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NCLT-NCLAT को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया है, कॉरपोरेट मंत्रालय को SC ने क्यों लगाई कड़ी फटकार? 10 Points में जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने NCLT और NCLAT पर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के कथित नियंत्रण को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और इसे संस्थाओं की स्वायत्तता के लिए चिंता का विषय बताया. कोर्ट ने दोनों ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों से चार हफ्ते में स्टाफ और बुनियादी सुविधाओं पर विस्तृत प्रस्ताव मांगा तथा संविदा भर्ती पर भी सवाल उठाए.

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Supreme Court 

( Image Source:  ANI )

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय पर कड़ी टिप्पणी की है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि मंत्रालय ने इन दोनों महत्वपूर्ण न्यायिक संस्थाओं को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है. कोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय का दखल इन संस्थाओं की स्वायत्तता को प्रभावित कर रहा है. अदालत ने कहा कि इस मामले में जरूरी कदम उठाने होंगे, ताकि ट्रिब्यूनल स्वतंत्र रूप से काम कर सकें. सुनवाई के दौरान NCLT में बुनियादी सुविधाओं की कमी, खाली पदों और कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर सवाल उठे.

NCLT बार एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजीव सेन ने बताया कि कुछ मंजिलों की छतें जर्जर हैं और इस्तेमाल के लायक नहीं बची हैं. उन्होंने कहा कि NCLT के 320 नियमित पदों में से 253 खाली पड़े हैं. वहीं, वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने संविदा कर्मचारियों की भर्ती एक विदेशी कंपनी के जरिए कराए जाने पर चिंता जताई. सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए NCLT और NCLAT के अध्यक्षों से चार हफ्ते में बुनियादी ढांचे और स्टाफ की जरूरतों को लेकर विस्तृत प्रस्ताव मांगा है.


सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें

  1. कॉरपोरेट मंत्रालय पर NCLT-NCLAT को अपने नियंत्रण में लेने का आरोप: चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने दोनों ट्रिब्यूनल को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है. कोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय का यह दखल इन संस्थाओं की स्वायत्तता को प्रभावित कर रहा है.
  2. मंत्रालय के नियंत्रण को बताया संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए खतरा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्रालय इन ट्रिब्यूनल पर पूरी तरह अपना नियंत्रण रखना चाहता है. अदालत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्थाओं की स्वायत्तता पर पड़ रहे असर की जांच जरूरी है.
  3. NCLT और NCLAT के अध्यक्षों से चार हफ्ते में मांगा प्रस्ताव: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है. इसमें बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की जरूरतों का पूरा ब्योरा देना होगा.
  4. NCLT के 320 नियमित पदों में से 253 खाली: NCLT बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ वकील संजीव सेन ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनल में नियमित कर्मचारियों के 320 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 253 खाली पड़े हैं. इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है.
  5. NCLT की इमारत की छतें जर्जर, कुछ मंजिलें इस्तेमाल के लायक नहीं: सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि NCLT की इमारत की कुछ मंजिलों की छतें गिरने की स्थिति में हैं. इस वजह से उन हिस्सों का इस्तेमाल नहीं किया जा पा रहा है. बार एसोसिएशन ने इसे बुनियादी सुविधाओं की गंभीर समस्या बताया.
  6. संविदा कर्मचारियों की भर्ती के लिए विदेशी कंपनी की भूमिका पर सवाल: वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि मंत्रालय ने संविदा कर्मचारियों की भर्ती की जिम्मेदारी एक विदेशी कंपनी को आउटसोर्स की है. उन्होंने आशंका जताई कि इतनी महत्वपूर्ण वित्तीय न्यायिक संस्था में इस तरह की भर्ती से उसकी कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है.
  7. आठ साल से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को हटाने का मुद्दा उठा: मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि मौजूदा संविदा कर्मचारी करीब आठ साल से सेवा दे रहे हैं. उन्होंने इन कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया.
  8. भर्ती UPSC या SSC के जरिए कराने की बात कही: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत संविदा आधार पर कर्मचारियों की भर्ती को मंजूरी नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि नियुक्तियां संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) या कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के माध्यम से होनी चाहिए.
  9. संविदा कर्मचारियों को NCLT-NCLAT के अध्यक्षों के अधिकार क्षेत्र में रखने की बात: जब संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने पर रोक लगाने की मांग की गई, तो बेंच ने ऐसा कोई आदेश देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि NCLT और NCLAT के अध्यक्षों को इस मामले में पूरी स्वायत्तता दी जानी चाहिए. मुख्य सवाल यह है कि बदलाव कितनी जल्दी किया जाए.
  10. मूल फाइलें गायब होने और न्यायिक सदस्यों से दुर्व्यवहार का मुद्दा: चीफ जस्टिस ने मुंबई का उदाहरण देते हुए कहा कि संविदा कर्मचारियों के कारण मूल फाइलें गायब होने की घटनाएं हुईं और FIR तक दर्ज करनी पड़ीं. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कुछ संविदा कर्मचारी न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की परवाह नहीं करते तथा कुछ तकनीकी सदस्यों के साथ भी हेरफेर की शिकायतें सामने आई हैं.


गौरतलब है कि NCLT ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55,000 करोड़ रुपये के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी. यही ट्रिब्यूनल कॉर्पोरेट विवादों, कंपनी कानून के उल्लंघन और दिवालियापन से जुड़े मामलों पर फैसला सुनाता है.

सुप्रीम कोर्ट
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