Exclusive: मोदी-शाह नहीं, योगी-गडकरी-स्मृति ईरानी की तारीफ क्यों कर गए सुब्रह्मण्यम स्वामी? जानें क्या बोले
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और स्मृति ईरानी की तारीफ की. जानें Modi Government, Ram Temple, UP Election और BJP को लेकर क्या बोले.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने एक बार फिर अपने बयानों से सियासी हलचल बढ़ा दी है. इस बार उनके निशाने पर मोदी सरकार के कुछ फैसले रहे, लेकिन उन्होंने बीजेपी के तीन चर्चित चेहरों की खुलकर तारीफ की. स्वामी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) की कानून-व्यवस्था को बड़ी उपलब्धि बताया और 2027 में उनकी वापसी का दावा किया. वहीं, नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) के सड़क निर्माण के काम की सराहना करते हुए उनकी नीयत का भी बचाव किया. स्मृति ईरानी (Smriti Irani) की बीजेपी में वापसी को उन्होंने सही कदम बताया. ऐसे में सवाल है कि मोदी-शाह से अलग इन तीन नेताओं को लेकर स्वामी का रुख इतना पॉजिटिव क्यों?
योगी को लेकर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी 7 माह दूर है, लेकिन इसकी तैयारियों और संभावित मुद्दों पर चर्चा तेज हो चुकी है. इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के एक बयान ने सियासी बहस को नया रंग दे दिया है. स्वामी ने स्टेट मिरर से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राम मंदिर से जुड़े योगदान को बहुत बड़ा नहीं माना, लेकिन कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर उनकी जमकर तारीफ की. उनका कहना है, "उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार का काम लोगों के बीच उसकी बड़ी ताकत है."
स्वामी के मुताबिक विपक्ष राम मंदिर के मुद्दे को चुनाव में कितना भी उठाए, उत्तर प्रदेश की जनता को पता है कि किस सरकार ने क्या काम किया है. उनका मानना है कि "योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी चुनावी पूंजी राम मंदिर नहीं, बल्कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था' का मुद्दा हो सकता है. इस आधार पर योगी 2027 में दोबारा सत्ता में लौट सकते हैं और मुख्यमंत्री बन सकते हैं."
क्या राम मंदिर के मुद्दे से योगी को नुकसान होगा?
राम मंदिर बीजेपी की राजनीति का लंबे समय से अहम मुद्दा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि अयोध्या में बीजेपी की हार और मंदिर को लेकर विपक्ष के हमले का असर 2027 के यूपी चुनाव में कितना पड़ेगा? स्वामी के आकलन में इसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश की जनता स्थानीय परिस्थितियों और सरकार के कामकाज को अच्छी तरह समझती है.
हालांकि, अयोध्या लोकसभा सीट पर बीजेपी की हार को लेकर स्वामी का रुख काफी तीखा रहा. उन्होंने अयोध्या के लोगों में नाराजगी की बात कही और संकेत दिया कि बीजेपी को वहां की जनता की भावनाओं को समझने की जरूरत है. उनके मुताबिक अगर पार्टी को अयोध्या जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक नुकसान से बचना है तो स्थानीय स्तर पर जनता के साथ बेहतर तालमेल जरूरी है.
स्मृति ईरानी की वापसी पर सुब्रह्मण्यम स्वामी क्यों खुश हैं?
स्मृति ईरानी की बीजेपी में वापसी को लेकर भी सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सकारात्मक टिप्पणी की. उन्होंने इसे सही कदम बताया. स्वामी का मानना है कि बीजेपी में ऐसे नेताओं की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, जिन्हें वह प्रभावी और काम का मानते हैं. इसी संदर्भ में उन्होंने स्मृति ईरानी की वापसी को पार्टी के लिए अच्छा बताया.
स्वामी की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि स्वामी ने बातचीत में मोदी सरकार के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए. यानी एक तरफ उन्होंने सरकार के कुछ फैसलों की आलोचना की, तो दूसरी तरफ बीजेपी के कुछ नेताओं की व्यक्तिगत क्षमता और काम की खुलकर तारीफ की.
नितिन गडकरी की तारीफ करते हुए क्या बोले स्वामी?
नितिन गडकरी पर सुब्रह्मण्यम स्वामी का रुख सबसे ज्यादा सकारात्मक नजर आया. उन्होंने गडकरी को अच्छा व्यक्ति बताते हुए सड़क निर्माण के क्षेत्र में उनके काम की तारीफ की. स्वामी ने अपने पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने गडकरी के कार्यकाल में ऐसी सड़कें देखीं, जिन्हें देखकर उन्हें लगा कि अमेरिका में भी वैसी सड़कें देखने को नहीं मिलीं.
हालांकि, गडकरी से जुड़े सड़क निर्माण की गुणवत्ता और इथेनॉल के मुद्दे पर उठ रहे सवालों को लेकर स्वामी ने उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट देने की बात नहीं कही. उन्होंने माना कि गडकरी इन विवादों को लेकर घिरे हुए हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें गडकरी की नीयत खराब नहीं लगती.
स्वामी ने यह तर्क भी दिया कि किसी मंत्रालय के तहत होने वाला हर काम को सुपरविजन मंत्री खुद मौके पर जाकर नहीं करता. सड़क बनाने से लेकर पेट्रोल में इथेनॉल से जुड़े फैसलों तक कई स्तरों पर अधिकारी और संबंधित एजेंसियां काम करती हैं. इसलिए किसी विवाद के आधार पर सीधे गडकरी की नीयत पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा.
मोदी और राम मंदिर पर स्वामी ने क्यों उठाए सवाल?
इसी बातचीत में सुब्रह्मण्यम स्वामी ने मोदी सरकार के कुछ फैसलों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की. राम मंदिर से जुड़े विवादों पर उन्होंने कहा कि संसद में बहस नहीं कराने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा को लेकर सवाल उठे. स्वामी ने मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को लेकर भी अपनी असहमति जाहिर की और कहा कि उनके अनुसार मंदिर को जल्दबाजी में तैयार किया गया.
स्वामी ने यह भी सवाल उठाया कि मंदिर से जुड़े मामलों की जांच प्रधानमंत्री के नेतृत्व में क्यों नहीं कराई गई. उनके मुताबिक ऐसी परिस्थितियों ने मोदी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया. हालांकि, ये सभी स्वामी के व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन और आरोप हैं.
स्वामी के बयान में एक दिलचस्प विरोधाभास दिखाई देता है. उन्होंने मोदी सरकार और उसके कुछ फैसलों पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन बीजेपी के भीतर योगी आदित्यनाथ, स्मृति ईरानी और नितिन गडकरी जैसे नेताओं के काम या राजनीतिक भूमिका को लेकर सकारात्मक राय रखी. योगी के मामले में उन्होंने कानून-व्यवस्था को सबसे बड़ी ताकत बताया, स्मृति ईरानी की वापसी को सही कदम माना और गडकरी के काम के साथ उनकी नीयत का भी बचाव किया.




