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G7 Summit में PM मोदी के खास तोहफे: अश्वगंधा, हल्दी से लेकर ठेकुआ तक, विदेशी मेहमानों को क्या-क्या दिया

G7 Summit में PM नरेंद्र मोदी ने दुनिया के नेताओं को भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत से जुड़े खास उपहार दिए. इनमें नागौरी अश्वगंधा, लकाडोंग हल्दी, कश्मीरी सिल्क कारपेट, बनारसी सिल्क और कलमकारी पेंटिंग शामिल रहीं.

G7 Summit में PM मोदी के खास तोहफे: अश्वगंधा, हल्दी से लेकर ठेकुआ तक, विदेशी मेहमानों को क्या-क्या दिया
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कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, कृषि और हस्तशिल्प विरासत से जुड़े खास उपहार भेंट किए. इन उपहारों में राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी अश्वगंधा, मेघालय की लकाडोंग हल्दी, जम्मू-कश्मीर का रामबन शहद, बनारसी सिल्क स्टोल, कश्मीरी सिल्क कारपेट और पारंपरिक कलाकृतियां शामिल रही.

इन उपहारों के जरिए भारत ने दुनिया के सामने अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, हस्तशिल्प कला और स्थानीय उत्पादों की विशेष पहचान को प्रदर्शित किया. इसी के साथ आइए जानते हैं कि पीएम मोदी ने G7 समित ने क्या-क्या उपहार दिए हैं.

नागौरी अश्वगंधा: राजस्थान की आयुर्वेदिक विरासत

प्रधानमंत्री मोदी ने कई वैश्विक नेताओं को राजस्थान के नागौर जिले में उगाई जाने वाली नागौरी अश्वगंधा भेंट की. शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी में तैयार होने वाली यह अश्वगंधा उच्च गुणवत्ता वाले विथेनोलाइड तत्वों के लिए प्रसिद्ध है. GI टैग प्राप्त यह औषधीय पौधा आयुर्वेद में रसायन औषधि माना जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है.

लकाडोंग हल्दी: मेघालय का सुनहरा खजाना

मेघालय के जैंतिया हिल्स क्षेत्र में उगाई जाने वाली लकाडोंग हल्दी भी G7 नेताओं को दिए गए उपहारों में शामिल रही. यह हल्दी अपने अत्यधिक कर्क्यूमिन तत्व के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है. लाल मिट्टी, अधिक वर्षा और पारंपरिक खेती इसे विशेष बनाती है. GI टैग प्राप्त यह हल्दी एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जानी जाती है.

रामबन शहद: हिमालयी फूलों की मिठास

जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में तैयार होने वाला रामबन हनी (Ramban Honey) भी प्रधानमंत्री मोदी के उपहारों का हिस्सा रहा. हिमालयी जड़ी-बूटियों और जंगली फूलों से तैयार इस शहद को प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, एंजाइम और पोषक तत्वों का समृद्ध स्रोत माना जाता है. यह स्थानीय मधुमक्खी पालकों की पारंपरिक आजीविका का भी प्रतीक है.

बनारसी सिल्क स्टोल: सदियों पुरानी बुनाई कला

वाराणसी में हाथ से बुना गया बनारसी सिल्क स्टोल भारतीय वस्त्र परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है. महीन रेशम और जरी के जटिल काम से तैयार यह स्टोल प्रकृति से प्रेरित डिजाइनों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए जाना जाता है. GI टैग प्राप्त बनारसी सिल्क भारत की सबसे प्रतिष्ठित टेक्सटाइल विरासतों में गिना जाता है.

स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को मिले थेवा मोटिफ कफलिंक

स्लोवाकिया के राष्ट्रपति Peter Pellegrini को प्रधानमंत्री मोदी ने हैंडक्राफ्टेड थेवा मोटिफ कफलिंक भेंट किए. राजस्थान के प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा कला में सोने की बारीक नक्काशी को रंगीन कांच पर उकेरा जाता है. यह भारत की दुर्लभ आभूषण कला परंपराओं में से एक है.

हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर

राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को ही हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर सेट भी उपहार में दिया गया. महाराष्ट्र के औरंगाबाद की हिमरू बुनाई कला रेशम और कपास के मिश्रण से तैयार की जाती है और अपनी रिवर्सिबल डिजाइन, मुलायम बनावट और शाही लुक के लिए प्रसिद्ध है.

डोकरा एंटीलोप सेट: आदिवासी कला की झलक

प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को ब्रास डोकरा एंटीलोप सेट भी भेंट किया. यह छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगरों द्वारा तैयार की जाने वाली सदियों पुरानी डोकरा धातु कला का उत्कृष्ट उदाहरण है.

स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को मिला कश्मीरी सिल्क कारपेट

स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री Robert Fico को कश्मीरी सिल्क कारपेट उपहार में दिया गया. श्रीनगर क्षेत्र में तैयार होने वाले ये कालीन प्राकृतिक रेशम से हाथों से बुने जाते हैं और अपनी बारीक नक्काशी, फूलों और बेल-बूटों वाले डिजाइनों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं.

फ्रांस की प्रथम महिला को मिला पोचमपल्ली सिल्क स्टोल

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron की पत्नी Brigitte Macron को प्रधानमंत्री मोदी ने पोचमपल्ली सिल्क स्टोल भेंट किया. तेलंगाना की प्रसिद्ध इकत बुनाई तकनीक से तैयार यह स्टोल अपनी ज्यामितीय और पुष्पीय डिजाइनों के लिए जाना जाता है.

राष्ट्रपति मैक्रों को मिली महाभारत पर आधारित कलमकारी पेंटिंग

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को आंध्र प्रदेश की पारंपरिक कला पर आधारित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की गई. हाथ से बनाई गई इस कलाकृति को तैयार करने में लगभग छह महीने का समय लगा. इसमें महाभारत के प्रसंगों को पारंपरिक कलमकारी शैली में चित्रित किया गया है, जो भारतीय संस्कृति, धर्म और नैतिक मूल्यों को दर्शाती है.

भारत की सॉफ्ट पावर का संदेश

G7 सम्मेलन में दिए गए ये उपहार केवल स्मृति चिह्न नहीं थे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना का वैश्विक प्रदर्शन भी थे. इन उपहारों के माध्यम से भारत ने दुनिया को अपनी समृद्ध विरासत और आत्मनिर्भरता की झलक दिखाई.

नरेंद्र मोदी
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