जो आज विरोध करेगा, उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी- महिला आरक्षण पर लोकसभा में बोले PM मोदी, 10 बड़ी बातें
पीएम मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए कहा कि इसे 25-30 साल पहले ही लागू कर देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि आज हम इसे एक परिपक्व चरण तक ले आए हैं. ज़रूरत के हिसाब से, इसमें समय-समय पर सुधार भी किया जाता है, और यही लोकतंत्र की सुंदरता है.
महिला आरक्षण और परिसीमन पर लोकसभा में बोलते हुए पीएम मोदी
PM Modi on Women's Reservation Bill and Delimitation 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद के विशेष तीन दिवसीय सत्र के दौरान लोकसभा में महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि यह बिल भारत की संसदीय लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है. इससे देश की राजनीति में एक नई दिशा तय होगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि जो आज विरोध करेंगे, उनको लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.
लोकसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ़ नहीं करेगी.. मैं आज आपके पास यह अपील करने आया हूं कि इसे राजनीति के तराजू पर न तौलें... आज पूरा देश, खासकर नारी शक्ति, हमारे फ़ैसलों को ज़रूर देखेगी लेकिन फ़ैसलों से ज़्यादा, वे हमारे इरादों को देखेंगी. उन्होंने कहा, "मैं आज पूरी ज़िम्मेदारी के साथ यह कहना चाहता हूं कि इससे किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. यह निर्णय प्रक्रिया किसी के लिए भी अनुचित नहीं होगी. जो सरकार पहले सत्ता में थी, सीटों का जो परिसीमन हुआ था, और तब से जो अनुपात चला आ रहा है- वह सब अपरिवर्तित रहेगा, और वह अनुपात वैसा ही बना रहेगा."
पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें
1- किसी देश के जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं, जब समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता मिलकर एक ऐतिहासिक विरासत तैयार करती है. भारत की संसदीय लोकतंत्र की यात्रा में यह भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो आने वाले वर्षों के लिए मजबूत नींव तैयार करेगा.
2- महिला आरक्षण का विचार 25-30 साल पहले सामने आया था और तब ही इसे लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन अब इसे परिपक्व रूप में लाया गया है. लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि समय-समय पर जरूरत के अनुसार बदलाव होते रहते हैं. भारत 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' है. हजारों वर्षों की लोकतांत्रिक परंपरा में यह फैसला एक नई दिशा जोड़ने वाला साबित होगा.
3- मैंने शुरू में ही कहा था कि हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें देश की आधी आबादी से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण, राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला है... हम सांसदों को इस महत्वपूर्ण अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए.
4- हम भारतीय मिलकर देश को एक नई दिशा देने जा रहे हैं. हम अपनी शासन प्रणाली में संवेदनशीलता लाने के लिए एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं. यह न केवल राष्ट्र की राजनीति को आकार देगा, बल्कि यह देश की दिशा और दशा भी तय करेगा.
5- 21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है. आज हम सभी दुनिया में भारत की स्वीकार्यता को महसूस करते हैं. यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है.
6- मेरा मानना है कि 'विकसित भारत' का मतलब केवल रेलवे, सड़कें, बुनियादी ढांचा, या आर्थिक या प्रगति के आंकड़े ही नहीं हैं. हम 'विकसित भारत' को लेकर इतनी संकीर्ण सोच रखने वाले लोग नहीं हैं. हम एक ऐसा 'विकसित भारत' चाहते हैं, जहां नीति-निर्माण में 'सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र सही मायने में साकार हो. यह समय की मांग है कि देश की 50% आबादी नीति-निर्माण का हिस्सा बने.
7- हमने इसमें पहले ही देरी कर दी है. इसके कारण चाहे जो भी रहे हों, या इसके लिए जो भी ज़िम्मेदार हो, हमें इस सच्चाई को स्वीकार करना ही होगा. मुझे पता है कि जब यह प्रक्रिया चल रही थी, तब सभी दलों के साथ विचार-विमर्श किया गया था. सिवाय एक दल के, बाकी जिन-जिन से भी हमारी मुलाक़ात हुई, किसी ने भी कोई सैद्धांतिक विरोध नहीं जताया. बाद में जो कुछ भी हुआ हो, अब एक राजनीतिक दिशा अपनाई जा रही है.
8- मैं उन लोगों को भी एक सलाह देना चाहूंगा जो सिर्फ़ राजनीतिक नज़रिए से सोचते हैं. जब से हमारे देश में महिला आरक्षण पर चर्चा शुरू हुई है, और उसके बाद जितने भी चुनाव हुए हैं, जिसने भी महिलाओं के इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ़ नहीं किया है.
9- 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को स्वीकार किया था. पूरे देश में खुशी का वातावरण बना और उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगा, इसलिए ये राजनीतिक मुद्दा नहीं बना। ये अच्छी स्थिति है. अब सवाल ये है कि अब हमें कितने समय तक इसे रोकना होगा?
10- महिला आरक्षण देश के लोकतंत्र के पक्ष में होगा, यह देश की सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया के पक्ष में होगा, और इसका श्रेय हम सभी को मिलेगा. न तो वित्त विभाग और न ही मोदी इसके एकमात्र हकदार होंगे, और न ही यहां बैठे सभी लोग इसके एकमात्र हकदार होंगे. मैं चाहूंगा कि जो लोग इसमें राजनीति की बू सूंघते हैं, वे पिछले 30 वर्षों के अपने ही नज़रिए की जांच करें और देखें कि क्या इसमें कोई लाभ है. मेरा मानना है कि इसे कोई राजनीतिक रंग देने की कोई ज़रूरत नहीं है."




