की संख्या कम है. अधिकारी के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि गैरमौजूदगी, शिफ्ट हो चुके, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं (ASDD) की लिस्ट उचित प्रक्रिया के तहत तैयार की गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि नए आवेदनों में से करीब 50 प्रतिशत आवेदन पहली बार मतदाता बनने वालों के हैं.

कब तक निपटाए जाएंगे सभी आवेदन?

CEO कार्यालय के अनुसार, वोटर लिस्ट से जुड़े दावों और आपत्तियों का निपटारा 30 नवंबर तक कर दिया जाएगा. इसके बाद 4 दिसंबर को आखिरी वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी. दावों और आपत्तियों के लिए निर्धारित अवधि 30 अक्टूबर को समाप्त हो रही है. इस दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6, नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 और मतदाता के विवरण में बदलाव के लिए फॉर्म-8 भरा जा सकता है. जिन लोगों के नामों के साथ तार्किक गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, उनके मामलों का समाधान भी इसी अवधि में किया जा रहा है.

किस जिले में कितने आवेदन मिले?

31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच दिल्ली के अलग-अलग जिलों में फॉर्म-6 के आवेदनों की संख्या में अंतर देखने को मिला. पश्चिमी दिल्ली में सबसे अधिक आवेदन आए, जबकि नई दिल्ली जिले में सबसे कम आवेदन दर्ज किए गए.

पश्चिमी दिल्ली जिले में तिलक नगर, जनकपुरी, राजौरी गार्डन और विकासपुरी जैसे इलाके शामिल हैं. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली जिले में किराड़ी, रोहिणी और मंगोलपुरी आते हैं. वहीं, पूर्वी दिल्ली जिले में त्रिलोकपुरी, लक्ष्मी नगर और गांधी नगर जैसे इलाके शामिल हैं. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले में ओखला, कालकाजी और तुगलकाबाद आते हैं. दूसरी ओर, नई दिल्ली जिले में नई दिल्ली और दिल्ली कैंटोनमेंट शामिल हैं. यहां सबसे कम 4,341 आवेदन प्राप्त हुए. पुरानी दिल्ली जिले में बल्लीमारान, मटिया महल, सदर बाजार और चांदनी चौक शामिल हैं. मध्य दिल्ली जिले में करोल बाग, पटेल नगर, मोती नगर और राजिंदर नगर जैसे इलाके आते हैं.

कितने लाख नाम हटाए गए थे?

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई थी. उस समय दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे. 31 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई, जिसमें से करीब 47.6 लाख नाम हटा दिए गए थे. इन नामों को गैरमौजूदगी, स्थान बदल चुके, मृत या डुप्लीकेट मतदाता यानी ASDD श्रेणियों के तहत हटाया गया था. इसके बाद मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, हटाने या विवरण में बदलाव कराने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई.

दो जगहों की वोटर आईडी होने पर क्या कर रहे लोग?

जिलास्तर पर काम करने वाले कम से कम दो अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोगों के पास दो मतदाता पहचान पत्र होने की स्थिति में वे अपने मूल स्थान वाले मतदाता पहचान पत्र को बनाए रखना पसंद कर रहे हैं. नई दिल्ली जिले के एक चुनाव अधिकारी ने बताया कि जिले की ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार करते समय करीब 20 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाने पड़े, क्योंकि वे दूसरे इलाकों में स्थानांतरित हो चुके थे.

अधिकारी के मुताबिक, इनमें सरकारी आवासों में रहने वाले लोग और सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल थे. कुछ लोगों के पास पहले लुटियंस दिल्ली का पता था, लेकिन बाद में वे गुरुग्राम या अपने मूल स्थान पर चले गए थे. ऐसे लोगों के नाम सूची से हटाए गए और उन्हें सलाह दी गई कि वे जहां वर्तमान में रह रहे हैं, वहां मतदाता के रूप में पंजीकरण कराएं.

बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर कर रहे हैं जांच?

मतदाता सूची को सही करने के लिए एक अलग अभियान भी चलाया जा रहा है. इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अलग-अलग इलाकों में जाकर उन लोगों की स्थिति की जांच कर रहे हैं, जिनके नाम SIR से पहले की मतदाता सूची में थे, लेकिन मौजूदा ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं. BLO यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि संबंधित व्यक्ति कहां रह रहा है और क्या वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए पात्र है. पात्र पाए जाने पर उन्हें फॉर्म-6 के जरिए दोबारा नाम जुड़वाने में मदद दी जा रही है.

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